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माघ मेला 2026 का पहला स्नान शुरू; ATS ने मोर्चा संभाला, संगम क्षेत्र नो व्हीकल जोन घोषित

कमिश्नर सौम्या अग्रवाल, पुलिस कमिश्नर जोगिंदर कुमार, डीएम मनीष कुमार वर्मा ने माघ मेले के पहले स्नान की तैयारियों को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की.

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कमिश्नर सौम्या अग्रवाल, पुलिस कमिश्नर जोगिंदर कुमार, डीएम मनीष कुमार वर्मा ने तैयारियों के बारे में बताया. (Photo Credit: ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : January 2, 2026 at 10:02 PM IST

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Updated : January 3, 2026 at 6:45 AM IST

10 Min Read
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प्रयागराज: माघ मेला 2026 का पहला स्नान पर्व पौष पूर्णिमा यानी आज से शुरू हो गया. संगम क्षेत्र में भोर से ही कल्पवासियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया है. प्रशासन का अनुमान है कि 25 से 30 लाख श्रद्धालु कल संगम में स्नान करेंगे. आज पहला स्नान पर्व है.

सुरक्षा के व्यापक इंतजाम: संगम क्षेत्र में ATS ने मोर्चा संभाल लिया है और संगम क्षेत्र में फ्लैग मार्च किया है. किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए जल, थल और नभ तीनों से सुरक्षा घेरा मजबूत कर दिया गया है.

जानकारी देती कमिश्नर सौम्या अग्रवाल (Video Credit: ETV Bharat)

QR कोड बताएंगे लोकेशन: प्रयागराज मंडल की कमिश्नर सौम्या अग्रवाल, पुलिस कमिश्नर जोगिंदर कुमार और जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने माघ मेले के पहले स्नान पर्व और प्रशासनिक तैयारियों के संबंध में शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की. प्रयागराज मेला विकास प्राधिकरण के सभागार में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में कमिश्नर सौम्या अग्रवाल ने माघ मेले 2026 की तैयारी के संबंध में जानकारी दी.

मेडिकल इमरजेंसी में ऐप का इस्तेमाल होगा: उन्होंने बताया कि पहली बार शासन की पहल पर माघ मेले का लोगो तैयार किया गया है. इसके अलावा मेला सेवा एप भी तैयार किया गया है, जिसके माध्यम से मेला क्षेत्र में लगे बिजली के पोल पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन कर आपातकालीन स्थिति में मदद मांगी जा सकती है.

इसके अलावा आग लगने पर, मेडिकल इमरजेंसी में या किसी अन्य तरह की मदद के लिए भी इस ऐप का उपयोग किया जा सकेगा. क्यूआर कोड स्कैन कर श्रद्धालु अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं. क्यूआर कोड स्कैन होते ही श्रद्धालु की शिकायत को संबंधित विभाग को सौंप दिया जाएगा. श्रद्धालु को कुछ ही मिनट में मदद मुहैया होगी.

पहली बार माघ मेले में बाइक टैक्सी की सेवा: सौम्या अग्रवाल ने बताया कि माघ मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए पहली बार रैपिडो टैक्सी सेवा की शुरुआत की गई है. इसके लिए कंपनी से एमओयू किया गया है. ये टैक्सी श्रद्धालुओं को रेलवे स्टेशनों और बस स्टॉप से लेकर माघ मेला क्षेत्र से सबसे नजदीप प्वाइंट तक ड्रॉप करेंगे. इसके पिकअप और ड्रॉप लोकेशन तय किए गए हैं. कोई भी श्रद्धालु रैपिडो की सेवा मोबाइल एप से ले पाएगा.

22 पुलिस अधिकारी, 1593 पुलिसकर्मी तैनात किए गए: पुलिस कमिश्नर जोगिंदर कुमार ने बताया कि मेला क्षेत्र में 7 अपर पुलिस अधीक्षक और 14 पुलिस उपाधीक्षक की तैनाती की गई है. सिविल पुलिस के अंतर्गत 29 निरीक्षक, 221 पुरुष उपनिरीक्षक, 15 महिला उपनिरीक्षक, 1593 पुरुष मुख्य आरक्षी तथा 136 महिला मुख्य आरक्षी की तैनाती की गई है. यातायात संचालन एवं नियंत्रण के लिए 4 यातायात निरीक्षक, 38 यातायात उपनिरीक्षक तथा 381 यातायात मुख्य आरक्षी तैनात किए गए हैं. सहायक बल के रूप में 1088 होमगार्ड और 304 पीआरडी कर्मियों की तैनाती की गई है.

