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रेल सफर की गवाही बनी जी का जंजाल, जीआरपी की जल्दबाजी से फाइलों में दबा इंसाफ

मध्य प्रदेश की रेलवे अदालतों में 12 हजार से अधिक मामले लंबित, अब एडीजी रेल ने हाईकोर्ट से लगाई गुहार. रिपोर्ट विश्वास चतुर्वेदी.

RAILWAY COURT MORE THAN 12000 CASES PENDING
मध्य प्रदेश की रेलवे अदालतों में 12 हजार से अधिक मामले लंबित (ETV Bharat GFX)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : August 20, 2026 at 5:32 PM IST

3 Min Read
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भोपाल: सफर के दौरान सहयात्रियों को आनन-फानन में गवाह बनाना अब रेलवे की अदालतों के गले की फांस बन गया है. दरअसल, दूर-दराज के ये गवाह दोबारा तारीखों पर लौटते नहीं और आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं, नतीजतन प्रदेश की रेलवे अदालतों में 12 हजार से अधिक मामले लंबित पड़े हैं. पेंडेंसी के भारी बोझ को खत्म करने के लिए एडीजी रेल को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा है.

फाइलों में दबा इंसाफ, 12 हजार से अधिक केस पेंडिंग

मध्य प्रदेश की रेलवे अदालतों में इंसाफ की रफ्तार ट्रेनों की लेटलतीफी से भी ज्यादा धीमी हो चुकी है. प्रदेश की भोपाल, जबलपुर और इंदौर जीआरपी यूनिट के थानों में कुल 12,262 आपराधिक मामले अदालतों में सालों से लंबित पड़े हैं. आंकड़ों के अनुसार भोपाल इकाई में 4,864, जबलपुर इकाई में 4,426 और इंदौर इकाई में 2,972 मामले लंबित हैं. जानकारों का मानना है कि मुकदमों के आगे न बढ़ने के दो मुख्य कारण हैं. पहला गवाह बयान देने कोर्ट नहीं पहुंचते और दूसरा कई मामलों में आरोपी अब तक गिरफ्तार नहीं हो सके हैं.

MADHYA PRADESH RAILWAY COURT
जीआरपी की जल्दबाजी से फाइलों में दबा इंसाफ (ETV Bharat GFX)

चलती ट्रेन की गवाही बनी जी का जंजाल

दरअसल, रेलवे से संबंधित अपराधों में पुलिस अक्सर घटना के समय ट्रेन में मौजूद सहयात्रियों को गवाह बना लेती है. ये यात्री उस वक्त तो गवाह बन जाते हैं, लेकिन दूर-दराज के राज्यों या शहरों से होने के कारण बाद में कोर्ट के समन भेजने पर भी पेशी पर नहीं आते. उदाहरण के लिए, जबलपुर इकाई के गाडरवारा थाने में साल 1998 का धोखाधड़ी का मामला आज भी पेंडिंग है. इसी तरह भोपाल इकाई के तहत ग्वालियर बीजी थाने का साल 2002 का चोरी का मामला और इंदौर इकाई के उज्जैन थाने का साल 2015 का मामला गवाहों के बयान न होने से अटका पड़ा है.

RAILWAY COURT MORE THAN 12000 CASES PENDING
लंबित मामलों वाली अदालतें (ETV Bharat GFX)

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एडीजी रेल राजाबाबू सिंह ने हाईकोर्ट को लगाई गुहार

एडीजी रेल राजाबाबू सिंह के अनुसार "7 साल या उससे ज्यादा समय से लंबित प्रकरणों के जल्द निराकरण के लिए हाईकोर्ट को पत्र लिखकर मजिस्ट्रेटों को मेमोरेंडम जारी करने का अनुरोध किया गया है. साथ ही अब कोर्ट मुंशी सुनवाई से कुछ दिन पहले गवाहों को काल कर पेशी पर आने के लिए सूचित करेंगे. वहीं गवाह पेश कराने की जिम्मेदारी विवेचना अधिकारी की होगी और हर इकाई के एसपी इसका सुपरविजन करेंगे." एडीजी रेल के अनुसार हाईकोर्ट द्वारा मेमोरेंडम जारी होने से निचले न्यायालयों को प्राथमिकता के आधार पर पुराने मामलों की सुनवाई करनी होगी. इससे अदालतों पर गैर-जरूरी तारीखें देने के बजाय तेजी से ट्रायल पूरा करने का दबाव बनेगा.