गढ़फुलझर के नानकसागर में भव्य होला मोहल्ला कार्यक्रम,अमृतसर की तर्ज पर बनेगा गुरुधाम, CM साय हुए शामिल
बसना के गढ़फुलझर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए 2.50 करोड़ की स्वीकृति भी CM साय ने दी है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : March 15, 2026 at 7:57 PM IST
महासमुंद: जिले के बसना क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक और पवित्र स्थल गढ़फुलझर के नानकसागर में आयोजित भव्य होला मोहल्ला कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शामिल हुए. मुख्यमंत्री ने पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष माथा टेककर आशीर्वाद लिया और विशेष कीर्तन समागम और अरदास में भाग लेकर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की. इस दौरान सिख समाज की ओर से मुख्यमंत्री को सरोपा भेंट कर सम्मानित किया गया.
पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा गढ़फुलझर
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि गढ़फुलझर की पावन भूमि पर स्थित नानकसागर अत्यंत पवित्र स्थान है, जहां सिखों के प्रथम गुरु गुरु नानक देव जी के चरण पड़े थे. मुख्यमंत्री ने बताया कि गढ़फुलझर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा पहले ही की जा चुकी है. इसके लिए करीब 2.50 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है और विकास कार्य जारी है. उन्होंने अधिकारियों को जल्द काम पूरा करने के निर्देश भी दिए.
छत्तीसगढ़ संतों की तपोभूमि रही है और यहां आकर गर्व और आनंद की अनुभूति हो रही है. ये स्थान धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित होगा- विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री

अमृतसर की तर्ज पर बनेगा भव्य गुरुद्वारा
बसना विधायक संपत अग्रवाल ने कहा कि सिख समाज हमेशा संगठित होकर सभी को साथ लेकर चलने वाला समाज रहा है. उन्होंने बताया कि गढ़फुलझर में गोल्डन टेंपल की तर्ज पर एक भव्य गुरुद्वारा बनाया जाएगा, जिससे क्षेत्र की धार्मिक आस्था और पर्यटन को नई पहचान मिलेगी.
गुरु नानक देव जी के ऐतिहासिक आगमन की जानकारी
रिंकू सिंह ओबेरॉय ने बताया कि करीब पांच साल पहले यह तथ्य सामने आया कि लगभग 520 वर्ष पहले गुरु नानक देव जी इस पवित्र स्थल पर पधारे थे. उन्होंने गुरु नानक देव जी के ऐतिहासिक आगमन और उनके उपदेशों के महत्व पर प्रकाश डाला.

1506 में गुरु नानक देव जी यहां ठहरे थे
बताया जाता है कि वर्ष 1506 में अपनी पहली उदासी (विश्व भ्रमण) के दौरान गुरु नानक देव जी अमरकंटक और शिवरीनारायण के रास्ते जगन्नाथ मंदिर जाते समय गढ़फुलझर में दो दिन तक रुके थे. उनके उपदेशों से प्रभावित होकर तत्कालीन आदिवासी राजा मानस राज सागर चंद भेना ने करीब 5 एकड़ जमीन गुरु महाराज के नाम समर्पित की थी, जिसे आज भी “गुरुखाप” के नाम से जाना जाता है.

भविष्य में बनेगा बड़ा धार्मिक और पर्यटन केंद्र
गढ़फुलझर न केवल सिख समाज की आस्था का केंद्र है, बल्कि सर्वधर्म समभाव की मिसाल भी है. यहां अभेद किले, प्राचीन सुरंगों, रानी महल के अवशेष, रनेश्वर रामचंडी मंदिर और बूढ़ादेव मंदिर जैसे कई ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल मौजूद हैं. भविष्य में यहां भव्य गुरुधाम बनने के बाद यह क्षेत्र एक बड़े धार्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगा और लोगों को गुरु नानक देव जी के शांति, सेवा और भाईचारे के संदेश से प्रेरणा मिलेगी.

कई जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु रहे मौजूद
कार्यक्रम में कृषि मंत्री रामविचार नेताम, बसना विधायक संपत अग्रवाल, डॉ. भगवान सिंह खोजी, ज्ञानी हरदीप सिंह, दविंदर सिंह, कमलजीत सिंह, नितिनदीप सिंह, कंवलप्रीत सिंह, अमृतपाल सिंह, देवेंद्र सिंह आनंद और रोमी सलूजा सहित बड़ी संख्या में सिख समाज के श्रद्धालु मौजूद रहे. इसके अलावा छत्तीसगढ़ राज्य बीज निगम के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर, येतराम साहू, अखिलेश सोनी, भूपेंद्र सिंह सवन्नी, इंद्रजीत सिंह गोल्डी, अमरजीत छाबड़ा, सरपंच हरप्रीत कौर, गिरधारी साहू और चतुर्भुज आर्य सहित कई गणमान्य नागरिक भी कार्यक्रम में शामिल हुए.

