महंत लक्ष्मी नारायण दास जयंती: जैतूसाव मठ के पहले महंत, छत्तीसगढ़ में हुए आंदोलनों में लोगों को दिया मार्गदर्शन
महंत लक्ष्मी नारायण दास की जयंती 29 मई को मनाई जाती है, स्वतंत्रता आंदोलन और सामाजिक चेतना में उनका अहम योगदान रहा है

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : May 29, 2026 at 6:10 AM IST
रायपुर: 29 मई को महंत लक्ष्मी नारायण दास की जयंती मनाई जाती है. वे पुरानी बस्ती स्थित नया मंदिर (जैतूसाव मठ) के पहले महंत थे. महंत लक्ष्मी नारायण दास को छत्तीसगढ़ में राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना के संवाहक के रूप में याद किया जाता है. बाद में उन्होंने राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई और राज्यसभा सांसद बने.
स्वतंत्रता आंदोलन में निभाई अहम भूमिका
महंत लक्ष्मी नारायण दास ने छत्तीसगढ़ में हुए कई राष्ट्रीय आंदोलनों में लोगों का मार्गदर्शन किया. इनमें असहयोग आंदोलन, झंडा सत्याग्रह, सविनय अवज्ञा आंदोलन, व्यक्तिगत सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन शामिल हैं. नया मंदिर और जैतूसाव मठ उस समय राष्ट्रीय आंदोलनकारियों का प्रमुख केंद्र माना जाता था.
नया मंदिर में आते थे बड़े राष्ट्रीय नेता
इतिहासकार डॉ. रमेंद्रनाथ मिश्र ने बताया कि महंत लक्ष्मी नारायण दास का भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान था. उन्होंने कहा कि नया मंदिर में पंडित सुंदरलाल शर्मा, पंडित रविशंकर शुक्ल, वामन राव लाखे सहित कई राष्ट्रीय स्तर के नेता आया करते थे. सभी नेता महंत जी से मुलाकात करते और मंदिर दर्शन भी करते थे.

महात्मा गांधी भी एक सप्ताह रहे थे नया मंदिर में
डॉ. मिश्र के अनुसार, महात्मा गांधी भी एक बार नया मंदिर में एक सप्ताह तक रुके थे. इस दौरान उन्होंने एक अछूत बालिका से कुएं से पानी निकलवाकर छुआछूत खत्म करने का संदेश दिया था. महंत लक्ष्मी नारायण दास समाज में समानता और सर्वजन हित की सोच रखने वाले व्यक्ति थे.
सामाजिक सुधार और शिक्षा के क्षेत्र में भी किया काम
महंत लक्ष्मी नारायण दास ने मंदिर के दरवाजे सभी लोगों के लिए खुलवाए थे. उन्होंने शिक्षा, सामाजिक सुधार और संस्कृत के विकास के लिए भी कई महत्वपूर्ण कार्य किए. संस्कृत पाठशालाओं और शिक्षा संस्थानों को आगे बढ़ाने में उनकी अहम भूमिका रही. राष्ट्रीय स्कूल की स्थापना में भी उनका योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है. मठ में उन्होंने एक पुस्तकालय की स्थापना करवाई थी, जहां राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़े लोग बैठकर अध्ययन किया करते थे.
हलधर शास्त्री और यदुवंश नाथ ठाकुर का भी मिला साथ
राष्ट्रीय आंदोलन से लोगों को जोड़ने में पुरानी बस्ती मैथिलपारा के पंडित हलधर शास्त्री और यदुवंश नाथ ठाकुर का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा. हटरी के पास बरगद के पेड़ के नीचे इन लोगों की बैठकें हुआ करती थीं, जहां आंदोलन और समाज सुधार को लेकर चर्चा होती थी.
सरल और मृदुभाषी व्यक्तित्व के धनी थे महंत जी
इतिहासकार डॉ. मिश्र ने बताया कि महंत लक्ष्मी नारायण दास बेहद सरल, सहज और मृदुभाषी थे. वे हमेशा लोगों की मदद और सहयोग करते थे. उन्होंने कहा कि पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में पंडित रविशंकर शुक्ल की शताब्दी वर्ष पर महंत जी का दिया गया भाषण उन्हें आज भी याद है.
छत्तीसगढ़ की सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना में अमिट योगदान
महंत लक्ष्मी नारायण दास ने महानदी की घाटी और छत्तीसगढ़ की माटी में लंबे समय तक सेवा दी. सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करने में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा. इतिहास के पन्नों में उनका नाम सदैव सम्मान के साथ दर्ज रहेगा.

