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मखाना खेती महिलाओं को दे रहा आत्मनिर्भरता की राह, जिला प्रशासन की मदद से डबरी से समृद्धि तक का सफर

धमतरी की ग्रामीण महिलाएं अब मखाना खेती के गुर सीख रही हैं. जिला प्रशासन महिलाओं के ट्रेनिंग के साथ उत्पादन की बारीकियां सीखा रहा है.

Makhana farming gives women path
मखाना खेती महिलाओं को दे रहा आत्मनिर्भरता की राह (ETV BHARAT CHHATTISGARH)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : December 31, 2025 at 1:13 PM IST

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Updated : December 31, 2025 at 1:35 PM IST

4 Min Read
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धमतरी :धमतरी जिला प्रशासन ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. जिला प्रशासन ने नगरी विकासखंड के सांकरा गांव की 40 महिलाओं को मखाना प्रोसेसिंग और आधुनिक खेती का प्रशिक्षण करवाया है.इस प्रोग्राम की सारी जिम्मेदारी जिला उद्यानिकी विभाग धमतरी ने की थी.इस प्रोग्राम के तहत सांकरा गांव की महिलाओं के दल को रायपुर जिले आरंग विकासखंड में भेजा गया. जहां के लिंगाडीह गांव में महिलाओं ने मखाना प्रोसेसिंग और उन्नत खेती का प्रशिक्षण प्राप्त किया.

ग्रामीण महिलाओं को उन्नत खेती के सिखा रहे गुर
आपको बता दें कि धमतरी कलेक्टर अबिनाश मिश्रा मखाना खेती को बढ़ावा देने और किसानों को प्रशिक्षण और तकनीकी जानकारी को लेकर रुचि ले रहे हैं.जिसके बाद अब जल्द ही धान से आगे की सोच से मखाना खेती धमतरी की ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक तस्वीर बदलेगी. छोटी-छोटी डबरी से मखाना खेती से समृद्धि हासिल करना अब महिलाओं का लक्ष्य बन चुका है. शासन का प्रयास है कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं नई तकनीकों के जरिए आत्मनिर्भर बन सके.

District administration provide training to women
जिला प्रशासन महिलाओं को दिलवा रहा ट्रेनिंग (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

90 एकड़ के क्षेत्र में मखाना खेती
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के सतत प्रयासों से धमतरी जिले के ग्राम राखी, पीपरछेड़ी, दंडेसरा, रांकाडोह एवं सांकरा में लगभग 90 एकड़ क्षेत्र में डबरी चिन्हांकन कर मखाना खेती की शुरुआत हो चुकी है. महिला किसानों ने स्थानीय ओजस फार्म का भ्रमण करते हुए मखाना की खेती, कटाई, प्रसंस्करण और विपणन से जुड़ी संपूर्ण श्रृंखला को नजदीक से समझा.

journey from Dabri to becoming self-reliant
डबरी से आत्मनिर्भर बनने का सफर (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

मखाना खेती के लिए जलभराव वाली डबरी उपयुक्त
फार्म प्रबंधक संजय नामदेव ने किसानों को बताया कि मखाना की खेती के लिए जलभराव वाली डबरी, तालाब या जल संरचनाएं उपयुक्त होती है. उन्होंने तकनीकी पहलुओं, बीज चयन, उत्पादन लागत और बाजार संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी दी . साथ ही ये भी बताया कि उचित प्रशिक्षण एवं सरकारी सहयोग से यह फसल किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती है.

tricks of Makhana farming
महिलाएं सीख रही मखाना खेती के गुर (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

यह फसल कम जोखिम वाली है और इससे स्थायी आय का मजबूत स्रोत विकसित किया जा सकता है. महिला किसानों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मखाना खेती से उन्हें आत्मनिर्भर बनने का नया अवसर दिखाई दे रहा है- शिव साहू, किसान

Makhana Farming Processing and Marketing Center
मखाना खेती प्रसंस्करण एवं विपणन केंद्र (ETV BHARAT CHHATTISGARH)


कम लागत में अधिक कमाई
बिहार के दरभंगा निवासी मखाना प्रोसेसिंग विशेषज्ञ रोहित साहनी फोड़ी ने प्रसंस्करण की बारीकियां समझाई. उन्होंने बताया कि 1 किलो मखाना बीज से लगभग 200 से 250 ग्राम पॉप तैयार होता है, जिसकी बाजार कीमत 700 से 1000 रुपये प्रति किलो तक होती है. रोहित साहनी ने बताया कि यदि किसान स्वयं उत्पादन के साथ प्रसंस्करण और पैकेजिंग करें, तो प्रति एकड़ लाभ में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है.

youth preparing makhana
मखाना तैयार करते युवा (ETV BHARAT CHHATTISGARH)


मखाना खेती किसानों के लिए सुरक्षित विकल्प
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रमुख वैज्ञानिक ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जानकारी देते हुए बताया कि प्रति एकड़ लगभग 20 किलो बीज की आवश्यकता होती है. औसत उत्पादन 10 क्विंटल तक प्राप्त किया जा सकता है. छह माह की अवधि वाली इस फसल में कीट-व्याधि का प्रकोप नगण्य होता है.चोरी जैसी समस्याएं भी नहीं होतीं, जिससे यह किसानों के लिए सुरक्षित विकल्प बनती है.

मखाना खेती के लिए सरकार दे रही ट्रेनिंग

धमतरी की उप संचालक उद्यानिकी डॉ.पूजा कश्यप साहू के मार्गदर्शन में ग्रामीण उद्यानिकी अधिकारी चंद्रप्रकाश साहू और बीटीएम पीताम्बर भुआर्य के साथ आए किसानों ने मखाना बोर्ड एवं राज्य शासन की योजनाओं की जानकारी हासिल की. डॉ.पूजा ने बताया कि मखाना की खेती को प्रोत्साहन देने के लिए प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और सब्सिडी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं.

आरंग में राज्य का पहला मखाना प्रसंस्करण केंद्र
आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ में सर्वप्रथम व्यावसायिक मखाना उत्पादन आरंग विकासखंड के ग्राम लिंगाडीह में स्वर्गीय कृष्ण कुमार चंद्राकर ने शुरु किया था. जहां राज्य का पहला मखाना प्रसंस्करण केंद्र भी स्थापित हुआ. आज मखाना उत्पादन छत्तीसगढ़ की नई कृषि पहचान बन रहा है. धमतरी की महिला किसानों का यह प्रयास न केवल कृषि नवाचार का उदाहरण है, बल्कि यह दर्शाता है कि सही मार्गदर्शन,प्रशिक्षण और प्रशासनिक संकल्प से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जा सकती है.



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Last Updated : December 31, 2025 at 1:35 PM IST