एटीएस की दो टीमें सुरक्षा के लिए तैनात: कानून-व्यवस्था एवं आपदा प्रबंधन के लिए पीएसी की 5 बाढ़ राहत कंपनियां, 7 कानून-व्यवस्था कंपनियां तथा मुख्य स्नान पर्व के लिए 5 कानून-व्यवस्था कंपनियां तैनात की गई हैं. इसके अतिरिक्त 2 एनडीआरएफ टीमें, 1 एसडीआरएफ टीम, 2 आरएफ कंपनियां सम्पूर्ण मेला अवधि के लिए तैनात की गई हैं.

इसके साथ ही साथ मुख्य स्नान पर्व के लिए 4 आरएएफ कंपनियां तैनात रहेंगी. आंतरिक सुरक्षा एवं सघन चेकिंग के लिए 6 बीडीडीएस. टीमें, 10 एएस चेक टीमें, 1 एंटी माइन्स टीम, 2 एटीएस टीमें तथा 100 लोकल इंटेलीजेंस की टीमों को लगातार माघ मेले की सघन चेकिंग के लिए लगाया गया है.

200 मोटर बोट और 30 प्रशिक्षित गोताखोर लगाए गए: जल जनित दुर्घटनाओं की रोकथाम हेतु पुलिस अधीक्षक, माघ मेला के समन्वय में जल पुलिस, एनडीआरएफ एवं एसडीआरएफ के साथ त्रि-स्तरीय जल सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है. इसके अंतर्गत 6 जल पुलिस कर्मी, 200 मोटर बोट, 30 प्रशिक्षित गोताखोर, पुलिस प्रशासन के पास 2000 लाइफ सेविंग जैकेट, नाविकों के पास अनुमानित 25000 लाइफ जैकेट, 461 लाइफ बाय, 4 जल पुलिस सब-स्टेशन, 8 किलोमीटर डीप वॉटर बैरिकेटिंग तथा 2 किलोमीटर फ्लोटिंग रिवर लाइन की व्यवस्था की गई है.

मेले में 20 फायर स्टेशन स्थापित किए गए: अग्नि सुरक्षा एवं आपातकालीन स्थितियों से निपटने हेतु 20 फायर स्टेशन बनाए गए हैं. 7 फायर चौकियां, 20 वॉच टॉवर, 990 फायर हाइड्रेंट, 22 हाई प्रेशर ट्यूबवेल, 153 फायर टेंडर/वाहन एवं 761 अग्निशमन कर्मियों की तैनाती की गई है. तकनीकी निगरानी एवं सहायता के लिए मेला क्षेत्र में 400 एवं नगर क्षेत्र में 1152 सीसीटीवी कैमरे, 1 सेंट्रल कंट्रोल रूम, 7 खोया-पाया केंद्र, 16 महिला हेल्प डेस्क तथा 17 साइबर हेल्प डेस्क स्थापित किए गए हैं.

जरूरी ट्रैफिक और रेलवे अपडेट:

  • केवल एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और आपातकालीन वाहनों को अनुमति.
  • आम श्रद्धालुओं को पैदल और तय रूट से ही संगम व स्नान घाटों तक जाना होगा.
  • संगम नोज पर पूरी तरह वाहन प्रतिबंधित.
  • किसी भी तरह की पार्किंग की अनुमति नहीं.
  • नजदीकी पार्किंग भरने पर उससे पहले वाले पार्किंग स्थल में वाहन खड़े होंगे.
  • नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई.
  • पांटून पुलों पर एकल दिशा व्यवस्था.

