Mewar Makar Sankranti : ऑपरेशन सिंदूर थीम वाली पतंगों से आसमान में दिखेगी देशभक्ति की 'उड़ान'
व्यापारियों का कहना है कि पिछले साल के मुकाबले इस बार व्यापार 10 से 15 प्रतिशत अधिक हो सकता है.

Published : January 11, 2026 at 6:51 PM IST
|Updated : January 11, 2026 at 6:59 PM IST
उदयपुर: मकर संक्रांति पर्व के नजदीक आते-आते बाजार में रंग-बिरंगी पतंगें सजने लगी हैं. इस बार ऑपरेशन सिंदूर और अलग-अलग थीम पर पतंगें बाजार में आई हैं. मकर संक्रांति के आते ही मेवाड़ अंचल में परंपरा, उत्सव और उल्लास का संगम देखने को मिल रहा है.
लेकसिटी में इस बार ऑपरेशन सिंदूर थीम पर आधारित विशेष पतंगें लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं. इन पतंगों पर भारतीय सेना की महिला अधिकारियों के चित्र और प्रेरणादायक संदेश अंकित हैं. पतंग विक्रेता राजेश ने बताया कि मकर संक्रांति पर मेवाड़ में पारंपरिक खेलों का भी विशेष महत्व है. सितोलिया और मारदड़ी जैसे खेलों को लेकर बच्चों और युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है. वहीं छतों पर पतंग उड़ाने की तैयारी में परिवार एक साथ जुटे नजर आ रहे हैं. हालांकि मेवाड़ क्षेत्र में परंपरागत रूप से निर्जला एकादशी पर पतंग उड़ाने की परंपरा रही है, लेकिन बीते कुछ वर्षों में मकर संक्रांति पर पतंगबाजी का क्रेज तेजी से बढ़ा है.
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देहली गेट सहित शहर के प्रमुख बाजारों में रंग-बिरंगी पतंगों और धागों की दुकानों पर सुबह से देर रात तक भीड़ लगी हुई है. दुकानदारों के अनुसार बरेली का धागा सबसे ज्यादा पसंद किया जा रहा है. जबकि सादा धागे का गिट्टा भी खूब बिक रहा है. सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए चाइनीज मांझे की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है. पतंग विक्रेता यास्मीन खान ने बताया कि बच्चों के लिए कार्टून कैरेक्टर वाली पतंगें भी बाजार में छाई हुई हैं. डोरेमोन, मोटू-पतलू, स्पाइडर मैन और बाहुबली जैसी थीम वाली पतंगें खासतौर पर पसंद की जा रही हैं. कीमत की बात करें तो 50 रुपए से लेकर 400 रुपए तक की पतंगें उपलब्ध हैं. जिससे हर वर्ग के लोग अपनी पसंद की पतंग खरीद पा रहे हैं.

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उन्होंंने बताया कि पहले पतंगों की ज्यादा बिक्री गर्मियों में होती थी, लेकिन अब मकर संक्रांति पर भी अच्छी मांग रहती है. इस बार देशभक्ति और आत्मनिर्भर भारत की थीम वाली पतंगों को लोग काफी पसंद कर रहे हैं. बरेली का धागा सबसे ज्यादा बिक रहा है और चाइनीज मांझा हम बिल्कुल नहीं रखते. मकर संक्रांति पर मेवाड़ का आसमान इस बार सिर्फ रंगों से नहीं, बल्कि देशप्रेम और सकारात्मक संदेशों से भी जगमगाने को तैयार है. व्यापारियों के अनुसार बच्चों से लेकर युवाओं तक के लिए अलग-अलग डिजाइन और साइज की पतंगें उपलब्ध हैं, जिससे बिक्री में तेजी आई है.

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इस बार बाजार में डिजिटल प्रिंट पतंग, कार्टून व सुपरहीरो थीम वाली पतंग, धार्मिक चित्रों वाली पतंग, 3D डिजाइन पतंग, LED लाइट वाली नाइट काइट और इको-फ्रेंडली कागज व सूती धागे से बनी पतंगें खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं. इसके सूती और नायलॉन मांझा ज्यादा बिक रहा है. स्थानीय कारीगरों द्वारा हाथ से बनी रंगीन पतंगों की भी अच्छी मांग है, जो उदयपुर की पहचान मानी जाती हैं. इसमें पतंग, मांझा, चरखी, दस्ताने और अन्य सहायक सामग्री की बिक्री शामिल है. मकर संक्रांति के सप्ताह में ही लगभग 60 से 70 प्रतिशत व्यापार हो जाता है. शहर के घंटाघर, सूरजपोल, हाथीपोल और देहलीगेट क्षेत्र पतंग कारोबार के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं. व्यापारियों को उम्मीद है कि मौसम अनुकूल रहने और त्योहार की छुट्टियों के चलते इस बार पिछले साल के मुकाबले 10 से 15 प्रतिशत तक ज्यादा कारोबार हो सकता है.


