सिंहस्थ से पहले उज्जैन में होंगे एकलिंगनाथ भगवान के दर्शन, मेवाड़ राजवंश से है कनेक्शन
महाराणा प्रताप की 77वीं पीढ़ी के युवराज लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ उज्जैन में बनवाएंगे 7 करोड़ का मंदिर,अयोध्या राम मंदिर के डिजाइन पर बनेगा एकलिंगनाथ मंदिर.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 27, 2026 at 8:23 PM IST
|Updated : February 27, 2026 at 9:37 PM IST
रिपोर्ट - राहुल सिंह राठौड़
उज्जैन: महाराणा प्रताप की 77वीं पीढ़ी के युवराज डॉ लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ गुरुवार को मध्य प्रदेश के उज्जैन पहुंचे. जहां सबसे पहले तो उन्होंने बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद लिया. इसके बाद युवराज डॉ. लक्ष्यराज सिंह नलवा गांव पहुंचे, जहां वे भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल हुए. यह भूमि पूजन नलवा गांव में बन रहे एकलिंगनाथ महादेव मंदिर का था. खास बात यह है कि यह मंदिर युवराज लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ बनवा रहे हैं.
युवराज लक्ष्यराज सिंह कराएंगे मंदिर की स्थापना
लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ उदयपुर के राजघराने से ताल्लुक रखते हैं और वे महाराणा प्रताप की 77वीं पीढ़ी के युवराज हैं. युवराज लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ उज्जैन के गांव नलवा में मंदिर की स्थापना करा रहे हैं. यह मंदिर 7 करोड़ में बनकर तैयार होगा. लक्ष्यराज सिंह ने घोषणा की है कि सिंहस्थ 2028 से पहले मंदिर में एकलिंगनाथ जी महादेव की प्राण प्रतिष्ठा कर दी जाएगी. सिंहस्थ 2028 में आने वाले दर्शनार्थी अब मेवाड़ के अलावा मालवा की भूमि पर भी भगवान एकलिंगनाथ (महादेव) के दर्शन लाभ ले सकेंगे. मंदिर अत्याधुनिक होगा. जिसमें गौशाला, गुरुकुल, बगिया यानि गार्डन व खास मूलभूत सुविधाएं दर्शनार्थियों के लिए होगी.

2028 में अक्षय तृतीया के दिन होगी प्राण प्रतिष्ठा
वरिष्ठ समाजसेवी राजपाल सिंह सिसौदिया ने ETV भारत से चर्चा में बताया "महाराणा मेवाड़ के आराध्य हैं और महाराणा प्रताप के आराध्य भगवान एकलिंगनाथ जी हैं. एकलिंगनाथ का मूल स्थान अरावली पर्वत उदयपुर के नजदीक कैलाश पूरी में है. भगवान एकलिंगनाथ मेवाड़ से मालवा की भूमि पर पधार रहे हैं. ये पहल डॉ लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ की अगुवाई में हुई है. उन्होंने कहा मैं मेवाड़ त्रिवेदी समाज संगठन का धन्यवाद देता हूं, जिन्होंने लक्ष्यराज सिंह की अगुवाई में यह बीड़ा उठाया है.

युवराज डॉ लक्ष्यराज सिंह ने मंदिर का भूमिपूजन किया. मंदिर के भूमिपूजन के साथ युवराज लक्ष्यराज ने घोषणा की है कि प्राणप्रतिष्ठा साल 2028 की अक्षय तृतीया के दिन करेंगे. मेवाड़ का राज परिवार एकलिंगनाथ महादेव मंदिर के निर्माण में भूमि पूजन से लेकर प्राण प्रतिष्ठा तक साथ है.
अयोध्या राम मंदिर की डिजाइन पर तैयार होगा मंदिर
मंदिर के डिजाइन को लेकर मेवाड़ा त्रिवेदी समाज संगठन के सचिव राजेश शर्मा ने बताया "यह अयोध्या मंदिर की तर्ज पर बनाया जाएगा. अयोध्या राम मंदिर का डिजाइन बनाने वाले अहमदाबाद के सोमपुरा परिवार ने ही एकलिंगनाथ जी मंदिर का भी डिजाइन बनाया है. इसके साथ ही अयोध्या में राम मंदिर बनाने वाले कारीगर ही यहां मंदिर का निर्माण करेंगे. जिससे मंदिर की नींव कम से कम हजार वर्ष तक टिकी रहे. मंदिर बनने के बाद मेवाड़ और मालवा का खूबसूरत संगम अवंतिका नगरी उज्जैनी में देखने को मिलेगा."

कौन है एकलिंग नाथ और कैसा होगा शिवलिंग
राजपाल सिंह सिसौदिया ने बताया "भगवान एकलिंगनाथ जी तो स्वयंभू हैं. जिनकी वजह से पूरा मेवाड़ अक्षुण रहा. कभी पराजित नहीं हुआ. एकलिंगनाथ जी यानि भगवान महादेव जब मालवा की भूमि पर पधारेंगे, तो सिंहस्थ में अलग ही आनंद होगा. एकलिंगनाथ जी के बारे में अगर बात करें तो एकलिंगनाथ जी पूर्व की और से सूर्यमुखी, पश्चिम की और से ब्रह्मा, उत्तर से विष्णु और दक्षिण से शिव हैं. जिन्हें स्वम्भू महादेव भी कहते हैं. मंदिर में स्थापित होने वाला शिवलिंग काले पत्थर का होगा."

क्या होगी मंदिर की खासियत?
मेवाड़ त्रिवेदी समाज संगठन (श्री त्रिवेदी मेवाड़ा ब्राह्मण विकास परिषद मप्र) के अध्यक्ष सुनील जोशी ने बताया "मंदिर की लागत 7 करोड़ रुपए है, जो नलवा गांव में लगभग 20 हजार वर्गफीट में बनने जा रहा है. पहले चरण में मंदिर और गौशाला निर्माण होगा. दूसरे चरण में गुरुकुल और बगिया (गार्डन) का निर्माण. मंदिर में दर्शन धार्मिक गतिविधियों के साथ सेवा का भी आनंद दर्शनार्थी उठा सकेंगे. मंदिर पूरा संगमरमर के सफेद पत्थरों से बनेगा.
जबकि गर्भ गृह 13.7X13.7 फीट का होगा, जिसका 7 फुट का द्वार यानि गेट होगा. 29X29 फीट का सभामंडप बनेगा. मंदिर को शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित करने का उद्देश्य यह भी है कि धर्म और गायों के महत्व के बारे में वैज्ञानिक दृष्टि से भी विचार किया जा सके.

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पंचकोशी मार्ग में आता है नलवा गांव
धर्म नगरी अवंतिका उज्जैन में हर साल कई धार्मिक आयोजन होते हैं, उसी में से एक पंचकोशी यात्रा है. जिसमें दर्शनार्थी 84 महादेव, सप्त सागर, 9 नारायण, 1 ज्योतिर्लिंग, 2 शक्तिपीठ सहित कई तीर्थ स्थानों के दर्शन लाभ लेते हैं. चिलचिलाती धूप की तपिश में नंगे पैर चलते हैं. सबसे ज्यादा ग्रामीण इलाकों के बच्चे, युवा, महिलाएं व बुजुर्ग इस कठिन यात्रा में शामिल होते है. चूंकि एकलिंगनाथ जी के मंदिर का भी निर्माण अब गांव नलवा में होने जा रहा है और गांव नलवा पंचकोशी मार्ग का पड़ाव स्थल है. ऐसे में पंचकोशी यात्री भी आने वाले समय में इस तीर्थ के दर्शन लाभ ले सकेंगे.

