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अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव: 5 दशक बाद देवी-देवताओं को पड्डल में मिला सम्मानजनक स्थान

पड्डल मैदान के दायरे में बनी सीढ़ियों पर देवी-देवताओं के बैठने की स्थाई व्यवस्था कर दी गई है.

Mandi International Shivratri Festival 2026
देवी-देवताओं को पड्डल में मिला सम्मानजनक स्थान (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : February 18, 2026 at 7:51 PM IST

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Updated : February 18, 2026 at 10:44 PM IST

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मंडी: अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव 2026 को लेकर मंडी में काफी चहल-पहल है. शिवरात्रि महोत्सव में 52 वर्षों बाद पड्डल मैदान में देवी-देवताओं के बैठने के लिए सम्मानजनक स्थान की व्यवस्था हो पाई है. देव समाज की मांग पर इस बार मंडी जिला प्रशासन ने पहल करते हुए देवी-देवताओं के बैठने के लिए स्थाई व्यवस्था कर दी है. सर्व देवता समिति के अध्यक्ष शिव पाल शर्मा ने बताया कि 52 वर्षों बाद यह स्थाई व्यवस्था हो पाई है और इस व्यवस्था को देव समाज के साथ कई बार मंत्रणा करने के बाद ही अंतिम स्वरूप दिया गया है.

छोटी काशी मंडी का अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव जो देव आस्था और विश्वास का एक अद्भुत महाकुंभ है. पहले यह देव महाकुंभ मंडी शहर के विभिन्न स्थानों पर होता था, लेकिन वर्ष 1973 के बाद इसे पड्डल मैदान में आयोजित किया जाने लगा. पड्डल मैदान में कभी भी देवी-देवताओं के बैठने की स्थाई व्यवस्था नहीं हो पाई. देव समाज लंबे समय से इस मांग को उठा रहा था. लेकिन, इस बार देव समाज की यह मांग जिला प्रशासन ने पूरी कर दी है. पड्डल मैदान के दायरे में बनी सीढ़ियों पर देवी-देवताओं के बैठने की स्थाई व्यवस्था कर दी गई है.

Mandi International Shivratri Festival 2026
अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव (ETV Bharat)

पैगोडा शैली में बने तम्बुओं में देवी-देवता

इस बार देवी-देवताओं को पहली बार पैगोडा शैली में बने अस्थाई तम्बुओं के नीचे बैठाया गया है. डीसी मंडी अपूर्व देवगन ने बताया कि, "देव दर्शनों के लिए एक देव भ्रमण श्रृंखला बनाई गई है, जिसके माध्यम से लोग आसानी से अपने आराध्य देवी-देवताओं के दर्शन कर पा रहे हैं. प्रशासन के पास देव समाज की यह मांग लंबे समय से थी और इस बार इसे देव समाज की अनुमति के बाद मूर्त रूप दे दिया गया है. इस महोत्सव में मंडी जनपद के 216 पंजीकृत देवी-देवताओं को आमंत्रित किया जाता है जिसमें से 190 के करीब देवी-देवता हर बार इसमें शिरकत करने आते हैं. हर बार प्रशासन की तरफ से मेले में कुछ न कुछ नया करने का प्रयास किया जाता है, ताकि देव समाज और लोगों को बेहतरीन सुविधा दी जा सके."

वहीं, देव समाज से जुड़े लोग भी प्रशासन की इस व्यवस्था से खासे खुश नजर आ रहे हैं. देव माहूंनाग के पुजारी दीनानाथ और देवी वाया की गुशैण के गुर मान चंद ने बताया कि, इस बार देवी-देवताओं को सम्मानजनक ढंग से बैठाने का प्रबंध किया गया है, जोकि प्रशंसनीय बात है. इससे देव समाज में खुशी का माहौल है.

Mandi International Shivratri Festival 2026
देवी-देवताओं को पड्डल में मिला सम्मानजनक स्थान (ETV Bharat)

वहीं, श्रद्धालु भी इस नई व्यवस्था से खासे खुश नजर आ रहे हैं. श्रद्धालु दीपक शर्मा और कैप्टन कर्म सिंह ने बताया कि, देवी-देवताओं के बैठने की जो व्यवस्था की गई है वो तो सराहनीय है ही लेकिन दर्शनों के लिए जो रास्ते का निर्माण किया गया है, उससे बड़ी आसानी से दर्शन हो पा रहे हैं.

देव महाकुंभ की सदियों पुरानी परंपरा

देव महाकुंभ के रूप में विख्यात अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव में देव आस्था के अनूठे और सदियों पुराने तौर-तरीके देखने को मिलते हैं. इस महोत्सव की शाही जलेब श्रद्धा और परंपरा का सबसे बड़ा प्रतीक मानी जाती है, जो हर वर्ष श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहती है. शिवरात्रि महोत्सव का इतिहास रियासतकाल से जुड़ा हुआ है. उसी दौर में शाही जलेब में चलने वाले देवी-देवताओं का क्रम निर्धारित कर दिया गया था, जो आज भी उसी परंपरा के अनुसार निभाया जाता है. जलेब में यह पहले से तय होता है कि कौन-से देवता राज देवता माधव राय की पालकी के आगे चलेंगे और कौन पीछे. वहीं कुछ ऐसे वरिष्ठ देवी-देवता भी हैं, जो स्वयं शाही जलेब में शामिल नहीं होते, बल्कि उनके वजीर उनकी ओर से जलेब में भाग लेते हैं.

