वाटरमैन सिंह की सलाह-वर्षा जल सहेजने से ही दूर होगी अलवर की पानी की समस्या
बड़ी जल परियोजना से पानी अलवर लाए भी तो कुछ समय तक ही दूर होगी समस्या. स्थायी समाधान के लिए वर्षा जल का संरक्षण जरूरी.

Published : January 4, 2026 at 10:50 AM IST
अलवर: लंबे समय से पेयजल संकट से जूझ रहे जिले को पानी की समस्या से स्थायी निजात दिलाने के लिए वर्षा जल सहेजना होगा. केवल बाहरी जल परियोजना के भरोसे अलवर में जल संकट का निराकरण संभव नहीं है. गिरते भूजल में सुधार के लिए छोटी-छोटी जल संरचनाओं के निर्माण की जरूरत है. यही कारण है कि जल विशेषज्ञ बारिश के पानी के संरक्षण पर जोर देते हैं. हालांकि सरकार का दावा ईआरसीपी, सिलीसेढ़ जल परियोजना, बीसलपुर जल परियेाजनाओं से अलवर का जलसंकट खत्म करने का है, लेकिन जल विशेषज्ञों की नजर में ये प्रयास समस्या का स्थायी हल नहीं है. कारण है कि पूर्व में जिन स्थानों पर भी बाहरी जल परियोजनाओं से पानी लाया गया, वहां 10-20 साल ही ये परियोजनाएं चल पाईं.
मेग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित एवं वाटरमैन राजेन्द्र सिंह ने बताया कि अलवर जिले में बड़ी जल परियोजनाओं के माध्यम से पानी लाने के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन इनका अलवर तक पानी पहुंचने में अभी समय लगना तय है. ये जल परियोजनाएं अलवर की पेयजल समस्या का स्थायी समाधान नहीं है. अलवर के पास अपना पानी है, लेकिन उसका उचित प्रबंधन नहीं है. अलवर को जल संकट से उबारना है तो बाहरी जल परियोजनाओं के बजाय अलवर के आसपास के पानी को संरक्षित करने के उपाय करने चाहिए. आसपास के जल स्रोतों को ठीक करने की जरूरत है. उनका मानना है कि अलवर को वहीं के पानी से पानीदार बनाया जा सकता है, लेकिन यह तभी संभव होगा जब अलवर के लोग एवं सरकार मिलकर जल संरक्षण के लिए कार्य करें.
वर्षा जल का संरक्षण एकमात्र उपाय: तरुण भारत संघ के महामंत्री राजेन्द्र सिंह ने बताया कि अलवर के लोगों को सबसे पहले वर्षा जल को संरक्षित करने की जरूरत है. शहर के चारों ओर जलस्रोतों को ठीक कर उनकी क्षमता बढ़ाने का काम किया जाए. इससे अलवर अपने पानी पर निर्भर रह सकेगा. अभी अलवर के आसपास के बांधों में सिल्ट के चलते भराव क्षमता घट गई है. इस साल मानसून के दौरान अच्छी बारिश हुई. जलस्रोतों में अच्छा पानी आया. वाटरमैन राजेन्द्र सिंह का कहना है कि अलवर को सामुदायिक विकेंद्रित जल प्रबंधन की आवश्यकता है. इसके लिए राज व समाज को मिलकर कार्य करना चाहिए. सरकार जब नई परियोजना लेकर आती है तो लोगों को इसके बारे में पता ही नहीं होता, इसके लिए जरूरी है कि सरकार उसके प्रोजेक्ट के बारे में लोगों को पारदर्शिता से बताएं.
डार्क जोन को किया हरा भरा: वाटरमैन राजेन्द्र सिंह ने बताया कि जिले के ज्यादातर क्षेत्र पहले डार्क जोन में थे, लेकिन वर्षा जल संरक्षण कर कई गांव हरे भरे किए. थानागाजी क्षेत्र की कालीपहाड़ी क्षेत्र को सरकार ने पहले डार्क जोन घोषित किया था, लेकिन यहां वर्षा जल संरक्षण का नतीजा है कि यह अब हरे भरे क्षेत्र में तब्दील हो गया. आज यहां खेतों में फसलें लहलहा रही है. शुरू में यहां न जमीन पर पानी था और न ही नीचे, लेकिन वर्षा जल सहेजने के लिए छोटे एनीकट बनाए गए. बारिश जल संरक्षण से क्षेत्र हरियाली से खुशहाल हो गए और अब यहां पानी की कमी भी नहीं है.
बड़े नामों के बनते रहे प्रोजेक्ट, पानी का इंतजार: अलवर जिला लंबे समय से पेयजल संकट से जूझता रहा है. यहां समय-समय पर पेयजल संकट के निराकरण के लिए बड़े-बड़े नाम की सतही जल परियोजनाएं बनती रही, लेकिन अभी तक किसी भी जल परियोजना का पानी अलवर नहीं पहुंच पाया है. पूर्व में अलवर के लिए कभी चम्बल, कभी यमुना से पानी लाने के सब्जबाग दिखाए गए. अब ईआरसीपी, ईसरदा, सिलीसेढ़ से पानी लाने के दावे किए जा रहे हैं. इनमें से किसी भी परियोजना का पानी अलवर तक नहीं पहुंच पाया है. अब बीसलपुर से पानी लाने की चर्चा है. अलवर में पेयजल संकट का बड़ा कारण गिरता भूजल स्तर है.
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तात्कालिक समाधान तलाशता है विभाग: वर्तमान में अलवर जिले का ज्यादातर हिस्सा डार्क जोन में है. ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट की बात दूर जिला मुख्यालय अलवर में भी लोगों को कहीं 72 तो कहीं 48 घंटे में पानी मिल पा रहा है. इतना ही नहीं शहर का ज्यादातर हिस्सा टयूबवैल सप्लाई या टैंकरों से पानी की सप्लाई पर निर्भर है. गर्मी में मांग बढ़ने पर यहां पेयजल संकट और गहरा जाता है. इससे रोजाना सड़कों पर जाम लगने, जलदाय विभाग के अधिकारियों और कार्यालयों के बाहर लोगों के प्रदर्शन तथा अब पानी की टंकी पर चढ़कर प्रदर्शन दिखाई पड़ते हैं. जलदाय विभाग भी समस्या निराकरण के नाम पर टैंकरों से पानी की सप्लाई कराने तक सीमित है. जिले में पानी की समस्या का मुख्य कारण जिले में प्राकृतिक जल स्रोतों का सूख जाना एवं मानसून के दौरान बारिश के पानी का संरक्षण नहीं हो पाना है. यही कारण है कि जल विशेषज्ञ जिले की पेयजल समस्या के स्थायी हल के लिए वर्षा जल संरक्षण पर जोर देते रहे हैं.

