छत्तीसगढ़ में चंद्रग्रहण, ग्रहण काल के दौरान और बाद में क्या करें, जानिए
पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार छाया ग्रह राहु और केतु के प्रभाव से चंद्रमा और सूर्य ग्रहण लगता है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : March 3, 2026 at 3:28 PM IST
रायपुर: छत्तीसगढ़ के सभी मंदिरों में ग्रहण की वजह से मंदिरों के कपाट सुबह 6:20 पर बंद कर दिए गए. ग्रहण शाम 6: 47 पर समाप्त होगा. उसके बाद फिर से मंदिरों के कपाट खुल जाएंगे. मंदिरों के साथ ही घरों में होने वाला पूजा पाठ भी सुबह 6:20 के पहले पूरा कर लिया गया. शाम को 6: 47 के बाद फिर से मंदिर और घरों में पूजा पाठ शुरू होंगे.
ग्रहण काल के दौरान और बाद में क्या करें
फाल्गुन मास की आज पूर्णिमा तिथि पर साल 2026 का पहला और बड़ा चंद्र ग्रहण लगने वाला है. यह चंद्र ग्रहण लगभग 3 घंटे 27 मिनट तक का रहेगा. चंद्र ग्रहण दोपहर 3:21 से शुरू हो रहा है. ऐसे में शास्त्रों के नियम के मुताबिक चंद्र ग्रहण का सूतक चंद्र ग्रहण लगने से 9 घंटे पूर्व ही शुरू हो गया है. आज देश के सभी भागों में सुबह 6:21 से चंद्र ग्रहण का सूतक लागू हो गया है.
ज्योतिष एवं वास्तुविद पंडित प्रियाशरण त्रिपाठी की राय
चंद्रग्रहण में क्या करें या क्या ना करें इसको लेकर ज्योतिष एवं वास्तुविद पंडित प्रिया शरण त्रिपाठी ने बताया कि "अनावश्यक आवागमन ना करें. आवश्यक ना हो तो भोजन न करें. अनावश्यक चंद्रमा का दर्शन ना करें. या फिर खुली आंखों से चंद्रमा का दर्शन ना करें. सूतक के समाप्त होते ही स्नान करने के बाद मंदिर और देवालय के पट को खोल दें. इसके साथ ही तिल सोना लोहा रुई नमक सप्तधान्य और भूमि जैसी चीजों का दान करें या फिर तिल से भरे हुए कटोरा का दान करें."
ग्रहण काल के दौरान ध्यान रखने वाली बातें
- ग्रहण काल में स्पर्श के समय स्नान ग्रहण काल में मध्य समय में देव पूजन करना चाहिए.
- ग्रहण मोक्ष के समय में पितरों को श्रद्ध करना चाहिए.
- अन्न वस्त्र धन जैसी चीज़ अपनी क्षमता अनुसार दान करना चाहिए.
- ग्रहण जब पूर्ण रूप से समाप्त हो जाए. उसके बाद स्नान करके ग्रहण एवं सूतक काल से पहले ही दूध दही अचार चटनी कुशा रख देना श्रेष्ठ माना गया है.
- गर्भवती महिलाओं को चाहिए कि जिन चीजों को परहेज करना बताया गया है उन्हें त्यागकर धार्मिक ग्रंथ का पाठ करते हुए प्रसन्नचित रहे. ताकि भावी संतान स्वस्थ और सद्गुणी हो.
क्या है पौराणिक मान्यता और कथा
पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार छाया ग्रह राहु और केतु के प्रभाव से चंद्रमा और सूर्य ग्रहण लगता है. राहु और केतु को जब भी मौका मिलता है, वो चंद्रमा और सूर्य को ग्रहण कर लेते हैं. चंद्र ग्रहण पूर्णिमा तिथि पर और सूर्य ग्रहण अमावस्या तिथि पर लगता है.
चंद्र ग्रहण के बाद के उपाय
- चंद्र ग्रहण के बाद सबसे पहले खुद को पवित्र करें.
- स्नान करें और पहनने वाले वस्त्र पर गंगा जल छिड़ककर पवित्र करने के बाद पहनें.
- घर में गंगाजल का छिड़काव करें.
- किसी पात्र में गंगा जल लेकर कुशा से सभी जगहों पर जल छिड़के.
- कुशा ना मिले तो दूर्वा का प्रयोग कर सकते हैं.
- ग्रहण से पहले रखा हुआ जल फेंक दें.
- अगर जल अधिक मात्रा में है तो उसमें गंगा जल या तुलसी दल डाल दें.
- घर की साफ-सफाई के बाद मंदिर की सफाई करें और गंगा जल का छिड़काव कर देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को साफ करें.
ग्रहण काल के दौरान क्या करें
- चंद्र ग्रहण में स्तोत्र पाठ, मंत्र जाप और ध्यान आदि कार्य करना बेहद शुभ माना जाता है.
- चंद्र ग्रहण से पहले भोजन व दूध आदि चीजों में तुलसी दल डालना चाहिए.
- ग्रहण काल की अवधि के दौरान घर में ही रहने का प्रयास करना चाहिए.
- मान्यता है की चंद्र ग्रहण के दौरान पूजा घर के पर्दे व गेट को बंद करके रखना चाहिए.
सूतक काल के दौरान क्या न करें
- सूतक काल में नाखून और बाल नहीं कटवाना चाहिए.
- सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं. इसलिए मूर्ति स्पर्श करने से बचना चाहिए.
- ग्रहण के दौरान खाना-पीना, सोना और शरीर पर तेल से मालिश करना वर्जित होता है.
- सूतक काल में बच्चों, वृद्ध, रोगी एवं गर्भवती महिलाओं को भोजन या दवा लेने में कोई दोष नहीं है.
- सूतक से पहले ही दूध और दही, अचार, चटनी, मुरब्बा में कुशा रख देने से ये दूषित नहीं होते.
गर्भवती महिलाएं रखें ग्रहण में इन बातों का ख्याल
- ग्रहण काल में गर्भवती महिलाओं सुई, चाकू, कैंची आदि चीजों का प्रयोग न करें.
- चंद्रग्रहण की अवधि में भोजन पकाना वर्जित माना जाता है.
- गर्भवती महिलाओं को चंद्रग्रहण के दर्शन करने से बचना चाहिए.
- ग्रहण काल के दौरान कढ़ाई और सिलाई जैसे कार्यों से बचें.
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