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2026 में नीतीश कुमार की सरकार और JDU की 10 बड़ी चुनौती?

नीतीश कुमार के लिए 2026 में चुनौतियां बढ़ेने वाली हैं. जानें एक करोड़ नौकरियों के वादों से लेकर जदयू में उत्तराधिकारी तय करने तक.

Nitish Kumar
नीतीश कुमार (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : January 2, 2026 at 2:59 PM IST

6 Min Read
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पटना: बिहार में 2025 का विधानसभा चुनाव एनडीए के लिए ऐतिहासिक जीत लेकर आया. नीतीश कुमार के नेतृत्व में गठबंधन ने 243 सीटों में से 202 सीटें जीतकर विपक्ष को करारी शिकस्त दी. नीतीश कुमार दसवीं बार मुख्यमंत्री बने, जो एक रिकॉर्ड है लेकिन नया साल 2026 उनके लिए आसान नहीं रहने वाला. चुनावी वादों को पूरा करने से लेकर पार्टी में उत्तराधिकारी तय करने तक कई बड़ी चुनौतियां सामने हैं.

2025 की सफलता के बाद अब वादों की परीक्षा: 2025 नीतीश कुमार और जदयू के लिए सुखद वर्ष रहा. कई लोगों ने सोचा था कि नीतीश की राजनीतिक पारी समाप्त हो जाएगी, लेकिन एनडीए की भारी जीत ने सभी अटकलों को गलत साबित कर दिया. जदयू ने 2010 के बाद अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया. हालांकि, अब 2026 में चुनावी संकल्पों को पूरा करने का दबाव बढ़ेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक संकट और स्वास्थ्य संबंधी चर्चाओं के बीच यह साल नीतीश के लिए 'सर्वाइवल' का महत्वपूर्ण वर्ष साबित होगा.

नीतीश सरकार और JDU की 10 बड़ी चुनौती (ETV Bharat)

आर्थिक संकट से निपटने की बड़ी चुनौती: चुनाव से पहले एनडीए ने बड़े वादे किए थे, जिनमें अगले पांच साल में एक करोड़ युवाओं को सरकारी नौकरी और रोजगार देने का संकल्प प्रमुख है. इसके अलावा मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता योजना और विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से सरकारी खजाना प्रभावित हुआ है. विशेषज्ञ सुनील पांडेय कहते हैं कि बिहार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है. राजस्व बढ़ाना और केंद्र से अधिक मदद लेना जरूरी होगा. निवेश आकर्षित कर उद्योग स्थापित करना भी बड़ी चुनौती है. केंद्र सरकार की प्राथमिकताएं अन्य राज्यों पर होने से नीतीश को खुद अधिक मेहनत करनी पड़ेगी.

Nitish Kumar
जदयू में उत्तराधिकारी तय करने की चुनौती (ETV Bharat)

"2025 नीतीश कुमार के लिए बहुत ही सुखद वर्ष रहा है. कहा जा रहा था कि नीतीश कुमार अब समाप्त हो जाएंगे, जदयू समाप्त हो जाएगी लेकिन इन सब परिस्थितियों से नीतीश कुमार बाहर निकल आए हैं. नया साल 2026 नीतीश कुमार के लिए आसान नहीं रहने वाला है. नीतीश कुमार ने एक करोड़ नौकरी रोजगार का जो वादा किया है और विकास की योजनाएं जो चलाई जा रही हैं, लोगों को जो आर्थिक मदद दी गई है, उन सब के कारण बिहार सरकार की आर्थिक स्थिति अब बहुत अच्छी नहीं है तो इस क्राइसिस से निकलने की पहली चुनौती होगी."-सुनील पांडेय, राजनीतिक विशेषज्ञ

Political Expert Sunil Pandey
सुनील पांडेय राजनीतिक विशेषज्ञ (ETV Bharat)

पार्टी में उत्तराधिकारी और सेकंड लाइन लीडरशिप: नीतीश कुमार के स्वास्थ्य को लेकर लंबे समय से चर्चाएं चल रही हैं. जदयू को मजबूत रखने और एनडीए में भाजपा के सामने मजबूत साझेदार बनाए रखने के लिए दूसरी पंक्ति के नेतृत्व को आगे लाना जरूरी है. बेटे निशांत कुमार के राजनीतिक भविष्य पर भी फैसला लेना पड़ सकता है. अर्थशास्त्री एनके चौधरी का कहना है कि नीतीश अब पहले जैसे नहीं हैं, लेकिन वे सक्रिय दिखने की कोशिश कर रहे हैं. यह साल पार्टी की भविष्य की तैयारी का होगा.

