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महतारी वंदन योजना में फर्जीवाड़ा, महिला बनकर युवक ने लिए पैसे, डेढ़ साल बाद खुला राज

महतारी वंदन योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है.इस मामले में पुरुष अभ्यर्थी को योजना का लाभ दे दिया गया है.

MAHTARI VANDAN YOJANA FRAUD
महतारी वंदन योजना में फर्जीवाड़ा (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : July 8, 2026 at 4:16 PM IST

2 Min Read
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खैरागढ़ : महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए शुरू की गई महतारी वंदन योजना में ऐसा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने पूरे सत्यापन तंत्र की पोल खोल दी है.खैरागढ़ में एक पुरुष ने महिला बनकर आवेदन किया, खुद को ही अपना पति बताया और हैरानी की बात यह है कि आंगनबाड़ी से लेकर सुपरवाइजर तक ने आवेदन को सही मानकर सत्यापित भी कर दिया. नतीजा 10 महीने तक सरकारी राशि खाते में पहुंचती रही और विभाग को इसकी भनक डेढ़ साल बाद लगी.
खैरागढ़ की महतारी वंदन योजना में सामने आया यह मामला सरकारी सत्यापन व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

क्या है मामला ?
ग्राम मुढ़ीपार निवासी तिलोक साहू ने महतारी वंदन योजना में आवेदन किया. आवेदन में हितग्राही का नाम भी तिलोक साहू और पति का नाम भी तिलोक साहू ही दर्ज था. इसके बाद आवेदन पहले आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और फिर सुपरवाइजर स्तर पर सत्यापित हो गया. इतना ही नहीं, अपात्र होने के बावजूद उसके खाते में लगातार 10 महीने तक योजना की राशि जमा होती रही.

Young man posed woman and take money
महतारी बनकर युवक ने लिए पैसे (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

विभाग ने की रिकवरी

मामला सामने आने के बाद आवेदन को परमानेंट होल्ड कर दिया गया और विभाग ने लाभार्थी से 10 हजार रुपए की रिकवरी भी करा ली. लेकिन ऑनलाइन रिकॉर्ड और विभागीय कार्रवाई के बीच भी कई सवाल बने हुए हैं.

महतारी बनकर युवक ने लिए पैसे (Etv Bharat)

मार्च 2024 से दिसंबर 2024 तक भुगतान हुआ था. जनवरी 2025 से भुगतान बंद है. 10 हजार रुपए की राशि हितग्राही से वापस वसूल कर ली गई है. अब पूरे मामले की जांच कराई जा रही है. जो भी जिम्मेदार होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा- पीआर खूंटे, जिला कार्यक्रम अधिकारी खैरागढ़

किनकी गलती से पास हुआ आवेदन ?
हालांकि रिकवरी तो हो गई, लेकिन असली सवाल अभी भी कायम है.आखिर डेढ़ साल तक विभाग को यह फर्जीवाड़ा क्यों नहीं दिखा? यदि मामला सामने नहीं आता तो क्या सरकारी पैसा आगे भी निकलता रहता. अब जांच के बाद यह तय होगा कि केवल हितग्राही ही जिम्मेदार था या फिर सत्यापन करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही भी इस पूरे खेल की वजह बनी.

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