मैहर में मोबाइल रहते दूसरे गांव कॉल करने जाते ग्रामीण, पड़ोसी देते हैं नेटवर्क
डिजिटल युग में भी नेटवर्क से दूर है मैहर का मनौरा गांव, मोबाइल सिग्नल के लिए भटकने को मजबूर ग्रामीण, बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : June 22, 2026 at 3:27 PM IST
मैहर: आज का युग डिजिटल का युग कहा जाता है, जिसकी क्रांति से पूरे विश्व को पास ला दिया है. हम सब जानते हैं, कि इंटरनेट कनेक्टिविटी ने लोगों के बीच की दूरियों को कम किया है. आज के समय में लोग एक बार बिना खाय रह सकते हैं, बिना फोन और इंटरनेट के नहीं, लेकिन आपको सुनकर थोड़ी हैरानी होगी, कि जहां बड़े-बड़े शहरों से लेकर गांव-गांव तक लोग इंटरनेट को जोर-शोर से इस्तेमाल कर रहा है, ऐसे में मध्य प्रदेश का एक गांव ऐसा है, जहां मोबाइल नेटवर्क की पहुंच नहीं हो पाई है.
मनौरा गांव में नहीं मिलता मोबाइल नेटवर्क
केंद्र और राज्य सरकारें गांव-गांव तक डिजिटल सेवाएं पहुंचाने की बात कर रही हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के मैहर का मनौरा गांव आज भी मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए संघर्ष कर रहा है. स्थिति यह है कि गांव के लोगों को मोबाइल पर बात करने, इंटरनेट चलाने और ऑनलाइन सेवाओं का लाभ लेने के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है. मनौरा गांव के ग्रामीणों का कहना है कि गांव में मोबाइल नेटवर्क की समस्या वर्षों से बनी हुई है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो सका है.
गांव के अधिकांश क्षेत्रों में मोबाइल सिग्नल नहीं आते, जिससे लोगों का बाहरी दुनिया से संपर्क प्रभावित होता है. कई बार ग्रामीणों को फोन करने या जरूरी कॉल रिसीव करने के लिए ऊंची पहाड़ियों, खेतों या गांव से बाहर ऐसे स्थानों पर जाना पड़ता है. जहां किसी कंपनी का नेटवर्क मिल सके.
आपातकालीन परिस्थितियों में बढ़ जाती है परेशानी
ग्रामीणों के अनुसार नेटवर्क की कमी सबसे बड़ी समस्या तब बन जाती है, जब किसी को तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत होती है. किसी मरीज की तबीयत बिगड़ने, दुर्घटना होने या अन्य आपातकालीन स्थिति में समय पर एम्बुलेंस या संबंधित अधिकारियों से संपर्क नहीं हो पाता. कई बार लोगों को नेटवर्क की तलाश में गांव से बाहर जाना पड़ता है, जिससे महत्वपूर्ण समय बर्बाद होता है.

छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा असर
डिजिटल शिक्षा के दौर में नेटवर्क की अनुपलब्धता गांव के विद्यार्थियों के लिए भी बड़ी चुनौती बन गई है. ऑनलाइन कक्षाएं, अध्ययन सामग्री, प्रतियोगी परीक्षाओं के फॉर्म और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां इंटरनेट पर निर्भर हैं, लेकिन कमजोर या अनुपस्थित नेटवर्क के कारण छात्रों को पढ़ाई में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. कई विद्यार्थियों को इंटरनेट उपयोग के लिए दूसरे गांवों या कस्बों का सहारा लेना पड़ता है.
किसानों और मजदूरों को भी हो रही दिक्कत
मनौरा गांव के किसान भी नेटवर्क समस्या से प्रभावित हैं. मौसम की जानकारी, कृषि योजनाओं की जानकारी, ऑनलाइन पंजीयन और मंडी के ताजा भाव जैसी महत्वपूर्ण सूचनाएं समय पर नहीं मिल पाती. वहीं मजदूर वर्ग और छोटे व्यापारी भी डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन लेन-देन की सुविधाओं का पूरा लाभ नहीं उठा पा रहे हैं. इससे उनकी आर्थिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं.

सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में आ रही बाधा
आज अधिकांश शासकीय सेवाएं ऑनलाइन माध्यम से संचालित हो रही हैं. आयुष्मान कार्ड, समग्र आईडी, पेंशन, छात्रवृत्ति, राशन और अन्य योजनाओं से जुड़ी प्रक्रियाएं इंटरनेट आधारित हो चुकी हैं. ऐसे में नेटवर्क की कमी ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त परेशानी खड़ी कर रही है. कई बार छोटे-छोटे कार्यों के लिए लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है.
मोबाइल टावर लगाने की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन और दूरसंचार विभाग से गांव में मोबाइल टावर स्थापित करने की मांग की है. उनका कहना है कि जब आसपास के क्षेत्रों में नेटवर्क सुविधा उपलब्ध है, तो मनौरा गांव को इससे वंचित नहीं रखा जाना चाहिए. ग्रामीणों का मानना है कि एक मोबाइल टावर की स्थापना से हजारों लोगों की समस्या का समाधान हो सकता है. गांव भी डिजिटल युग की मुख्यधारा से जुड़ सकेगा. ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि संबंधित विभाग उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द आवश्यक कदम उठाएंगे, ताकि मनौरा गांव के लोगों को भी बेहतर संचार और इंटरनेट सुविधाएं उपलब्ध हो सके.

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इस मामले पर ग्रामीण राहुल कुमार दहिया ने बताया कि "आजादी के बाद भी आज तक हमारे गांव में नेटवर्क की सुविधा उपलब्ध नहीं है. नेटवर्क के लिए दूर दराज के क्षेत्र पर जाना पड़ता है. जिससे की बात हो पाती है, कई बार नेटवर्क की समस्या को लेकर टेलीकॉम कंपनियों को शिकायत भी की गई है, लेकिन इसके बावजूद भी आज तक किसी प्रकार का कोई नेटवर्क इस गांव तक नहीं पहुंच पाया है, जिससे हम परेशान हो रहे हैं."

