मंडला कान्हा नेशनल पार्क में नए साल का जश्न फीका, नई गाइडलाइन ने पर्यटकों का रोमांच किया शांत
मंडला के कान्हा नेशनल पार्क में नजर आई पर्यटकों की कमी, गुलजार रहने वाला नेशनल पार्क पड़ा फीका, नई गाइडलाइन और नाइट सफारी बनी वजह.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : December 31, 2025 at 8:40 AM IST
|Updated : December 31, 2025 at 9:33 AM IST
मंडला: नए साल की अगवानी को लेकर देश-विदेश से आए पर्यटकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है. हर रिसॉर्ट फुल हैं, सफारी बुकिंग हाउसफुल चल रही है, लेकिन इसी बीच प्रशासन की एक नई गाइडलाइन ने पर्यटकों की खुशियों पर मानो ब्रेक लगा दिया है. कान्हा नेशनल पार्क के खटिया गेट पर उस वक्त अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब आला अधिकारियों ने पर्यटकों को नई प्रशासनिक गाइडलाइन की जानकारी दी. वहीं नाइट सफारी न होने से पर्यटकों के आगमन पर असर पड़ा है.
नई गाइडलाइन ने किया परेशान
इस गाइडलाइन के मुताबिक, पर्यटक सफारी के दौरान न तो कैमरे का उपयोग कर सकेंगे और न ही मोबाइल फोन से फोटो या वीडियो बना सकेंगे. जैसे ही यह जानकारी सामने आई, पर्यटक हैरान रह गए और एक-दूसरे को देखकर भौचक्के से खड़े रह गए. प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय कोर्ट के आदेश के तहत लिया गया है. वन्यजीवों की सुरक्षा, उनकी प्राकृतिक गतिविधियों में किसी भी तरह की बाधा न आए, इसी उद्देश्य से कैमरा और मोबाइल के उपयोग पर रोक लगाई गई है.
कान्हा नेशनल पार्क आए पर्यटक हुए निराश
पर्यटकों का कहना है कि कान्हा जैसे विश्व प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व में आकर अगर वे यादगार पलों को कैमरे में कैद नहीं कर पाएंगे, तो सफारी का रोमांच अधूरा रह जाएगा. कई पर्यटक तो नए साल की शुरुआत टाइगर और जंगल की खूबसूरत तस्वीरों के साथ करना चाहते थे, लेकिन नई गाइडलाइन ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया. भले ही कान्हा के सभी रिसॉर्ट पर्यटकों से पूरी तरह फुल चल रहे हों, लेकिन टूरिस्टों की संख्या में कमी देखी गई है. उसकी एक वजह नाइट सफारी पर रोक है. वहीं नई गाइडलाइन को लेकर खुशी और निराशा दोनों भाव साफ तौर पर देखे जा सकते हैं.

नाइट सफारी बंद होने से पड़ा असर
वहीं वन विभाग का कहना है कि वन्यजीवों को फ्लैश लाइट, शोर और मोबाइल गतिविधियों से होने वाले तनाव से बचाना जरूरी है. इसी वजह से सख्ती बरती जा रही है. नए साल को लेकर इस साल वो स्थितियां नहीं है. सफारी में 70-80 गाड़ियां जा पा रही हैं. जबकि 80 से 90 गाड़िया अभी तक उपलब्ध हैं, वह भी थोड़ा काम है. रिसॉर्ट इंचार्ज वरुण बघेल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से नाइट सफारी के बंद होने के कारण कारण कान्हा नेशनल पार्क में इसका बहुत ज्यादा असर पड़ा हुआ है. सुबह की सफारी में जो पर्यटक नहीं जा पाते थे, वो रात्रि कालीन सफारी का आनंद लेते थे, लेकिन अब वो भी बंद हो गई है."
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गाइट यूनियन के अध्यक्ष संत कुमार यादव ने बताया कि "पहले जैसा माहौल नहीं है. जरूरत है एक और नए वफर जोन को बढ़ाया जाए. जिससे पर्यटकों की संख्या तो बढे, साथ ही रोजगार के अवसर भी बने."
वहीं कमलेश ढाबा के संचालक ने बताया कि इस बार 31 दिसम्बर को लेकर कान्हा पार्क में पर्यकों की कमी है. 38 सालों से ढाबे का संचालन कर रहा हूं, लेकिन इस बार कान्हा पार्क सूना है, इसका कारण नाइट सफारी बन्द होना है. टिकट काउंटर से टिकट न मिलकर ऑनलाइन टिकट की बुकिंग होना है."