रेलवे की खास व्यवस्था

  • प्रयागराज जंक्शन, सूबेदारगंज, छिवकी और नैनी में वनवे सिस्टम.
  • प्रयागराज जंक्शन: प्रवेश सिटी साइड से, निकासी सिविल लाइंस से.
  • प्रयागराज संगम रेलवे स्टेशन 2 से 4 जनवरी तक बंद.
  • यात्री प्रयागराज जंक्शन से ही चढ़ेंगे और उतरेंगे.

परेड क्षेत्र प्लॉट नंबर 17 पार्किंग से ऐसे पहुंचे स्नान घाट: संगम जाने के लिए सबसे नजदीक का पार्किंग स्थल परेड ग्राउंड के प्लॉट नंबर 17 में बना पार्किंग स्थल है. यहां वाहन खड़े करने वाले श्रद्धालु काली मार्ग से पैदल चलते हुए अपर संगम मार्ग के जरिए संगम स्नान घाट, हनुमान घाट और रामघाट तक पहुंच सकेंगे. स्नान के बाद अक्षयवट मार्ग, खडंजा वापसी मार्ग और त्रिवेणी मार्ग होते हुए श्रद्धालु वापस पार्किंग तक आएंगे.

स्नान के बाद उसी मार्ग से लौटेंगे श्रद्धालु: पार्किंग स्थल से संगम की कूल दूरी करीब 3 किलोमीटर अनुमानित है. गल्ला मंडी पार्किंग में वाहन खड़े करने वाले श्रद्धालु काली मार्ग से पैदल मोरी रैंप और किलाघाट मार्ग होते हुए काली उत्तरी घाट, मोरी घाट, शिवाला घाट और दशाश्वमेध घाट तक पहुंच सकेंगे. स्नान के बाद गंगामूर्ति चौराहा से ओल्ड जीटी रोड या रिवरफ्रंट मार्ग के जरिए पार्किंग में वापसी होगी.

नागवासुकि पार्किंग से श्रद्धालु रिवरफ्रंट मार्ग या संबंधित पैदल मार्ग से नागवासुकि स्नान घाट तक जा सकेंगे और स्नान के बाद उसी मार्ग से लौटेंगे. झूंसी क्षेत्र की ओल्ड जीटी कछार पार्किंग में वाहन खड़े करने वाले श्रद्धालु पैदल चलते हुए पांटून पुल संख्या 4 और 5 के पश्चिमी हिस्से के बीच बने स्नान घाटों तक पहुंचेंगे. इसके बाद ओल्ड जीटी मार्ग से वापसी की व्यवस्था की गई है.

टीकरमाफी महुआबाग और सोहम आश्रम पार्किंग से रूट तय: टीकरमाफी महुआबाग पार्किंग के श्रद्धालु जीटी रोड और टीकरमाफी से त्रिवेणी मार्ग होते हुए पांटून पुल संख्या 2 और 3 के पश्चिमी हिस्से के बीच बने घाटों पर स्नान करेंगे. वापसी काली मार्ग से टीकरमाफी और जीटी रोड होते हुए होगी. सोहम आश्रम पार्किंग से श्रद्धालु रिवरफ्रंट झूंसी मार्ग और अक्षयवट मार्ग से पांटून पुल संख्या 1 के दक्षिणी हिस्से स्थित ऐरावत स्नान घाट तक पहुंचेंगे. स्नान के बाद महावीर मार्ग से होते हुए रिवरफ्रंट झूंसी मार्ग और समुद्रकूप मार्ग से पार्किंग में वापसी होगी.

अरैल क्षेत्र के लिए अलग व्यवस्था, तीन प्रमुख पार्किंग: अरैल क्षेत्र में देवरख कछार, गजिया और नवप्रयागम पार्किंग तय की गई है. देवरख कछार पार्किंग से श्रद्धालु सोमेश्वर महादेव रैंप मार्ग से सोमेश्वर महादेव स्नान घाट तक जाएंगे और उसी मार्ग से लौटेंगे. गजिया पार्किंग से अरैल घाट, चक्रमाधव घाट और अन्य घाटों तक पैदल रूट तय किया गया है. नवप्रयागम पार्किंग से श्रद्धालु नवप्रयागम अप्रोच मार्ग और अरैल बांध रोड के जरिए घाटों तक पहुंचेंगे और स्नान के बाद संकट मोचन मार्ग से वापसी करेंगे.

