जानें कब है मकर संक्रांति? इन चीजों के दान का है खास महत्व, सूर्य देवता झटपट हो जाएंगे खुश
मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाएगी. इस दिन स्नान, दान, सूर्य उपासना और खिचड़ी, तिल-गुड़ दान का विशेष महत्व है.

Published : January 7, 2026 at 4:44 PM IST
|Updated : January 7, 2026 at 6:03 PM IST
कुरुक्षेत्र: भारत में त्योहारों का विशेष महत्व होता है, क्योंकि त्योहारों को प्रत्येक राज्य की अलग-अलग संस्कृति से जोड़कर देखा जाता है और सेलिब्रेट किया जाता है. बात अगर हिंदू वर्ष की करें तो इस समय पौष का महीना चल रहा है. इस महीने में दो प्रमुख त्यौहार आते हैं- लोहड़ी और मकर संक्रांति. मकर संक्रांति का त्योहार सनातन धर्म में विशेष महत्व रखता है. ये साल का पहला पर्व है. इसे देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है.
कब है मकर संक्रांति: कुरुक्षेत्र तीर्थ पुरोहित पंडित राधाराम शर्मा ने बताया कि, "मकर संक्रांति प्रत्येक वर्ष 14 जनवरी को मनाई जाती है. लोहड़ी के 1 दिन बाद इसको मनाया जाता है. इसका धार्मिक महत्व काफी अधिक है. इसको किसानों के एक बड़े त्यौहार के तौर पर भी मनाया जाता है, क्योंकि इस दिन किसान की फसल खेतों में लहराई हुई होती हैं. कुछ दिन बाद ही उसकी कटाई शुरू हो जाती है. ऐसे में किसान वर्ग के साथ ही सनातन धर्म के लोग इसको काफी धूमधाम से मनाते हैं."

दान और स्नान का शुभ मुहूर्त: पंडित ने बताया कि, "मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाएगी. इस दिन स्नान के बाद दान का खास महत्व होता है. इस दिन सूर्य देव मकर राशि में दोपहर बाद 3:13 में गोचर करेंगे. स्नान करने के लिए पुण्य काल 3:13 से ही शुरू हो जाएगा, जो 4:58 तक रहेगा. वहीं, पवित्र नदी में स्नान करने का शुभ मुहूर्त सुबह 9:03 से लेकर 10:48 तक रहेगा."
मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व: पंडित जी आगे ने बताया कि, "मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व बहुत ज्यादा होता है. इस दिन सूर्य देव मकर राशि में गोचर करते हैं, इसलिए इसको मकर संक्रांति कहा जाता है. यह दिन इसलिए भी खास होता है क्योंकि इस दिन भगवान सूर्य देव 6 महीने के लिए उत्तरायण होते हैं, जो अच्छे दिन माने जाते हैं. भगवान सूर्य देव साल के 12 महीना में से 6 महीने दक्षिणायन और 6 महीने उत्तरायण रहते हैं.मकर संक्रांति के दिन ही सूर्य देव उत्तरायण होते हैं. सूर्य देव की राशि परिवर्तन के साथ खरमास के भी समाप्ति होती है. यह दिन काफी शुभ होता है. इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने से कई जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है. कुरुक्षेत्र ब्रह्म सरोवर में स्नान करने उपरांत दान करने से 100 अश्वमेघ यज्ञ जैसा फल प्राप्त होता है."
अलग-अलग राज्यों में मनाई जाती है संक्रांति: मकर संक्रांति को अलग-अलग राज्य में अलग-अलग नाम से जाना जाता है. उत्तर भारत में इसको मकर संक्रांति और खिचड़ी पर्व के नाम से भी जाना जाता है. पोंगल और लोहड़ी के नाम से भी इसको अलग-अलग राज्यों में जाना जाता है. इस दिन विशेष तौर पर भगवान सूर्य देव की उपासना की जाती है, क्योंकि यह माना जाता है कि इस दिन भगवान सूर्य देव अपने पुत्र से मिलने के लिए मकर राशि में जाते हैं. यह ग्रामीण क्षेत्र का त्योहार माना जाता है, क्योंकि मकर संक्रांति को फसल कटाई के अवसर पर धूमधाम से मनाया जाता है. इस समय फसल की कटाई शुरू हो जाती है.
मकर संक्रांति पर खिचड़ी दान का विशेष महत्व: पंडित जी ने बताया कि, "मकर संक्रांति के दिन स्नान के बाद दान का विशेष महत्व होता है. खास तौर पर इस दिन खिचड़ी बनाई जाती है, जिसको दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है. किसी पवित्र नदी में स्नान करने के उपरांत अगर खिचड़ी का दान करें, तो यह सबसे पुण्य देने वाला माना जाता है. ऐसा शास्त्रों में बताया गया है कि खिचड़ी का दान करने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं. इससे घर में सुख-समृद्धि आती है. उनका आशीर्वाद परिवार पर बना रहता है. ऐसे में जरूरतमंदों को खिचड़ी का दान किया जाना चाहिए. इसके साथ ही मकर संक्रांति पर गुड़ और तिल का भी दान करना काफी अच्छा माना जाता है. कई लोग इस दिन गर्म कपड़े दान करते हैं. ऐसा करना शुभ माना जाता है."

