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11 जनवरी से कांग्रेस का मनरेगा बचाओ संग्राम, छत्तीसगढ़ के जिला मुख्यालयों में कल एक दिन का उपवास

सुबोध हरितवाल ने कहा- कोविड के समय मनरेगा ही ऐसी सरकारी योजना थी जो गरीब ग्रामीणों के लिए मिल का पत्थर साबित हुई.

manarega bachao sangraam
11 जनवरी से कांग्रेस का मनरेगा बचाओ संग्राम (ETV BHARAT CHHATTISGARH)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : January 10, 2026 at 5:28 PM IST

4 Min Read
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रायगढ़/दंतेवाड़ा. केंद्र की मोदी सरकार द्वारा मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) के नाम और ढांचे में किए गए बदलावों को लेकर कांग्रेस ने कड़ा विरोध दर्ज किया है. रायगढ़ और दंतेवाड़ा में आयोजित अलग-अलग प्रेस वार्ताओं में कांग्रेस नेताओं ने इसे गरीब, मजदूर और ग्रामीण विरोधी कदम बताया. इसे लेकर कांग्रेस 11 जनवरी से मनरेगा बचाओ संग्राम के नाम से आंदोलन करने जा रही है.

मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान का पूरा कार्यक्रम

  • 11 जनवरी: जिला मुख्यालयों में एक दिवसीय उपवास
  • 12–29 जनवरी: गांव-गांव चौपाल, मनरेगा और VB जी राम जी का अंतर समझाया जाएगा
  • 30 जनवरी: सभी वार्डों और शहरों में एक दिवसीय धरना
  • 31 जनवरी–6 फरवरी: मनरेगा बचाओ कार्यक्रम
  • 7–15 फरवरी: देशभर के सभी राज्यों में विधानसभा घेराव
  • 11–25 फरवरी: 3 से 4 स्थानों पर प्रदेश स्तरीय रैलियां
मनरेगा बचाओ संग्राम: रायगढ़ में कांग्रेस की प्रेस वार्ता (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

रायगढ़ में कांग्रेस की प्रेस वार्ता: जिला कांग्रेस कमेटी रायगढ़ ने प्रेस वार्ता आयोजित की. इसमें मनरेगा बचाओ संग्राम के रायगढ़ प्रभारी सुबोध हरितवाल, जिला कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष नगेंद्र नेगी और शहर कांग्रेस अध्यक्ष शाखा यादव मौजूद रहे. सुबोध हरितवाल ने कहा कि मनरेगा में बदलाव कर मोदी सरकार महात्मा गांधी की सोच को खत्म करने और गरीबों के अधिकार छीनने की कोशिश कर रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा को VBGRAM-G नाम देकर इसे एक शर्तों वाली और केंद्र द्वारा नियंत्रित योजना बना दिया गया है.

केंद्र–राज्य फंडिंग पर सवाल: कांग्रेस का कहना है कि पहले मनरेगा एक केंद्रीय कानून था, जिसमें 90% राशि केंद्र सरकार देती थी. अब इसे 60:40 (केंद्र–राज्य) कर दिया गया है, जिससे राज्यों पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा. कांग्रेस के अनुसार, इससे राज्यों पर करीब 50 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार आएगा और भविष्य में मनरेगा के बंद होने का खतरा बढ़ जाएगा.

राज्यों पर लगभग 50,000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ बढ़ जाएगा. बजट के बोझ के कारण धीरे-धीरे मनरेगा बंद होने का खतरा होगा- सुबोध हरितवाल, रायगढ़ प्रभारी, मनरेगा बचाओ संग्राम

राम नाम को लेकर भाजपा पर आरोप: कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह “राम” के नाम पर भ्रम फैला रही है. नेताओं ने कहा कि VBGRAM-G (Viksit Bharat Guarantee for Employment and Livelihood Mission-Gramin) में कहीं भी राम नाम का उल्लेख नहीं है. यह सिर्फ जनता को गुमराह करने की कोशिश है.

दंतेवाड़ा में भी मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

दंतेवाड़ा में भी कांग्रेस का विरोध: दंतेवाड़ा के राजीव भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीसीसी संयुक्त महामंत्री उमाशंकर शुक्ला ने कहा कि मनरेगा में बदलाव श्रमिक विरोधी है और यह गरीब मजदूरों के संवैधानिक अधिकारों पर हमला है. उन्होंने कहा कि पहले मनरेगा के तहत 100 दिन के काम की कानूनी गारंटी थी, जिसे अब कमजोर किया जा रहा है. नए फ्रेमवर्क में सरकार तय करेगी कि कब और कहां काम मिलेगा.

पहले हर परिवार को न्यूनतम 100 दिनों के काम की कानूनी गारंटी थी, जिसे अब खत्म किया जा रहा है. पहले पूरे साल काम मांगने, न्यूनतम मजदूरी पाने और अपने ही गांव में पंचायत के माध्यम से काम करने का अधिकार था. अब काम केवल सरकार की ओर से चुने गए गांवों में मिलेगा, फसल कटाई के समय रोजगार नहीं मिलेगा और मजदूरी सरकार अपनी मर्जी से तय करेगी जो गलत है.- पीसीसी संयुक्त महामंत्री छविंद्र कर्मा

मनरेगा के बंद होने का खतरा: मनरेगा बचाओ संग्राम के दंतेवाड़ा जिला समन्वयक पूर्णचंद कोको पाढ़ी ने बताया कि पहले मनरेगा केंद्रीय कानून था, जिसमें 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार देती थी. नए बदलावों के बाद केंद्र और राज्य का हिस्सा 60:40 हो जाएगा और पहले राज्य को 50 प्रतिशत मैचिंग ग्रांट जमा करनी होगी, तब ही केंद्र राशि जारी करेगा. राज्यों की कमजोर वित्तीय स्थिति को देखते हुए इससे भविष्य में मनरेगा के बंद होने का खतरा है.

कांग्रेस की प्रमुख मांगें

  • मनरेगा में किए गए सभी बदलाव तुरंत वापस लिए जाएं
  • काम और मजदूरी की कानूनी गारंटी बहाल की जाए
  • न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन तय की जाए
  • योजना को फिर से मजदूरों के हित में बनाया जाए

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