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मध्य प्रदेश के चावल घोटाले को FCI ने कहा बेबुनियाद, 1160 करोड़ नहीं 5.63 लाख में उलझा मामला

मध्य प्रदेश के चावल घोटाला पर फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया का बयान, 1160 करोड़ के कथित चावल की हेराफेरी को बताया तथ्यात्मक गलत.

MP RICE DIVERSION FCI CLARIFIES
मध्य प्रदेश के चावल घोटाले को एफसीआई ने बताया बेबुनियाद (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : July 14, 2026 at 3:20 PM IST

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Updated : July 14, 2026 at 3:31 PM IST

4 Min Read
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भोपाल: मध्य प्रदेश में सरकारी सब्सिडी वाले राशन में घोटाले की खबरें लगातार सामने आ रही है. जिसे लेकर मध्य प्रदेश से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस ने जांच की मांग की. अब इन आरोपों को लेकर फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानि (FCI) का बयान सामने आया है. एफसीआई ने इन आरोपों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया है. उनका कहना है कि एफसीआई ने कहा कि जांच के दायरे में आए गायब चावल की कीमत सिर्फ 5.63 लाख रुपए हैं, न कि 1160 करोड़ रुपए. जो आंकड़े सामने लाए गए थे, वे पूरी तरह से बेबूनियाद है.

चावल घोटाला मामले पर FCI ने रखा पक्ष

बालाघाट और पांढुर्णा में हुई चावल की हेराफेरी को लेकर भारतीय खाद्य निगम ( FCI) ने सोशल मीडिया एक्स पर अपना पक्ष रखा. घोटाले को लेकर जो भी खबरें सामने आ रहीं थी, उन सारी रिपोर्ट्स को एफसीआई ने खारिज किया है. एफसीआई का कहना है कि जो भी तथ्य सामने आ रहे हैं, जिसमें कहा गया कि 1160 करोड़ रुपए के चावल का घोटाला हुआ है, वो सब बातें बेबुनियाद है. भारतीय खाद्य निगम ने कहा कि जांच का दायर पूरे स्टॉक पर नहीं ब्लिक 5.63 लाख रुपए की कीमत के चावल का है.

FCI DENIES RICE ETHANOL SCAM
एफसीआई ने घोटाले पर दिया बयान (FCI)

FCI ने एक्स पर पेश किए आंकड़े

एफसीआई ने कहा कि साल 2024-25 में डिस्टिलरीज को कुल 5.39 लाख मीट्रिक टन चावल जारी किया गया है. भारतीय खाद्य निगम ने कहा कि रिपोर्ट में बताया गया कि 1160 करोड़ रुपए की लागत का 5 LMT चावल की जारी कीमत (23.20 रुपए प्रति किलो) के आधार पर लगाया गया है, (5,00,000,000 किलो * 23.20 रुपए किलो= 1160 करोड़ रुपए) इसका मतलब है कि 5 LMT की पूरी मात्रा का गलत उपयोग किया गया है. यह आंकड़ा वह असल रकम है, जो डिस्टिलरीज ने 5 LMT चावल उठाने के लिए FCI को चुकाई है.

'5.63 लाख चावल की हेराफेरी, 1160 करोड़ का आंकड़ा गलत'

एफसीआई का सीधा कहना है कि जांच एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के तहत सप्लाई किए गए पूरे चावल से जुड़ी नहीं है. यह मामला केवल 242.50 क्विंटल चावल (490 बोरी) के कथित हेराफेरी से जुड़ा है. जिसकी अनुमानित कीमत 5.63 लाख रुपए हैं. लिहाजा पूरे एथेनॉल को भेजे गए वैध चावल के दाम को घोटाले से जोड़ना गलत है. इसके साथ ही एफसीआई ने यह भी साफ किया कि जो हेराफेरी की खबरें सामने आ रही हैं, वह किसी बाहरी एजेंसी द्वारा नहीं बल्कि सरकारी एजेंसी की निगरानी में लाई गई.

डिस्टिलरी को नोटिस, FIR के बाद राइस मिल ब्लैकलिस्टेड

उन्होंने यह भी बताया कि जून 2026 के पहले सप्ताह में परिवहन के दौरान अनियमितता पाए जाने पर एफसीआई ने संबंधित डिस्टिलरी को नोटिस भी भेजा ता. इसके बाद राज्य खाद्य विभाग ने 5 जून को एफआईआर भी दर्ज कराई थी. जो 242 क्विंटल चावल घोटाले का मामला है, उसकी जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी गई है. इस घोटाले में सामने आई राइस मिल को ब्लैकलिस्टेड कर 44.12 लाख रुपए का जुर्माना लगा दिया गया है.

क्या है सब्सिडी वाले चावल घोटाले का मामला

आपको बता दें कि बालाघाट और पांढुर्णा में फूड कॉरपोरेश ऑफ इंडिया के चावल में हेराफेरी के आरोप लगे थे. आरोप था कि सरकारी दस्तावेजों के अनुसार अप्रैल से जून 2026 के बीच 44 ट्रकों में भरकर करीब 16500 क्विंटल चावल पांढुर्णा जिले के सौसर स्थित प्लांट के लिए रवाना किया गया. परिवहन रिकॉर्ड में यह माल फैक्ट्री तक पहुंचा दिखाया गया, लेकिन जांच के दौरान जब वास्तविक स्टॉक और दस्तावेजों का मिलान किया गया तो भारी अंतर सामने आया. यहीं से पूरे मामले का खुलासा हुआ और करोड़ों रुपये के घोटाले की आशंका हुई.

Last Updated : July 14, 2026 at 3:31 PM IST