आर्टिफिशियल दिमाग लिखेगा मध्य प्रदेश के अन्नदाता की किस्मत, IIT का स्पेशल टूल बनेगा दिव्यास्त्र
मध्य प्रदेश का किसान होगा हाईटेक. आईआईटी रोपड़ के साथ काम करेगा ग्वालियर का राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय. पीयूष श्रीवास्तव की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : August 26, 2026 at 10:31 PM IST
|Updated : August 27, 2026 at 10:48 AM IST
ग्वालियर: सोचिये एक किसान जिसके खेत में फसल में कीट लगे हैं, किसान अपना मोबाइल फोन निकाल कर फसल का फोटो लेता है और उसे तुरंत पता चल जाता है की ये कौन सी बीमारी है, जो उसकी फसल खराब कर रही है. उसे तुरंत उसके बचाव का तरीका भी फोन पर आ जाता है, या उसकी उम्मीद के अनुसार फसल पैदावार नहीं दे रही है, तो वह किसी कृषि विज्ञानी को बुलाता है. वे एक मशीन में मिट्टी का सैंपल लेते हैं और तुरंत पता चल जाता है कि, इसमें किस तत्व की कमी हो रही और उसकी पूर्ति के लिए उस तत्व की खाद खेत में डाली जा रही है. कुछ समय बाद फसल खेत में लहराती है.. ये सोच नहीं मध्य प्रदेश में भविष्य की खेती की प्लानिंग है जिस पर ग्वालियर में काम शुरू किया जा रहा है.
आईआईटी रोपड़ के साथ काम करेगा कृषि विश्वविद्यालय
मध्य प्रदेश का किसान भी अब हाईटेक होने जा रहा है, जिसे अब अपने मोबाइल फोन पर योजनाओं और व्यवस्थाओं के ओटीपी ही नहीं बल्की मौसम के परिवर्तन की वजह से फसलों के नुकसान की स्थिति का पूर्वानुमान और बचाव के उपाय भी मिलेंगे. एआई आधारित ऐसे ऐप और टूल मोबाइल में आयेंगे, जिनसे किसानों को फसल की सीधी जानकारी अपने मोबाइल पर लाइव मिलेगी. साथ ही साथ फसलों पर जलवायु परिवर्तन, इसके लिए पंजाब का आईआईटी रोपण और ग्वालियर का राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय साथ आए हैं.

खेती में एआई के इस्तेमाल पर फोकस
कृषि विश्विद्यालय के निदेशक (शिक्षण) डॉ प्रदीप कुमार से इस पूरे प्रोजेक्ट पर विस्तार से बातचीत हुई तो उन्होंने ईटीवी भारत को बताया, "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल खेती में कैसे किया जा सकता है, इसको लेकर आईआईटी रोपड़ रूपनगर के साथ एमओयू साइन हुआ है, आईआईटी रोपड़ की स्पेशल विंग अनाम जो भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय से वित्त पोषित है, वहां एआई पर ही काम कर रहे हैं. इसी क्रम में उनकी एक्सपर्टीज विश्वविद्यालय के इस प्रोजेक्ट में बहुत महत्वपूर्ण साबित होगी."
खुद किसान हल कर सकेंगे अपनी समस्याएं
डॉ प्रदीप कुमार के मुताबिक, "भविष्य की प्लानिंग इस प्रोजेक्ट में टेक्नोलॉजी से सीधे किसानों को जोड़ना भी है. जिसमें ऐसे मोबाइल ऐप्स डेवलप कराये जाएंगे जो किसान और कृषि आधारित होंगे. किसानों के मोबाइल फोन से सीधा जुड़कर फसलों की बीमारी और कमियों का उन एआई टूल्स और मॉड्यूल्स के जरिए खुद पता लगा सकें और उनका इस्तेमाल कर कमियां खुद से दूर कर सकें. इनमें किसानों के लिए ट्रेनिंग भी शामिल की जाएगी. इस पूरे प्रोजेक्ट का आधार रिसर्च के साथ किसान ही है और प्रयास है कि टेक्नोलॉजी का फायदा सीधा किसान को हो."

