मैहर में रिटायर्ड PHE अधिकारी डिजिटल अरेस्ट, 22 लाख की साइबर ठगी का शिकार
मैहर में रिटायर्ड PHE अधिकारी हुए डिजिटल अरेस्ट, PHE के रिटायर्ड अधिकारी को 13 दिन तक डराकर बनाया शिकार.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : June 2, 2026 at 7:40 PM IST
मैहर: अमरपाटन थाना क्षेत्र में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां 'डिजिटल अरेस्ट' का भय दिखाकर साइबर अपराधियों ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के एक सेवानिवृत्त अधिकारी से 22 लाख रुपये की ठगी कर ली. आरोपियों ने खुद को केंद्रीय जांच एजेंसियों से जुड़ा बताते हुए पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसाने की धमकी दी और करीब 13 दिनों तक मानसिक दबाव बनाकर उनसे लाखों रुपए अपने खाते में ट्रांसफर करा लिए. मामले की शिकायत के बाद पुलिस ने एक महिला समेत तीन आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
एक फोन कॉल से शुरू हुआ ठगी का खेल
मामले पर मैहर पुलिस अधीक्षक अवधेश प्रताप सिंह ने बताया कि "अमरपाटन थाना क्षेत्र के ग्राम इटमा कोठार निवासी मानेंद्र सिंह राठौर, जो PHE विभाग से सेवानिवृत्त हैं, ने थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है. शिकायत में उन्होंने बताया कि 5 मई 2026 को उनके मोबाइल नंबर पर एक अज्ञात महिला का फोन आया. महिला ने खुद को दिल्ली से बताया और कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसी के पास उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला कारोबार से संबंधित गंभीर मामला दर्ज है.
महिला ने दावा किया कि इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. अब जांच की जद में उनका नाम भी शामिल है. अचानक आए इस फोन कॉल और कानूनी कार्रवाई की धमकी से पीड़ित घबरा गए. इसी घबराहट का फायदा उठाकर साइबर अपराधियों ने उन्हें अपने जाल में फंसा लिया."
वीडियो कॉल और फर्जी जांच के नाम पर बनाया दबाव
शिकायतकर्ता मानवेंद्र सिंह के अनुसार "आरोपियों ने केवल फोन कॉल तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि लगातार वीडियो कॉल, ऑडियो कॉल और मैसेज के जरिए पीड़ित से संपर्क बनाए रखा. उन्हें यह विश्वास दिलाया गया कि उनके खिलाफ जांच चल रही है और जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक उन्हें एजेंसी के निर्देशों का पालन करना होगा. आरोपियों ने कथित तौर पर पीड़ित को 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी स्थिति में रखा. इस दौरान उन्हें डराया गया कि यदि उन्होंने सहयोग नहीं किया तो उनकी गिरफ्तारी हो सकती है और उनकी संपत्तियां जब्त की जा सकती है."
बैंक खाते, खेती और एफडी की जानकारी जुटाई
लगातार मानसिक दबाव के बीच आरोपियों ने पीड़ित से उनकी आर्थिक स्थिति से जुड़ी पूरी जानकारी हासिल कर ली. उनसे बैंक खातों, फिक्स्ड डिपॉजिट, कृषि भूमि और अन्य निवेशों की जानकारी मांगी गई. पीड़ित को यह विश्वास दिलाया गया कि जांच प्रक्रिया के लिए उनकी वित्तीय जानकारी आवश्यक है. धीरे-धीरे ठगों ने उनकी पूरी आर्थिक स्थिति को समझ लिया और फिर ठगी की बड़ी साजिश को अंजाम दिया.

पत्नी के साथ मिलकर तुड़वाई गईं चार एफडी
आरोपियों ने पीड़ित पर दबाव बनाते हुए कहा कि जांच प्रक्रिया पूरी करने और खुद को निर्दोष साबित करने के लिए उन्हें अपनी जमा पूंजी एक सुरक्षित खाते में जमा करनी होगी. इसके बाद पीड़ित और उनकी पत्नी के नाम पर मौजूद चार फिक्स्ड डिपॉजिट को तुड़वा दिया गया. एफडी से प्राप्त पूरी राशि को एक बैंक खाते में जमा कराया गया और बाद में 19 मई को आरटीजीएस (RTGS) के माध्यम से कुल 22 लाख रुपये आरोपियों द्वारा बताए गए खाते में ट्रांसफर करा लिए गए.
22 लाख लेने के बाद भी मांगे 8 लाख रुपये
हैरानी की बात यह रही कि 22 लाख रुपये प्राप्त करने के बाद भी आरोपियों ने पीड़ित का पीछा नहीं छोड़ा. 23 मई तक लगातार बातचीत करते हुए उन्होंने अतिरिक्त 8 लाख रुपये की मांग की जब बार-बार पैसों की मांग की जाने लगी और कथित जांच प्रक्रिया को लेकर कई बातें संदिग्ध लगने लगीं, तब पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ. इसके बाद उन्होंने तत्काल पुलिस से संपर्क कर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई.
पुलिस ने दर्ज किया मामला, साइबर सेल जांच में जुटी
मामले की गंभीरता को देखते हुए अमरपाटन पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की. वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में मामला लाने के बाद शिकायत और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर एक महिला व दो पुरुष आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया है. पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 319(2), 308(2), 61(2) एवं सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66D के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया है. मामले की जांच साइबर सेल की सहायता से की जा रही है और आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास जारी है.
क्या है 'डिजिटल अरेस्ट'?
पिछले कुछ समय से देशभर में 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर साइबर ठगी के मामले तेजी से सामने आए हैं. इसमें अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, कस्टम विभाग या अन्य केंद्रीय एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं. उन्हें बताया जाता है कि उनका नाम किसी अपराध में आया है और जांच पूरी होने तक वे किसी से बात नहीं कर सकते. इसके बाद वीडियो कॉल और फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से लोगों को मानसिक रूप से भयभीत कर उनकी बैंकिंग जानकारी हासिल की जाती है और उनसे रकम ट्रांसफर करवाई जाती है.
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पुलिस की अपील : सतर्क रहें, किसी के झांसे में न आएं
अमरपाटन पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के फोन, वीडियो कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें. कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं करती और न ही बैंक खाते या एफडी की जानकारी मांगती है. पुलिस ने लोगों से कहा है कि यदि कोई व्यक्ति खुद को किसी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर पैसे मांगता है या बैंकिंग जानकारी साझा करने का दबाव बनाता है तो तुरंत कॉल काट दें और इसकी सूचना साइबर हेल्पलाइन 1930 अथवा नजदीकी पुलिस थाने में दें.
पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधियों से बचाव का सबसे बड़ा हथियार जागरूकता और सतर्कता है. एक छोटी सी लापरवाही या एक गलत क्लिक जीवनभर की कमाई को पलभर में खत्म कर सकता है.