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नीतीश कुमार दसवीं बार मुख्यमंत्री बने (ETV Bharat)

"चुनाव से पहले जो वादा किया गया है और प्रधानमंत्री ने भी बिहार को विकसित बनाने की बात कही है, उस पर काम इसी साल होगा और यह भी तय है कि फिलहाल बिहार केंद्र के लिए प्राथमिकता में नहीं होने वाला है. अभी पश्चिम बंगाल और कई राज्यों में जहां चुनाव होने हैं वह केंद्र के लिए प्राथमिकता में होगा. काम नीतीश कुमार को ही करना होगा. नीतीश कुमार एक्टिव दिखाने की कोशिश जरूर कर रहे हैं लेकिन इस सच्चाई से कोई नहीं भाग सकता कि अब पहले वाले नीतीश कुमार नहीं हैं."- एनके चौधरी, अर्थशास्त्री

गृह विभाग छोड़ने के बाद भाजपा की बढ़ती ताकत: 2025 में सरकार बनने के बाद नीतीश कुमार को पहली बार गृह विभाग छोड़ना पड़ा. भाजपा की बढ़ती ताकत को संतुलित रखना आसान नहीं होगा. पहले दबाव में नीतीश पाला बदल लेते थे, लेकिन इस बार विपक्ष कमजोर है. इसलिए भाजपा के साथ मिलकर ही सरकार चलानी पड़ेगी. राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव भी इसी साल होने हैं, जहां गठबंधन की एकजुटता की परीक्षा होगी.

Former MP Chandeshwar Prasad Chandravanshi
चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी पूर्व सांसद (ETV Bharat)

नीतीश कुमार पर पार्टी नेताओं का भरोसा कायम: जदयू के वरिष्ठ नेता अभी भी नीतीश पर पूरा भरोसा जताते हैं. पूर्व सांसद चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी कहते हैं कि मुख्यमंत्री पार्टी को अच्छे से चला रहे हैं और कई सक्षम नेता हैं. कोई परेशानी नहीं आएगी. नीतीश जनता से किए वादों को व्यवस्थित तरीके से पूरा करेंगे.

"जहां तक पार्टी की बात है तो पार्टी को मुख्यमंत्री अभी ठीक ढंग से चला ही रहे हैं और पार्टी में कई नेता हैं, कहीं से कोई परेशानी होने वाली नहीं है. हम लोगों को पूरा भरोसा है नीतीश कुमार पर. नीतीश कुमार जो भी जनता से वादा किए हैं, सिस्टमैटिक ढंग से उसे पूरा करेंगे."-चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी, पूर्व सांसद

Challenges for Nitish Kumar
JDU की 10 बड़ी चुनौती (ETV Bharat)

नीतीश कुमार के सामने 2026 की प्रमुख चुनौतियां इस प्रकार हैं:

1. 2025 में किए गए 25 संकल्प के तहत एक करोड़ नौकरी और रोजगार देने की सबसे बड़ी चुनौती.
2. मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना और सामाजिक सुरक्षा पेंशन सहित कई स्कीम के कारण सरकार का खजाना खाली है. उसे भरने की बड़ी चुनौती होगी.
3. बिहार में निवेश को आकर्षित करने और उद्योग का जाल बिछाने की चुनौती है.
4. केंद्र सरकार के साथ बेहतर तालमेल और अधिक से अधिक आर्थिक मदद लेने की चुनौती है.
5. 2025 में जदयू ने शानदार प्रदर्शन किया है अब पार्टी को उत्तराधिकारी देने की चुनौती है.
6. बेटे निशांत कुमार के राजनीतिक भविष्य को लेकर फैसला लेने की चुनौती है.
7. राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव की भी चुनौती इसी साल है.
8. पार्टी के स्तर पर चुनाव नहीं होने के बावजूद पंचायत चुनाव में दमदार उपस्थिति दिखाने की भी चुनौती है.
9. पश्चिम बंगाल और असम चुनाव में पार्टी की मजबूत उपस्थिति हो इसकी भी चुनौती है.
10. एक करोड़ सदस्य के लक्ष्य को प्राप्त करने की बड़ी चुनौती है.

कैसी होगी आगे की राह: 2026 नीतीश कुमार के लिए सरकार और पार्टी दोनों स्तर पर परीक्षा का साल होगा. वादों को पूरा करने के साथ पार्टी को एकजुट और भविष्य के लिए तैयार रखना बड़ी चुनौती है. देखना यह है कि नीतीश कुमार इन चुनौतियों से कितनी सफलता से निपट पाते हैं.

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