किसानों के लिये कैसे काम करेगा एआई?
डॉ प्रदीप कुमार का कहना है, "इस प्रोजेक्ट में ये प्रयास है कि, किसानों को सभी डेटा एआई ऐप के माध्यम से उनके मोबाइल फोन पर ही उपलब्ध कराया जाए. जिससे उन्हें पहले से खतरे की जानकारी होगी और उससे निपटने के लिए कदम उठा पाएंगे. भविष्य इसके लिए ऐसे मोबाइल ऐप्स डेवलप कराने की भी इस प्रोजेक्ट में प्लानिंग है जिससे किसान सीधा जुड़ सकेंगे."
खेती में एआई के लिए दोनों संस्थाओं में एमओयू साइन
ग्वालियर का राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय अब खेती और तकनीक के समागम के लिए एक और कदम बढ़ा रही है. इस बार तकनीक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) है. ये प्रयास खेती के पारंपरिक तरीके बनाए रखने के साथ साथ कृषि में बड़े बदलाव लाने में मददगार होगा. इसके लिए पंजाब के रूपनगर स्थित आईआईटी रोपण के साथ कृषि विश्वविद्यालय ने हाल ही में एक एमओयू साइन किया है. जिसके तहत विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों और छात्रों को शोध में एआई की मदद से अध्ययन के नए आयाम मिलेंगे.
अलग-अलग चरणों में होगा काम
ये नई व्यवस्था दूरगामी सोच के साथ बनाई जा रही है, जिसमें अलग-अलग चरणों में काम आगे बढ़ेगा. सबसे पहले चरण में मौसम के परिवर्तन से फसलों पर संभावित असर का पूर्वानुमान किसानों तक पहुंचने पर काम किया जाएगा. इसके बाद आने वाले चरणों में आईआईटी रोपड़ द्वारा ऐसे सॉफ्टवेयर ऐप और मशीनरी बनाई जाएंगी, जिनसे किसान सीधे जुड़ सकेंगे और खेती से संबंधित समस्याओं पर खुद आगे काम कर सकेंगे. वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को भी रिसर्च के नए तरीकों का अवसर मिलेगा.

मौसम के साथ मिलेगा फसल पर असर का पूर्वानुमान
शुरुआती चरण में आईआईटी रोपड़ और ग्वालियर राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के सभी कृषि विज्ञान केंद्र और महाविद्यालय में अपने मौसम केंद्र (वेदर स्टेशन) स्थापित करेगा जो उन्होंने खुद तैयार किए हैं. हर स्टेशन से मौसम से जुड़े आठ पैरामीटर रीडिंग हासिल करेंगे जिनका पूरा कंट्रोल आईआईटी रोपड़ और कृषि विश्वविद्यालय दोनों के पास होगा. इन पैरामीटर से एआई के माध्यम से पता लगाया जाएगा कि मौसम में किस पैरामीटर की वजह से गर्मी या अद्रता बढ़ रही है और इसका फसल पर क्या असर होगा.
एआई मॉड्यूल्स के जरिए किसानों को मिलेगा अलर्ट
विश्वविद्यालय के पास पूर्व से ही अलग अलग फसलों में कीट पतंगों, बीमारियों, जरूरत का डेटा उपलब्ध है, जिसे उनसे साझा किया जाएगा और दोनों संस्थाओं द्वारा बनाए जा रहे एआई आधारित मॉड्यूल्स के जरिए किसानों को पूर्वानुमान बताया जा सकेगा कि मौसम में बदलाव से फसल पर क्या दुष्प्रभाव पड़ेगा या फसलों में किन बीमारियों या कीट पतंगों के आने की संभावना है. जिससे किसानों को नुकसान होने से पहले ही अलर्ट किया जा सकेगा और इसके उपाय भी बताया जा सकेगा.
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एआई मशीनरी पैदा कराएगी अच्छी गुणवत्ता की फसल
अगले चरण में और आगे जाते हुए ये प्रोजेक्ट जमीन के नीचे काम करेगा, जिसका मतलब है मृदा या मिट्टी, कृषि की भूमि में कमियों का पता लगाना और उसे संतुलित रखना, इसके तहत एआई बेस्ड ऐसी मशनरी तैयार कराई जाएंगी. जिनसे मिट्टी की गुणवत्ता की जांच तुरंत हो सके और उसमें किन पोषक तत्वों की कमी हो रही है, इसका पता लगाया जा सके. इसके जरिए मिट्टी की कमियों को दूरकर मृदा स्वास्थ्य संतुलित रखा जा सकेगा और इसके परिणाम स्वरूप किसानों को स्वस्थ पोषक तत्वों से भरपूर और अच्छी पैदावार मिलेगी.

