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अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव: 121 KM का सफर तय कर मंडी पहुंचे मगरू महादेव, छोटी काशी में दिखा देव परंपरा का भव्य स्वरूप

लोक मान्यताओं के अनुसार मगरू महादेव भगवान शिव के अंशावतार हैं और क्षेत्र के रक्षक देवता के रूप में पूजे जाते हैं.

INTERNATIONAL SHIVRATRI FESTIVAL
अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के लिए मंडी पहुंचे मगरू महादेव (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : February 15, 2026 at 9:51 PM IST

3 Min Read
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मंडी: अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के पावन अवसर पर छोटी काशी के नाम से विख्यात मंडी में एक बार फिर आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला. दूरदराज क्षेत्र छतरी से मगरू महादेव ने 121 किलोमीटर की लंबी और कठिन यात्रा तय कर मंडी में अपनी ऐतिहासिक उपस्थिति दर्ज कराई. मंडी पहुंचने पर मगरू महादेव ने सबसे पहले माधव राय मंदिर में शीश नवाकर विधिवत दर्शन किए. उनके साथ देवता बायला नारायण, देवता नाग चपलांदू और देवी बायला की गुशैण भी मौजूद रहीं.

अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के लिए मंडी पहुंचे मगरू महादेव (ETV BHARAT)

पांच दिनों में पूरी हुई 121 किलोमीटर की यात्रा

देवता के गुर गंगाराम ने बताया कि मगरू महादेव ने पांच दिनों में 121 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर छोटी काशी में प्रवेश किया. उन्होंने कहा कि मगरू महादेव भगवान शिव के अंशावतार माने जाते हैं और जदोआ लगने के बाद ही शिवरात्रि महोत्सव का विधिवत शुभारंभ होता है. गंगाराम ने कहा, "देव परंपराओं के अनुसार ही सभी धार्मिक कार्य संपन्न किए जा रहे हैं. देवता की कृपा से यात्रा सफल रही और श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा गया."

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अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के लिए मंडी पहुंचे मगरू महादेव (ETV BHARAT)

रास्ते भर हुआ भव्य स्वागत

छतरी से मंडी तक के मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने देवता के रथ का जोरदार स्वागत किया. ढोल-नगाड़ों की गूंज और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा. "हर-हर महादेव" के जयकारों से घाटियां गूंज उठीं. देवता के कारदार कश्मीर सिंह ने बताया कि सदियों पुरानी परंपराओं का पालन करते हुए कमेटी ने सभी व्यवस्थाएं कीं. उन्होंने कहा, "रास्ते में हर गांव में देवता का भव्य स्वागत हुआ. लोगों की आस्था और श्रद्धा आज भी उतनी ही मजबूत है."

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पांच दिनों में पूरी हुई 121 किलोमीटर की यात्रा (ETV BHARAT)

लोक मान्यताओं के अनुसार मगरू महादेव भगवान शिव के अंशावतार हैं और क्षेत्र के रक्षक देवता के रूप में पूजे जाते हैं. कहा जाता है कि प्राचीन समय में जब क्षेत्र प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहा था, तब मगरू महादेव की आराधना से लोगों को संरक्षण मिला. तभी से उन्हें न्यायप्रिय और कल्याणकारी देवता माना जाता है.

देवता के पुरोहित हेत राम ने बताया कि एक समय ऐसा भी था जब कुछ वर्षों तक देवता शिवरात्रि महोत्सव में नहीं पहुंचे. लेकिन अब लगातार देवता का आगमन हो रहा है. पहले मंडी मेला मूल रूप से मगरू महादेव का मेला माना जाता था. जब तक मगरू महादेव मेला स्थल पर नहीं पहुंचते थे, तब तक कोई अन्य देवी-देवता प्रवेश नहीं करता था.

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ढोल नगाड़ों के साथ हुआ स्वागत (ETV BHARAT)

मगरू महादेव का शिवरात्रि में विशेष महत्व

परंपरा के अनुसार मगरू महादेव उन देवताओं में शामिल हैं जो सबसे लंबी दूरी तय कर मंडी पहुंचते हैं. यही कारण है कि उनके आगमन को विशेष महत्व दिया जाता है. मान्यता है कि उनके आगमन से वर्ष भर क्षेत्र में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है. अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के दौरान दूर-दराज क्षेत्रों से आए देवी-देवताओं का यह संगम छोटी काशी मंडी को दिव्य स्वरूप में परिवर्तित कर देता है. श्रद्धा, संस्कृति और परंपरा का यह अद्भुत मेल हिमाचल की समृद्ध देव संस्कृति की झलक प्रस्तुत करता है. मगरू महादेव का यह आगमन न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करता है, बल्कि सदियों पुरानी देव परंपराओं को भी जीवंत बनाए रखता है.

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