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14 जनवरी को मनाई जाएगी मकर संक्रांति, जानिए सूर्य के उत्तरायण होने का महत्व

मकर संक्रांति का पर्व आने वाला है. इस दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं और नए साल की शुरुआत होती है.

Makar Sankranti 2026
मकर संक्रांति का शुभकाल (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : January 10, 2026 at 7:12 PM IST

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रायपुर: 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा. भारत में मकर संक्रांति केवल एक त्यौहार नहीं है, बल्कि यह आस्था परंपरा और दान पुण्य का पावन संगम माना जाता है. मकर संक्रांति को नए सूर्य वर्ष की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. मकर संक्रांति के दिन से ही सूर्य उत्तरायण होते हैं. सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करते हैं तब यह मकर संक्रांति कहलाती है. मकर संक्रांति के दिन ही सूर्य शनि के घर जाते हैं. यानी पिता पुत्र के घर में जाते हैं तो उन्हें सम्मान मिलता है.

मकर संक्रांति का ज्योतिषीय महत्व जानिए

छत्तीसगढ़ के ज्योतिष एवं वास्तुविद पंडित प्रियाशरण त्रिपाठी ने बताया कि "सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करते हैं तब यह मकर संक्रांति कहलाती है. ऐसा माना जाता है कि पृथ्वी सूर्य के चक्कर लगा रही है. चक्कर लगाने के समय 12 राशियों से होकर यह गुजरती है. इसी से महीने और वर्ष का निर्धारण होता है. जब सूर्य मकर राशि में 14 जनवरी को प्रवेश करते हैं तो यह मकर संक्रांति कहलाती है.

पंडित प्रियाशरण त्रिपाठी (ETV BHARAT)

शनि सूर्य के पुत्र हैं. जब सूर्य शनि के घर यानी पिता पुत्र के घर जाते हैं तो बड़ा सम्मान मिलता है. यही से देव दान की शुरुआत होती है. मकर संक्रांति के दिन से ही उत्तरायण का सूर्य शुरू होता है. मकर संक्रांति के दिन ही भीष्म ने अपने देह का त्याग किया था. सूर्य के उत्तरायण की बड़ी महिमा है. नित्य नैमीतिक कर्म की शुरुआत होती है, जो 6 महीना तक चलता है- प्रियाशरण त्रिपाठी, ज्योतिष एवं वास्तुविद

मकर संक्रांति के दिन क्या करें ?

पंडित प्रियाशरण त्रिपाठी ने बताया कि मकर संक्रांति के दिन क्या करना चाहिए या क्या नहीं करना चाहिए इसको लेकर ज्योतिष ने बताया कि मकर संक्रांति तीव्र पुण्य काल कहलाता है. मकर संक्रांति के दिन सबसे पहला काम होता है गंगा का स्नान करना. अगर गंगा में स्नान नहीं कर पाए तो नदी का स्नान जरूर करें. मकर संक्रांति के दिन नदी का स्नान करने के बाद दान करना चाहिए. तिल, रुई, नमक, सोना, धान्य भूमि जैसी चीजों का दान करना चाहिए.

यह सब मनुष्य के ऊपर पितृ ऋण के रूप में रहते हैं. इस तरह की वस्तुओं का दान करने से सभी तरह की लौकिक और पारलौकिक पापों से मुक्ति मिलती है. इसके बाद भगवान शिव और शिव की उपासना करनी चाहिए. इसके बाद याचक और आचार्य को दान करना चाहिए. इस समय ठंड से बचने वाली चीजों का दान करना चाहिए. जिसमें कंबल, जूता और काष्ठ जैसी चीजें शामिल हैं- प्रियाशरण त्रिपाठी, ज्योतिष एवं वास्तुविद

साल 2026 में मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा. इस दिन का पुण्य काल दोपहर 03:13 बजे से आरंभ होगा. वहीं महापुण्य काल दोपहर 03:13 बजे से शाम 04:58 बजे तक रहेगा. शास्त्रों के अनुसार, इस अवधि में किया गया स्नान-दान और पूजा कई गुना पुण्य फल प्रदान करती है. माना जाता है कि इस शुभ काल में दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है. साधक के जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है.

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