दिल्ली में आज 20 मिनट दिखेगा चंद्र ग्रहण, जानें सूतक काल कब से लगेगा
छतरपुर मंदिर के समन्वयक एन के सेठी ने बताया कि ग्रहण का मंदिर पर कोई असर नहीं होगा.

Published : March 3, 2026 at 9:16 AM IST
|Updated : March 3, 2026 at 10:31 AM IST
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली समेत देश के विभिन्न हिस्सों में आज साल का महत्वपूर्ण चंद्र ग्रहण दिखाई देगा. खगोल शास्त्रियों और मौसम विभाग के अनुसार, दिल्लीवासियों को इस खगोलीय घटना का दीदार करने के लिए मात्र 20 से 22 मिनट का समय मिलेगा. ग्रहण का सूतक काल आज सुबह से ही शुरू हो गया है, जिसके चलते शहर के अधिकांश मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए हैं.
दिल्ली के संदर्भ में बात करें तो यहां चंद्रमा के उदय होने के समय ही ग्रहण अपने अंतिम चरण में होगा. शाम 6:26 बजे से लेकर 6:48 बजे के बीच दिल्लीवासी इस आंशिक दृश्यता का अनुभव कर सकेंगे. इस समय चंद्रमा क्षितिज के काफी करीब और नीचे होगा, जिसके कारण ऊंची इमारतों के बीच से इसे देखना कठिन हो सकता है. दिल्ली के प्रसिद्ध झंडेवालान, लक्ष्मी नारायण (बिड़ला मंदिर) और कालकाजी जैसे प्रमुख मंदिरों के कपाट सुबह की आरती के बाद ही बंद कर दिए गए हैं. अब ये मंदिर अगले दिन 4 मार्च को शुद्धिकरण के बाद ही खुले भारतीय समयानुसार, चंद्र ग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू होगा और शाम 6:46 बजे तक चलेगा. ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 27 मिनट की होगी.
ग्रहण से 9 घंटे पूर्व यानी सुबह 6:20 बजे से ही सूतक काल शुरू हो गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल में शुभ व मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं. दिल्ली के ज्यादातर मंदिरों में सुबह की आरती के बाद ही पट बंद कर दिए गए हैं, जो अब अगले दिन 4 मार्च को ही खुलेंगे. दिल्ली का प्रसिद्ध छतरपुर मंदिर उन चुनिंदा मंदिरों में शामिल है जो ग्रहण के दौरान भी खुला रहता है. मंदिर के समन्वयक एन के सेठी ने बताया कि ग्रहण का मंदिर पर कोई असर नहीं होगा और यहां बाबा नागपाल का 101वां जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा.
#WATCH दिल्ली | चंद्र ग्रहण से पहले श्री कालकाजी मंदिर में भक्तों ने पूजा-अर्चना की। pic.twitter.com/ju62dvT1qx
— ANI_HindiNews (@AHindinews) March 3, 2026
आईएमडी के मुताबिक, भारत के अधिकांश हिस्सों में यह ग्रहण अपनी अंतिम अवस्था में ही नजर आएगा. उत्तर-पूर्व भारत और अंडमान निकोबार द्वीप समूह में इसे सबसे स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा. दिल्ली में ऊंची इमारतों के कारण चंद्रमा की विजिबिलिटी प्रभावित हो सकती है, क्योंकि इस समय चांद काफी लो-एंगल पर रहेगा.
चंद्रमा लाल क्यों हो जाता है?
दरअसल, चंद्रमा के सामने जब पृथ्वी आती है, तो उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है. इस वजह से "ब्लड मून" दिखता है. इसकी लालिमा उस समय पृथ्वी के वायुमंडल की स्थिति पर निर्भर करती है. वायुमंडल में जितना अधिक धूल होगा, उतनी ही कम रोशनी निकल पाएगी, इससे चंद्रमा गहरा लाल दिखेगा. इसके ठीक उलट, अगर वायुमंडल में धूल भरा नहीं होगा, तो यह रोशनी को अधिक मात्रा में गुजरने देगा, इसलिए चंद्रमा नारंगी रंग का दिखाई देगा.
वायुमंडल से केवल लाल प्रकाश ही गुजर पाता है, क्योंकि नीला प्रकाश (जिसकी तरंगदैर्ध्य कम होती है) बिखर जाता है. इसे ‘रेले प्रकीर्णन’ कहा जाता है. यही वह प्रक्रिया है जिसके कारण आकाश नीला दिखाई देता है. नीला प्रकाश वायुमंडल से होकर चंद्रमा की ओर नहीं जाता, क्योंकि यह पूरे आकाश में बिखर जाता है. दिन के समय आकाश में हम कहीं भी देखें, हमारी नजर नीले प्रकाश की उन बिखरी हुई किरणों में से किसी एक पर जरूर पड़ेगी.
आकाशीय मिसअलाइमेंट
क्योंकि सूर्य के चारों ओर पृथ्वी की कक्षा के सापेक्ष चंद्रमा की कक्षा बहुत थोड़ी झुकी हुई है, इसलिए तीनों पिंड हमेशा पूरी तरह से एक सीध में नहीं आते जिससे हम पूर्ण चंद्र ग्रहण देख सकें. अगले छह चंद्र ग्रहणों के दौरान, चंद्रमा पृथ्वी की छाया में पूरी तरह से डूबने के बजाय केवल कुछ देर के लिए ही प्रवेश करेगा.
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