परेड क्षेत्र प्लॉट नंबर 17 पार्किंग से ऐसे पहुंचे स्नान घाट: संगम जाने के लिए सबसे नजदीक का पार्किंग स्थल परेड ग्राउंड के प्लॉट नंबर 17 में बना पार्किंग स्थल है. यहां वाहन खड़े करने वाले श्रद्धालु काली मार्ग से पैदल चलते हुए अपर संगम मार्ग के जरिए संगम स्नान घाट, हनुमान घाट और रामघाट तक पहुंच सकेंगे. स्नान के बाद अक्षयवट मार्ग, खडंजा वापसी मार्ग और त्रिवेणी मार्ग होते हुए श्रद्धालु वापस पार्किंग तक आएंगे. पार्किंग स्थल से संगम की कूल दूरी करीब 3 किलोमीटर अनुमानित है.

ओल्ड जीटी मार्ग से वापसी की व्यवस्था: गल्ला मंडी पार्किंग में वाहन खड़े करने वाले श्रद्धालु काली मार्ग से पैदल मोरी रैंप और किलाघाट मार्ग होते हुए काली उत्तरी घाट, मोरी घाट, शिवाला घाट और दशाश्वमेध घाट तक पहुंच सकेंगे. स्नान के बाद गंगामूर्ति चौराहा से ओल्ड जीटी रोड या रिवरफ्रंट मार्ग के जरिए पार्किंग में वापसी होगी. नागवासुकि पार्किंग से श्रद्धालु रिवरफ्रंट मार्ग या संबंधित पैदल मार्ग से नागवासुकि स्नान घाट तक जा सकेंगे और स्नान के बाद उसी मार्ग से लौटेंगे. वहीं झूंसी क्षेत्र की ओल्ड जीटी कछार पार्किंग में वाहन खड़े करने वाले श्रद्धालु पैदल चलते हुए पांटून पुल संख्या 4 और 5 के पश्चिमी हिस्से के बीच बने स्नान घाटों तक पहुंचेंगे. इसके बाद ओल्ड जीटी मार्ग से वापसी की व्यवस्था की गई है.

टीकरमाफी महुआबाग और सोहम आश्रम पार्किंग से रूट तय: टीकरमाफी महुआबाग पार्किंग के श्रद्धालु जीटी रोड और टीकरमाफी से त्रिवेणी मार्ग होते हुए पांटून पुल संख्या 2 और 3 के पश्चिमी हिस्से के बीच बने घाटों पर स्नान करेंगे. वापसी काली मार्ग से टीकरमाफी और जीटी रोड होते हुए होगी. सोहम आश्रम पार्किंग से श्रद्धालु रिवरफ्रंट झूंसी मार्ग और अक्षयवट मार्ग से पांटून पुल संख्या 1 के दक्षिणी हिस्से स्थित ऐरावत स्नान घाट तक पहुंचेंगे. स्नान के बाद महावीर मार्ग से होते हुए रिवरफ्रंट झूंसी मार्ग और समुद्रकूप मार्ग से पार्किंग में वापसी होगी.

अरैल क्षेत्र के लिए अलग व्यवस्था, तीन प्रमुख पार्किंग: अरैल क्षेत्र में देवरख कछार, गजिया और नवप्रयागम पार्किंग तय की गई है.
देवरख कछार पार्किंग से श्रद्धालु सोमेश्वर महादेव रैंप मार्ग से सोमेश्वर महादेव स्नान घाट तक जाएंगे और उसी मार्ग से लौटेंगे. गजिया पार्किंग से अरैल घाट, चक्रमाधव घाट और अन्य घाटों तक पैदल रूट तय किया गया है. नवप्रयागम पार्किंग से श्रद्धालु नवप्रयागम अप्रोच मार्ग और अरैल बांध रोड के जरिए घाटों तक पहुंचेंगे और स्नान के बाद संकट मोचन मार्ग से वापसी करेंगे.

यह भी पढ़ें- माघ मेला 2026: बनारस में रेलवे ने पूरी की तैयारी, सुरक्षा और टिकटिंग से लेकर स्पेशल ट्रेनों तक की व्यवस्था

Last Updated : January 3, 2026 at 6:45 AM IST