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योगी सरकार का बड़ा फैसला: संस्कृत छात्रों के लिए डॉक्टर बनने की राह आसान, UP में खुलेंगे 5 आयुर्वेद गुरुकुलम्

साइंस के छात्र भी बन सकते हैं आयुर्वेद डॉक्टर, जानिए कैसे मिलेगा एडमिशन?

योगी सरकार का बड़ा फैसला
योगी सरकार का बड़ा फैसला (Photo Credit: ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : July 4, 2026 at 5:53 PM IST

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Updated : July 4, 2026 at 6:00 PM IST

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के संस्कृत विद्यार्थियों के लिए एक ऐतिहासिक और करियर बदलने वाली खबर है. अब राज्य में संस्कृत के विद्यार्थी 12 वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद सीधे आयुर्वेद के डॉक्टर बन सकेंगे. यानी छात्र 'बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (BAMS) में दाखिला ले सकेंगे.

यूपी में 'गुरुकुल' मॉडल की वापसी: संस्कृत और आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार ने बड़ी पहल की है. इस रणनीति को धरातल पर उतारने के लिए राज्य में पांच विशेष आयुर्वेदिक गुरुकुलों की शुरुआत होगी. 'नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन. (NCISM) और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने मिलकर एक ऐसा नया फ्रेमवर्क तैयार किया है, जो पारंपरिक वैदिक मूल्यों को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान से जोड़ेगा. ये सभी संस्कृत विश्वविद्यालय की देखरेख में होंगे.

यूपी में साइंस के छात्र भी बन सकते हैं आयुर्वेद डॉक्टर (Video Credit: ETV Bharat)

सरकार हमेशा से प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिकता के साथ जोड़कर प्रैक्टिकल बनाने का प्रयास करती रही है. इसी दिशा में सरकार संस्कृत के इंटरमीडिएट पास विद्यार्थियों को सीधे चिकित्सक बनने जा रही है. सरकार इस संबंध में उच्च स्तर पर काम कर रही है. जल्द ही कैबिनेट में यह फैसला लिया जाएगा.- दयाशंकर मिश्र दयालु, आयुष मंत्री, उत्तर प्रदेश

पढ़ाई की व्यवस्था कैसी होगी?: इस व्यवस्था के तहत जो संस्कृत से उच्चतर मध्यमा किए हुए विद्यार्थी हैं. उनको 1 साल के विशेष कोर्स के माध्यम से मुख्य रूप से विज्ञान पढ़ाया जाएगा. इसी तरह से विज्ञान वर्ग के जो छात्र और विद्यार्थी आयुर्वेदिक चिकित्सक बनना चाहते हैं. उन्हें एक साल संस्कृत का ज्ञान दिया जाएगा. फिर इन दोनों तरह के विद्यार्थियों को आयुर्वेद का ज्ञान 6 साल तक दिया जाएगा.

योगी सरकार का बड़ा फैसला
योगी सरकार का बड़ा फैसला (Photo Credit: ETV Bharat)


संस्कृत पाठ्यक्रम में विज्ञान ही विज्ञान है. निश्चित तौर पर सरकार की स्पेशलिस्ट संस्कृत का प्रचार प्रसार बढ़ेगा. यह व्यवस्था सीधे चिकित्सा विज्ञान और पेशे से जुड़ जाएगी. जिस तरह से सरकार फैसला कर रही है, यह बहुत अच्छा है.- सौरभ, संस्कृत विश्वविद्यालय से पीएचडी करने वाले छात्र

गुरुकुल का माहौल और विशेषताएं: प्रस्ताव में एक गुरुकुल में 100 बच्चों का दाखिला होगा. इसमें BAMS के जरिए आयुर्वेद की ट्रेनिंग दी जाएगी. हॉस्टल में रहकर ही छात्रों को पढ़ना होगा. इसमें पढ़ाई के साथ- साथ गुरु- शिष्य परंपरा की शिक्षा भी दी जाएगी. इसमें आयुर्वेद की पुरानी किताबें समझने के लिए संस्कृत मुख्य भाषा होगी, ताकि मूल ग्रंथ सीधे पढ़ सकें.

यूपी में 'गुरुकुल' मॉडल की वापसी
यूपी में 'गुरुकुल' मॉडल की वापसी (Photo Credit: ETV Bharat)

निश्चित तौर पर एक स्क्रीनिंग टेस्ट आयोजित होगा. जिसमें पास होने वाले विद्यार्थी ही आगे बढ़ सकेंगे. इसके बाद में 1 साल के स्पेसिफिक कोर्स के बाद 6 साल का चिकित्सा का कोर्स होगा. निश्चित तौर पर संस्कृत के विद्यार्थियों के लिए बहुत ही लाभकारी होगा.- गौरव मिश्र, छात्र


आयुर्वेद परंपरा में नाड़ी के आधार पर बीमारियों की जांच की जाती थी. अब आयुर्वेद के डॉक्टर ऐसा नहीं कर रहे थे. इसलिए सरकार ने यह फैसला किया है कि, संस्कृत पढ़ने वाले विद्यार्थियों को आयुर्वेद चिकित्सा का विशेषज्ञ बनाया जाए.

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Last Updated : July 4, 2026 at 6:00 PM IST