शाही ठाठ के साथ निकली बाबा भूतनाथ की अंतिम जलेब, हर-हर महादेव से गूंजा पूरा मंडी
ढोल-नगाड़ों और बाजे-गाजों के साथ पूरे शहर में बाबा भूतनाथ की शाही जलेब निकाली गई.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 20, 2026 at 6:37 PM IST
मंडी: छोटी काशी मंडी में अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के दौरान बाबा भूतनाथ मंदिर की दूसरी और अंतिम शाही जलेब पूरे धार्मिक उल्लास, परंपरा और भव्यता के साथ निकाली गई. इस दौरान पूरा शहर भक्ति में डूबा नजर आया. ढोल-नगाड़ों, शंखनाद और हर-हर महादेव के जयकारों से वातावरण गूंज उठा. जलेब में आस्था, संस्कृति और लोक परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े.
ब्यास तट से भक्तिमय शुरुआत
शाही जलेब का शुभारंभ खलियार स्थित पवित्र ब्यास नदी के तट से किया गया. धार्मिक विधि-विधान और मंत्रोच्चार के बीच जैसे ही जलेब आगे बढ़ी, पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया. स्थानीय देवी-देवताओं की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया. श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में जयकारे लगाते हुए जलेब के साथ चलते रहे.
ब्यास तट से प्रारंभ हुई यह जलेब विक्टोरिया पुल, समखेतर, मोती बाजार, चौहटा बाजार, गांधी चौक, सेरी मंच और इंदिरा मार्केट परिसर से होती हुई पुनः ब्यास नदी के तट पर संपन्न हुई. मार्ग में कई स्थानों पर लोगों ने पुष्प वर्षा कर बाबा भूतनाथ का स्वागत किया. बाजारों और सड़कों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं. ढोल-नगाड़ों और बाजे-गाजों के साथ पूरी मंडी शहर में आस्था की लहर दौड़ गई.
परंपरा को मिल रहा विशेष स्थान
शिवरात्रि महोत्सव के दौरान बाबा भूतनाथ की शाही जलेब निकालने की परंपरा हाल के वर्षों में आरंभ हुई है, लेकिन अब यह महोत्सव का प्रमुख धार्मिक आकर्षण बन चुकी है. पहली जलेब शिवरात्रि के दिन निकाली गई थी, जबकि दूसरी और अंतिम जलेब शुक्रवार को संपन्न हुई. स्थानीय लोगों का मानना है कि इस आयोजन से मंडी की धार्मिक पहचान और अधिक सशक्त हो रही है.
संत-महात्माओं की रही मौजूदगी
बाबा भूतनाथ मंदिर के महंत देवानंद सरस्वती ने बताया कि सैकड़ों श्रद्धालुओं ने श्रद्धा भाव से जलेब में भाग लेकर आशीर्वाद प्राप्त किया. कई संत-महात्माओं की उपस्थिति ने आयोजन को और अधिक पावन बना दिया. उन्होंने सभी को शिवरात्रि पर्व की शुभकामनाएं दीं और बताया कि रविवार को मंदिर में विराजमान देवी-देवताओं की पारंपरिक विदाई के साथ महोत्सव के धार्मिक अनुष्ठानों का समापन किया जाएगा.
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