महान चित्रकार सैयद हैदर रजा की जयंती पर लोगों ने दी श्रद्धांजलि, पद्म पुरस्कारों से हो चुके हैं सम्मानित
मंडला में कला प्रेमियों ने प्रसिद्ध चित्रकार सैयद हैदर रजा को जन्मदिन पर किया नमन, बिंझिया स्थित कब्रिस्तान में दी श्रद्धांजलि.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 22, 2026 at 10:42 PM IST
मंडला: मध्य प्रदेश के मंडला सहित देश में कई जगह पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित विश्व के महानतम चित्रकारों में शुमार मरहूम सैयद हैदर रजा का जन्मदिन मनाया गया. मंडला के बिंझिया स्थित कब्रिस्तान में रविवार को बड़ी संख्या में कला प्रेमियों ने सैयद हैदर रजा की जयंती के मौके पर उनकी कब्र पर पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की.
सैयद हैदर रजा को जन्मदिन पर नमन
विश्व के महानतम चित्रकार सैयद हैदर रजा का सफर मंडला के ककैया गांव के एक छोटे स्कूल से शुरू हुआ, जहां उनके शिक्षक ने उन्हें एक बिंदु पर ध्यान लगाने को कहा. आगे चलकर यही बिंदु उनकी कला का मुख्य आधार बना. अपनी अनोखी चित्रकला शैली और रंगों के मिश्रण ने उन्हें विश्व पटल पर चित्रकारी के शिखर पर पहुंचा दिया. पेरिस में 50 साल रहने के बावजूद हैदर रजा भारत और विशेष कर मंडला की मिट्टी से जुड़े रहे.
हैदर रजा की कला और व्यक्तित्व को किया याद
सैयद हैदर रजा की मृत्यु के बाद उनकी इच्छा के अनुरूप मंडला स्थित कब्रिस्तान में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उन्हें सुपुर्द ए खाक किया गया. हैदर रजा की कब्र के बगल में ही उनके पिता सैयद मोहम्मद रजा की कब्र है. बड़ी संख्या में कलाकारों ने उनके जन्म दिवस पर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित कर उनकी कला और उनके व्यक्तित्व को याद किया. पूर्व निवास विधायक और जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. अशोक मर्सकोले भी कब्रिस्तान पहुंचे और रजा साहब को श्रद्धा सुमन अर्पित किए.

वाटर कलर का कैंप आयोजित
इस मौके पर रजा फाउंडेशन से जुड़े वरिष्ठ चित्रकार अखिलेश ने बताया, "बीते 10 सालों से रजा साहब को हम सब कलाकार श्रद्धांजलि दे रहे हैं. इस दौरान रजा फाउंडेशन द्वारा मंडला में लगातार युवा कलाकारों के लिए कई प्रोग्राम आयोजित किए जाते रहे हैं. इस साल भी वाटर कलर का कैंप आयोजित किया गया है. जिसमें मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कलाकार शामिल हुए हैं. साथ ही हमारी जो कार्यशाला है वह चल रही है. इसमें लोग आते हैं और टेराकोटा पेंट करते हैं."

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रजा फाउंडेशन से जुड़े एक वरिष्ठ चित्रकार मनीष पुष्कले ने कहा, "हमारा सौभाग्य है कि ऐसी पीढ़ी जिसने एक तरीके से देश की आजादी के साथ पूरी कला जगत को विकसित किया. उस पीढ़ी को देख पाना, यह अपने आप में बड़े सौभाग्य की बात है. उन्होंने पूरे विश्व में अपने चित्र का लोहा मनवाया है."

