KGMU दवा घोटाले पर बड़ी कार्रवाई, HOD हटाए, 3 कर्मचारी बर्खास्त
KGMU दवा घोटाले में जांच में अनियमितता साबित होने के बाद विभागाध्यक्ष डॉ. अपुल गोयल को उनके पद से हटा दिया गया है.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : June 3, 2026 at 9:48 AM IST
लखनऊ: KGMU के यूरोलॉजी विभाग में हुए करोड़ों रुपये के दवा घोटाले पर अब प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं. जांच में अनियमितता साबित होने के बाद विभागाध्यक्ष डॉ. अपुल गोयल को उनके पद से हटा दिया गया है. वहीं, घोटाले में शामिल तीन आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है.
KGMU के यूरोलॉजी विभाग में 'असाध्य योजना' के तहत गरीब मरीजों के लिए हर महीने करीब 10 लाख रुपये की दवाएं खरीदी जाती थीं. ये दवाएं कैंसर, प्रोटीन और आयरन जैसी महंगी दवाएं होती हैं, जो पंजीकृत मरीजों को मुफ्त दी जाती हैं.
लेकिन इस साल की शुरुआत में अचानक दवा का बजट 3 से 4 गुना बढ़ गया. पिछले महीने 45 लाख रुपये की दवा खरीदी गई. शक होने पर जब अधिकारियों ने मरीजों के दस्तावेज खंगाले, तो करीब 40 मरीज ऐसे मिले, जिन्हें कागजों पर बार-बार भर्ती दिखाया गया था. इन मरीजों के नाम पर महंगी दवाएं मंगाई गईं, लेकिन वे मरीजों तक पहुंची ही नहीं.
घटना की जानकारी मिलते ही कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने पांच सदस्यीय जांच कमेटी बनाई. कमेटी की रिपोर्ट के बाद तुरंत कार्रवाई हुई.
डॉ. अपुल गोयल, विभागाध्यक्ष: योजना की निगरानी और प्रशासनिक काम में लापरवाही के कारण पद से हटाए गए. जांच पूरी होने तक उन्हें अलग रखा गया है. उनकी जगह जनरल सर्जरी विभाग के डॉ. एचएस पहवा को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया है.
तीन आउटसोर्सिंग कर्मचारी पी. सिंह, एच. श्रीवास्तव और एस. तिवारी को तत्काल बर्खास्त किया गया. एक नियमित फार्मासिस्ट लोकल परचेज काउंटर पर तैनात अरशद वासी को निलंबित किया गया.
KGMU प्रशासन ने घोटाले में शामिल आउटसोर्सिंग एजेंसी से पूरी रकम वसूलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
साथ ही, तीनों बर्खास्त कर्मचारियों और निलंबित फार्मासिस्ट के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए पुलिस को तहरीर भी दी गई है.
KGMU के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने कहा कि जांच निष्पक्ष हो, इसलिए विभागाध्यक्ष को पद से अलग किया गया है.भ्रष्टाचार में लिप्त किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा.

