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हर सांस मशीनों के सहारे, फेफड़ों की गंभीर बीमारी से ग्रस्त मासूम ऋतिका, एक मदद की है आस

सालों से जिंदगी और मौत से लड़ रही मंडला की मासूम बेटी, ऑक्सीजन के सहारे चल रही जिंदगी, 2020 में पिता की हुई थी मौत.

mandla student suffering lung disease
जिंदगी और मौत से लड़ रही 14 वर्षीय ऋतिका (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : February 19, 2026 at 10:50 PM IST

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Updated : February 19, 2026 at 10:58 PM IST

4 Min Read
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मंडला: विकासखंड मवई निवासी 14 वर्षीय ऋतिका यादव इन दिनों जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही है. फेफड़ों की गंभीर बीमारी सिस्टिक फाइब्रोसिस से पीड़ित ऋतिका कटरा हॉस्पिटल में ऑक्सीजन सपोर्ट पर भर्ती है. उसकी हर सांस मशीनों के सहारे चल रही है और परिवार की उम्मीदें अब समाज और प्रशासन की मदद पर टिकी हैं.

ऑक्सीजन सपोर्ट पर चल रही जिंदगी

मवई विकासखंड के ग्राम घुटास निवासी ऋतिका के पिता मुन्ना लाल यादव का वर्ष 2020 में आकस्मिक निधन हो गया था. पिता के साए के बिना पली इस बेटी की मां तारेश यादव पिछले छह वर्षों से लगातार इलाज के लिए संघर्ष कर रही हैं. दिसंबर 2025 में ऋतिका का इलाज एम्स नागपुर में चल रहा था, हालत बिगड़ने पर उसे मेडिकल कॉलेज नागपुर में भर्ती कराया गया, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ. 26 जनवरी को गंभीर स्थिति में उसे ऑक्सीजन सपोर्ट पर कटरा हॉस्पिटल में भर्ती करना पड़ा. डॉक्टरों ने बेहतर उपचार के लिए ऋतिका को चंडीगढ़ स्थित पीजीआई रेफर किया है.

बच्ची को एयर एंबुलेंस से चंडीगढ़ भेजने की तैयारी (Etv Bharat)

एंबुलेंस और ऑक्सीजन का खर्च चुनौती

चंडीगढ़ तक ऑक्सीजन सपोर्ट के साथ विशेष एयर एंबुलेंस की व्यवस्था अत्यंत महंगी है. परिवार की आर्थिक स्थिति पहले ही कमजोर हो चुकी है. मां तारेश यादव ने अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार हर संभव प्रयास किया, लेकिन अब संसाधन पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं. ऋतिका का उपचार अब तक आयुष्मान योजना के माध्यम से होता रहा, लेकिन दूसरे राज्य में इलाज के दौरान योजना का पूरा लाभ नहीं मिल सका.

एयर एंबुलेंस से चंडीगढ़ भेजने की तैयारी

अब यात्रा खर्च, महंगी दवाइयां और लंबा उपचार परिवार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. क्षेत्रीय विधायक नारायण सिंह पट्टा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से चर्चा की है. प्रशासनिक सहयोग से ऋतिका को एयर एंबुलेंस के माध्यम से चंडीगढ़ भेजने की तैयारी की जा रही है. डॉक्टरों के अनुसार, ऋतिका के जीवन को बचाने के लिए उसे जल्द से जल्द पीजीआई चंडीगढ़ पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है.

cystic fibrosis disease
ऑक्सीजन सपोर्ट पर चल रही जिंदगी (ETV Bharat)

'मेरी बेटी को बचा लो'

ऋतिका की मां तारेश यादव ने कहा, " बेटी की हर सांस बचाने के लिए समाज से मदद की अपील कर रही हूं. 14 वर्ष की यह मासूम बच्ची, जिसने अभी जीवन को ठीक से समझा भी नहीं, आज जिंदगी की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रही है. समाज के सभी लोग आगे आकर इस बेटी की जिंदगी बचाने में सहयोग करें. मैं पिछले छह साल से बेटी का इलाज करा रही हूं. अब मेरे पास कुछ भी नहीं बचा है. बस मेरी बेटी को बचा लीजिए."

समय पर उपचार मिलना बेहद जरूरी

कटरा अस्पताल की डॉ. एम.जी. पी.जे ने बताया, "मरीज की हालत गंभीर है. बेहतर उपचार के लिए पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया है. समय पर उपचार मिलना बेहद जरूरी है, लेकिन जब तक चंडीगढ़ जाने की व्यवस्था नहीं बनती हमारे अस्पताल द्वारा एक कमरा और पूरे समय ऑक्सीजन की व्यवस्था मरीज को दी जा रही है. जिसका किसी प्रकार का पैसा मरीज से नहीं लिया जा रहा है. ये फैसला अस्पताल प्रबंधन द्वारा लिया गया है."

समाजसेवी पंकज सोनी ने बताया, "मेरी भी बिटिया कटरा अस्पताल में एडमिट थी. जब मुझे ऋतिका यादव की बीमारी के बारे में पता लगा तो मैं खुद को रोक नहीं पाया. मैंने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रशासन और समाज से अपील करते हुए कि इस बच्ची की मदद के लिए आगे आएं, ताकि समय रहते इसका इलाज हो सके."

Last Updated : February 19, 2026 at 10:58 PM IST