जगदीश देवड़ा ने रक्षाबंधन पर लाड़ली बहना को लेकर कही बड़ी बात, विभागों के बजट कंट्रोल की सुपर प्लानिंग
मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा की ईटीवी भारत मध्य प्रदेश की ब्यूरो चीफ शिफाली पांडेय से एक्सक्लूसिव बातचीत.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : August 27, 2026 at 8:34 PM IST
|Updated : August 28, 2026 at 10:47 AM IST
भोपाल: मध्य प्रदेश में अब तक 63 हजार 248 करोड़ की राशि लाड़ली बहनों के खाते में भेजी जा चुकी है. सरकार के खजाने का बड़ा हिस्सा इस योजना पर खर्च होता है. प्रदेश के कर्ज का आंकड़ा 5 लाख 61 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, लेकिन सरकार की लाड़ली बहना योजना को बंद करने की योजना है.
प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने ईटीवी भारत से एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा कि लाड़ली बहना योजना भार नहीं, ड्यूटी है हमारी. हमारा कत्तर्व्य है. उन्होंने बताया कि किस तरह से सरकार रोलिंग बजट में विभागों से खर्च का ब्यौरा लेने के साथ फिजूलखर्ची पर रोक लगा रही है. और कैसे लिया जा रहा कर्ज असल में मध्य प्रदेश में किया जा रहा निवेश है.
रक्षाबंधन पर वित्त मंत्री की लाड़ली बहना पर ये बड़ी बात
डिप्टी सीएम ने कहा लाड़ली बहना मोहन सरकार की उन योजनाओं में से है जिनकी वजह से बढ़ने वाले वित्तीय बोझ के बावजूद सरकार इस योजना में कोई कोताही नहीं बरतेगी. जब उनसे इस संबंध में सवाल किया गया कि इस योजना से सरकार पर वित्तीय भार सबसे ज्यादा बढ़ा है. तो उन्होंने कहा कि ये योजना महिला सशक्तिकरण का सबसे बड़ा उदाहरण है.
बहनों को अगर अपने पांव पर खड़े होने का अवसर सरकार देती है.. अगर उनका सहयोग करती है और उनके परिवार में उस राशि का उपयोग होता है तो इससे बेहतर क्या है. इसे भार की तरह तो बिल्कुल नहीं लिया जा सकता है. ये तो कर्तव्य है हमारा, हमारे प्रदेश की बहनों के लिए. लाड़ली बहना योजना में अब तक सरकार 63 हजार करोड़ से ज्यादा की राशि खर्च कर चुकी है.

बजट देने से पहले अब विभागों से लिया जाएगा खर्चे का ब्यौरा
अब मध्य प्रदेश में मितव्यियता बरतते हुए वित्त विभाग सभी विभागों से खर्चों का ब्यौरा पहले ले रहा है. वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने बताया कि 2028-29 व 2029-30 के रोलिंग बजट के लिए सभी विभागों से पहले ये जानकारी मांगी गई है कि पिछली बार का जो बजट दिया गया था उसकी कितनी प्रतिशत राशि खर्च हुई. वो बजट उपयोग हुआ या नहीं. पहले इसका क्लियरिफिकेशन आना चाहिए.
बजट की कितनी आवश्यक्ता है उस हिसाब से अब विभाग का बजट तय किया जाएगा. पहले की तरह नहीं कि विभाग ने जो मन चाहा बजट मांग लिया. अब पहले पड़ताल होगी कि आपने क्यों बजट मांगा? पहले जो दिया गया उसकी क्या स्थिति है? अगर आपने वही खर्च नहीं किया तो अब आपको बजट की आवश्यक्ता क्यों है? डिप्टी सीएएम जगदीश देवड़ा का मानना है कि इससे काम की गति बढ़ेगी. इसमें फिर विभाग उतने ही बजट की डिमांड करेंगे जितनी की उनको जरूरत होगी.
फिजूलखर्ची पर लगाम, पैसा जनता से जुड़े कामों में खर्च हो
वित्त विभाग ने जिस तरह से हवाई यात्राओं पर और सरकारी कार्यक्रमों के साथ वाहनों के काफिलों पर रोक लगाई है. उसको लेकर डिप्टी सीएम और वित्त विभाग की जवाबदारी संभाल रहे जगदीश देवड़ा का कहना था कि ये सारा पैसा बचेगा तो प्रदेश और देश के खजाने में जनता के लिए उपयोग होगा. हवाई यात्रा में जो फिजूल खर्ची होती है वो पैसा बचेगा. मुझे लगता है कि ये सभी लोगों को करना चाहिए. ये जो पैसा बचेगा उसका उपयोग हम प्रदेश में विकास कार्यों में जनता से जुड़े कार्यो में कर सकेंगे.
हर 15 दिन में कर्ज, डिप्टी सीएम बोले- ये कर्ज नहीं निवेश है
मध्य प्रदेश पर कर्ज का आंकड़ा 5 लाख 61 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गया है. जिसको लेकर कांग्रेस आरोप लगा रही है कि सरकार कर्जा लेकर घी पी रही है. इस सवाल के जवाब में वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि ये उनका एक रटा-रटाया शब्द हो गया है. एक विषय उनके पास है जिसे दोहराते रहते हैं. लेकिन वे ये क्यों नहीं बोल पाते कि मध्यप्रदेश में सड़के कितनी बनी? स्टॉप डैम कितने बने, तालाब सिंचाई परियोजना कितनी बनीं?
केन बेतवा कालीसिंध पार्वती नदी हो इस क्षेत्र में कितना काम हुआ? कितने मेडिकल कॉलेज खुले, कितने सांदीपनी विद्यालय खुले इनकी बात कांग्रेस के नेता नहीं करते. उन्होने कहा कि 2003 के पहले आज की स्थिति में विकास का अंतर कितना आया है ये देखें. इस बात को नहीं कहते हैं कि कर्जा लिया तो कब डिफॉल्टर हुई सरकार? वित्त मंत्री ने कहा कि कांग्रेस की सरकार और बीजेपी की सरकार में अंतर है.
बीजेपी की सरकार में मोहन यादव के नेतृत्व में कर्ज जब लिया है पूंजीगत कार्यों के लिए लिया है. इस धनराशि से केवल डेवलपमेटं होते हैं. और विकास कार्य होंगे तो आर्थिक दृष्टि से भी गति आएगी. रेवेन्यू आएगा.. रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. कांग्रेस की सरकार में तो कर्जा लेकर वेतन भत्ते दिए जाते थे. हम तो पूंजीगत कार्यों में इसे खर्च कर रहे हैं. हिंदुस्तान का कौन सा राज्य है जो कर्ज नहीं लेता ये बताइए? देवड़ा ने कहा विकास के कार्य होते हैं तो मजदूरों को रोजगार मिलता है, व्यापार बढ़ता है. मैं तो इसे कर्ज नहीं निवेश कहता हूं. चूंकि कांग्रेस सरकार में नहीं है तो हमेशा यही विषय उठाते रहते हैं.

