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बोनस अंक पाने गलत जानकारी दी, चयनित साढ़े 9 हजार से ज्यादा शिक्षकों को झटका

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 2025 की शिक्षक भर्ती परीक्षा में अपात्र अभ्यर्थियों की अपीलें खारिज की. सिद्धार्थ शंकर पांडे की रिपोर्ट.

MP teacher recruitment 2025
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट जबलपुर (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : August 20, 2026 at 2:04 PM IST

3 Min Read
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जबलपुर : "धोखाधड़ी से प्राप्त किसी भी लाभ के आधार पर बाद में समानता के सिद्धांत पर राहत नहीं मांगी जा सकती." मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जस्टिस आनंद पाठक तथा जस्टिस बीपी शर्मा की युगलपीठ ने ये टिप्पणी 2025 की शिक्षक भर्ती परीक्षा में अपात्र अभ्यर्थियों की अपीलें खारिज करने के दौरान की.

करीब 5 हजार आवेदक ही बोनस अंक के हकदार

नरसिंहपुर निवासी सोनम अगरैया एवं अन्य की तरफ से हाई कोर्ट में अपात्र अभ्यार्थियो को प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 में 5 प्रतिशत बोनस अंक दिये जाने को चुनौती दी गयी थी. भर्ती नियम के तहत विशेष शिक्षा डिप्लोमाधारक अभ्यर्थियों को 5 प्रतिशत बोनस अंक प्रदान करने का प्रावधान था. भर्ती के लिए जारी मेरिट सूची में 13089 पदों के लिए लगभग 14964 अभ्यर्थियों ने खुद को इस श्रेणी में दिखाकर बोनस अंक प्राप्त किए. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वास्तव में केवल लगभग 5271 अभ्यर्थी ही बोनस अंक की योग्यता रखते थे. इस प्रकार करीब साढ़े 9 हजार आवेदकों को करारा झटका लगा है.

गलत लाभ पाने के लिए हां का विकल्प चुना

एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा "बोर्ड द्वारा केवल ऑनलाइन आवेदन में हां का विकल्प चुने जाने पर बिना दस्तावेज सत्यापन के बोनस अंक प्रदान कर दिये. इससे वास्तविक और पात्र अभ्यर्थियों की मेरिट प्रभावित हुई. अभ्यर्थियों को सुधार हेतु पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद जिन्होंने गलत जानकारी दी, परिणाम आने के बाद अपने अंक कम करवाने की मांग कर रहे हैं. इससे बेईमानी को बढ़ावा मिलेगा और ईमानदार अभ्यर्थी दंडित होंगे."

हां का विकल्प चुनने वालों से मांगे सबूत

एकलपीठ ने राज्य शासन को चयन सूची मंडल को निर्देश जारी किये थे कि हां का विकल्प चुनने वालों के लिए डी.एल.एड. डिप्लोमा अपलोड करने 15 दिन अतिरिक्त विंडो खोला जाये. प्रमाण पत्र अपलोड नहीं करने वालों का आवेदन निरस्त करते हुए 3 माह की अवधि में संशोधित मेरिट सूची तैयार कर नियुक्ति आदेश जारी किये जाएं. इस आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील दायर की गयी.

अपीलार्थियों की तरफ से तर्क दिया गया कि भूलवश उन्होंने हां का विकल्प चुन लिया था. वह बोनस अंक की मांग नहीं कर रहे, बल्कि केवल वास्तविक अंकों के आधार पर अपनी चयन प्रक्रिया में शामिल किए जाने की मांग कर रहे हैं.

गलत जानकारी देना धोखाधड़ी है

कुछ अपीलार्थियों ने स्वयं को दिव्यांग श्रेणी का बताते हुए सहानुभूतिपूर्वक विचार किए जाने का अनुरोध भी किया. युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा "अपीलकर्ताओं ने कई अवसर मिलने के बावजूद अपनी गलती नहीं सुधारी. परिणाम घोषित होने के बाद जब अभ्यर्थियों को यह पता चला कि बोनस अंक हटाए जाने पर भी वे मेरिट में आ रहे हैं, तभी उन्होंने गलती को भूलवश बताते हुए सुधार की मांग की, जो कि स्वीकार्य नहीं है. गलत जानकारी देकर बोनस अंक प्राप्त करना धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है." अधिवक्ता आलोक वागरेचा एवं अधिवक्ता विशाल बघेल ने पैरवी की.