सरस मेले में दिखा आत्मनिर्भर हिमाचल का मॉडल, बैंबू आर्ट ने जीता सबका दिल
अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के दौरान आयोजित सरस मेला महिलाओं के लिए एक मजबूत प्लेटफॉर्म साबित हो रहा है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 19, 2026 at 4:17 PM IST
मंडी: छोटी काशी मंडी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव 2026 के दौरान इंदिरा मार्केट की छत पर लगा सरस मेला इस बार खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. यह मेला केवल खरीदारी का स्थान नहीं, बल्कि स्वयं सहायता समूहों की मेहनत, हुनर और आत्मनिर्भरता की मजबूत मिसाल बनकर सामने आया है. हिमाचल प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए समूह यहां अपने उत्पादों के जरिए अपनी पहचान बना रहे हैं.
सरस मेला ग्रामीण महिलाओं और छोटे उद्यमियों के लिए सीधा बाजार उपलब्ध करा रहा है. यहां पारंपरिक हस्तशिल्प, हैंडलूम, बांस शिल्प, सजावटी वस्तुएं और दैनिक उपयोग के उत्पाद लोगों को आकर्षित कर रहे हैं. इन उत्पादों के पीछे गांवों की महिलाओं की मेहनत छिपी है, जो अपने हुनर से परिवार की आय बढ़ाने में योगदान दे रही हैं.
बैंबू आर्ट से पहचान बना रहा ये सेल्फ हेल्प ग्रुप
इस मेले में जिला ऊना के बंगाणा क्षेत्र से आए अजय कुमार अपने बैंबू आर्ट उत्पादों के कारण अलग पहचान बना रहे हैं. वे 'जागृति सेल्फ हेल्प ग्रुप' से जुड़े मास्टर ट्रेनर हैं. अजय कुमार ने बताया कि उन्होंने लॉकडाउन के दौरान बांस शिल्प का काम शुरू किया था. उस समय उन्होंने करीब 25 महिलाओं को छह माह का प्रशिक्षण दिया. वर्तमान में इनमें से पांच महिलाएं नियमित रूप से उनके साथ कार्य कर रही हैं. अजय कुमार का कहना है कि यह काम महिलाओं के लिए आय का स्थायी स्रोत बनता जा रहा है.

महिलाओं को मिल रहा हुनर का उचित मूल्य
स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बांस से टोकरी, लैंप शेड, सजावटी सामान, घरेलू उपयोग की वस्तुएं और उपहार सामग्री तैयार कर रही हैं. इन उत्पादों को उनसे खरीदा जाता है और फिर सरस मेले जैसे बड़े आयोजनों में बिक्री के लिए लाया जाता है. इस प्रक्रिया से महिलाओं को उनके हुनर का उचित मूल्य मिल रहा है. उनकी आर्थिक स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है और वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं.

पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद पहल
अजय कुमार ने बताया कि बैंबू आर्ट की यह पारंपरिक कला पर्यावरण के लिए भी बेहद लाभकारी है. बांस से बने उत्पाद पूरी तरह इको-फ्रेंडली हैं और प्लास्टिक का बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि चावल के छिलके से तैयार किया गया इको-फ्रेंडली ब्रश भी बनाया गया है, जो खराब होने पर किसी प्रकार का प्रदूषण नहीं फैलाता. इसके विपरीत प्लास्टिक उत्पाद पर्यावरण को लंबे समय तक नुकसान पहुंचाते हैं.

नॉर्थ ईस्ट से मिली प्रेरणा, हिमाचल में नई शुरुआत
अजय कुमार ने बताया कि नॉर्थ ईस्ट राज्यों में बांस से कई तरह की वस्तुएं बनाई जाती हैं. उसी तर्ज पर अब हिमाचल प्रदेश की महिलाएं भी अपने खाली समय में बांस से विभिन्न प्रकार की उपयोगी और सजावटी चीजें बना रही हैं. उन्होंने कहा कि इस कला को आगे बढ़ाने के लिए अन्य लोगों को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस हुनर से जुड़ें और रोजगार के नए अवसर पैदा हों.

सरस मेला बना सशक्तिकरण का मंच
अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के दौरान आयोजित सरस मेला महिलाओं के लिए एक मजबूत प्लेटफॉर्म साबित हो रहा है. यहां वे अपने हाथों से बने उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुंचा पा रही हैं. यह मेला केवल व्यापार का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की मिसाल भी पेश कर रहा है. छोटी काशी मंडी की छत पर सजा यह सरस मेला साबित कर रहा है कि अगर अवसर मिले तो ग्रामीण महिलाएं भी अपने हुनर से नई पहचान बना सकती हैं.
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