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शिवरात्रि महोत्सव में देवता बूढ़ा बिंगल (ETV Bharat)

मंडी शिवरात्रि महोत्सव में नरोल देवता बूढ़ा बिंगल

देव संस्कृति के शोधकर्ता प्रकाश ठाकुर ने बताया कि, विशेष परंपराओं से जुड़ी एक रोचक कथा वरिष्ठ देवता बूढ़ा बिंगल की है. मान्यता है कि देवता बूढ़ा बिंगल मंडी नगर के आराध्य देव बाबा भूतनाथ के अवतार हैं. जब बाबा भूतनाथ मंदिर की स्थापना हुई थी उसे समय देवता बूढ़ा बिंगल को आमंत्रित किया गया था. देवता का मंदिर मंडी जिला मुख्यालय से लगभग सात किलोमीटर दूर रुंझ गांव में स्थित है.

Mandi International Shivratri Festival 2026
अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव में देवी-देवताओं को पड्डल में मिला सम्मानजनक स्थान (ETV Bharat)

जलेब में शामिल नहीं होते देवता बूढ़ा बिंगल

देव संस्कृति के शोधकर्ता प्रकाश ठाकुर ने बताया कि, "देवता बूढ़ा बिंगल के भंडार में आज भी ऐसे प्रमाण सुरक्षित हैं, जिनसे यह स्पष्ट होता है कि मंडी रियासत के समय शिवरात्रि महोत्सव का पहला न्योता इन्हीं देवता को राजा की ओर से दिया गया था. हालांकि, लिखित इतिहास में इनका उल्लेख बहुत सीमित रूप में ही मिलता है. देवता बूढ़ा बिंगल शिवरात्रि महोत्सव में भाग लेने के लिए मंडी तो आते हैं, लेकिन वे 'नरोल देवता' माने जाते हैं."

शोधकर्ता प्रकाश ठाकुर ने बताया कि, नरोल का अर्थ है कि देवता अपनी वरिष्ठता के आधार पर शिवरात्रि के दौरान राजमहल में वास करते हैं, परंतु शाही जलेब में स्वयं शामिल नहीं होते. देवता वर्ष में केवल एक बार ही अपने मूल स्थान से बाहर निकलते हैं, इसी कारण उन्हें नरोल देवता की श्रेणी में रखा गया है. शाही जलेब में देवता बूढ़ा बिंगल की ओर से उनके वजीर माने जाने वाले देव झाथी वीर शामिल होते हैं और परंपरा के अनुसार देव आस्था का निर्वहन करते हैं.

Mandi International Shivratri Festival 2026
मंडी की दीवारों पर उकेरी जा रही संस्कृति (ETV Bharat)

शिवरात्रि महोत्सव में पहली बार वॉल पेंटिंग प्रतियोगिता

इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के अवसर पर इस वर्ष नगर निगम मंडी द्वारा एक नई और अनूठी पहल की गई है. मंडी आर्ट फेस्टिवल 2026 के अंतर्गत पहली बार वॉल पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है, जिसने पूरे शहर को रंगों और रचनात्मकता से सजा दिया है. इसका शुभारंभ उपायुक्त अपूर्व देवगन ने किया. उपायुक्त अपूर्व देवगन ने कहा कि, "शहर के विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर उभर रहे ये भित्ति चित्र मंडी की स्थायी सांस्कृतिक पहचान बनेंगे. आने वाले समय में ये वॉल पेंटिंग न केवल स्थानीय नागरिकों के लिए गर्व का विषय होंगी, बल्कि पर्यटकों के लिए भी विशेष आकर्षण का केंद्र बनेंगी. कलाकार अपनी कृतियों में मंडी के इतिहास, देव संस्कृति, लोक परंपराओं और जनजीवन को सजीव रूप में प्रस्तुत करें, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपनी जड़ों से जुड़ी रह सकें."

Mandi International Shivratri Festival 2026
शिवरात्रि महोत्सव में पहली बार वॉल पेंटिंग प्रतियोगिता (ETV Bharat)

मंडी की दीवारों पर उकेरी जा रही संस्कृति, शिवरात्रि महोत्सव

प्रतियोगिता के तहत उपायुक्त कार्यालय मार्ग के किनारे और इंदिरा मार्केट क्षेत्र में कलाकारों द्वारा वॉल पेंटिंग तैयार की जा रही है. आनी क्षेत्र से आए कलाकार लीतेश 'सोंग द विंड कैरीज' विषय पर प्रकृति और मानवीय संवेदनाओं को दर्शाता चित्र बना रहे हैं, वहीं गौरव शर्मा अपनी साथी के साथ मंडी की देव परंपरा पर आधारित भित्ति चित्र तैयार कर रहे हैं. प्रदेश भर से चयनित 10 टीमों को शहर के अलग-अलग स्थानों पर पेंटिंग का दायित्व सौंपा गया है. निर्णायक मंडल द्वारा कलात्मक अभिव्यक्ति, विषय की प्रस्तुति, रंग संयोजन, रचनात्मकता और स्थानीय सांस्कृतिक तत्वों के प्रभावी चित्रण के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा.

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Last Updated : February 18, 2026 at 10:44 PM IST