धर्मांतरण और लव जिहाद मामला; महिला आयोग और KGMU प्रशासन आमने-सामने, ओपीडी बहिष्कार स्थगित
राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने कहा कि अगर विशाखा कमेटी ने ठीक से जांच की होती तो मामला इतना तूल नहीं पकड़ता.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : January 13, 2026 at 9:00 PM IST
लखनऊ: केजीएमयू धर्मांतरण और लव जिहाद के मामले में केजीएमयू और उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग अब आमने-सामने खड़ा हो गया है. शुक्रवार को जिस तरीके से महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव अचानक पहुंची थी और इसके बाद उनके समर्थकों ने हंगामा किया था. बाद में प्रशासन ने चौक थाना में अज्ञात के खिलाफ शिकायत की थी, लेकिन उसे पर कोई कार्रवाई नहीं हुई.
मुख्यमंत्री ने इंसाफ का आश्वासन दिया: इसी बात को लेकर केजीएमयू के डॉक्टर, कर्मचारी एवं नर्स समिति ने ओपीडी बंद करने का विचार बनाया. मंगलवार को ओपीडी स्थगित होने वाली थी, लेकिन अब इसे बुधवार तक के लिए टाल दिया गया है. इसके बाद मुख्यमंत्री की ओर से इन्हें आश्वासन दिया गया कि इन्हें इंसाफ मिलेगा. केजीएमयू धर्मांतरण एवं लव जिहाद के मामले में तीन स्तर पर जांच चल रही थी. इसमें पुलिस विभाग, उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग और केजीएमयू की विशाखा कमेटी जांच कर रही थी.

अपर्णा यादव के समर्थकों ने हंगामा किया था: शुक्रवार को उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव केजीएमयू कुलपति कार्यालय पहुंची थी, जहां उनके पहुंचने से पहले उनके समर्थक पहुंचे और उन्होंने जमकर हंगामा किया था. कुलपति के न रहने के बावजूद भी ब्राउन हाल में उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. प्रदर्शन के दौरान उनके समर्थकों ने सरकारी चीजों का नुकसान भी किया था. इसी बात को लेकर के केजीएमयू के चिकित्सकों में अब आक्रोश देखा जा रहा है.
ठाकुरगंज से डॉ. रमीज को गिरफ्तार: शुक्रवार के दिन ही ठाकुरगंज से पुलिस ने 25 हजार के इनामी डॉ. रमीज को गिरफ्तार कर लिया था. डॉ. रमीज के गिरफ्तार के बाद पुलिस ने उनसे पूछताछ शुरू कर दी है. इससे पहले बीते बुधवार को डॉ. रमीज के माता-पिता दोनों को पुलिस कस्टडी में लिया गया था और उनसे पूछताछ जारी थी. इसके बाद ही डॉ. रमीज को पुलिस ने गिरफ्तार किया. बता दे कि शुक्रवार के दिन ही केजीएमयू में या घटना हुई थी और शुक्रवार को ही डॉक्टर रमीज की गिरफ्तारी हुई थी.
मामले की एसटीएफ करेगी जांच: अब स्थिति यह है कि उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग और केजीएमयू प्रशासन आमने-सामने आ गया है. शुक्रवार को दोषी डॉ. रमीज को गिरफ्तार किया गया था. अब वह पुलिस की कस्टडी में है. पुलिस उसे पूछताछ कर रही है, हालांकि, अब इस पूरे मामले की जांच एसटीएफ करेंगी. इस मामले को एसटीएफ के हाथों सौंप दिया गया है. केजीएमयू में जिस तरीके से बीते शुक्रवार को हंगामा हुआ था.

सीएम योगी से मिला उपाध्यक्ष अपर्णा यादव: उसके बाद महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी दी थी. उन्होंने उनसे मुलाकात कर केजीएमयू में चल रहे धर्मांतरण मामले को लेकर सीएम योगी को अवगत कराया था. केजीएमयू कुलपति प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद ने बीते शनिवार को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात कर उन्हें इस मामले की जानकारी दी थी. अब इस पूरे मामले पर महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव का कहना था कि ऐसा नहीं है कि कुलपति को मेरे पहुंचने की सूचना नहीं थी.
विशाखा कमेटी की जांच पर लेकर उठे सवाल: अपर्णा यादव ने कहा कि पहले जब इनसे बात हुई थी तो मैंने कहा था कि मैं किसी दिन आऊंगी. और उसी के दो दिन बाद में केजीएमयू कुलपति कार्यालय पहुंची थी और मैं वहां उनसे बात करने के लिए गई थी, लेकिन उन्होंने मुलाकात न करके गलती की जो बात आपसे सामंजस्य से की जा सकती थी अब ऐसा नहीं हो सकता है.
केजीएमयू पर लापरवाही का आरोप: अपर्णा यादव ने बताया कि लव जिहाद का मामला इतना तूल नहीं पकड़ता अगर समय रहते विशाखा कमेटी ने सही से जांच की होती. केजीएमयू प्रशासन ने महिला को डराया, धमकाया और मामले को दबाने की पूरी कोशिश की. केजीएमयू की लापरवाही के वजह से आज महिला डॉक्टर को इतना सहना पड़ा.
मेडिकल कॉलेज में राजनीति नहीं होनी चाहिए: केजीएमयू कुलपति प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद ने कहा कि महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव बीते शुक्रवार को पहुंचने वाली है. इसके बारे में पहले से हमें कोई सूचना नहीं थी, उनके समर्थक पहले वहां प्रदर्शन करने लगे. एक मेडिकल कॉलेज में इस तरह की की गतिविधियां नहीं होनी चाहिए.
केजीएमयू कुलपति अपर्णा यादव से क्यों नहीं मिलीं: उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने कहा कि उपाध्यक्ष अपर्णा यादव बात की नहीं गई. यह कोई तर्क नहीं है. अपर्णा यादव महिला आयोग की उपाध्यक्ष है. महिला आयोग को यह हक है कि वह कहीं भी औचक निरीक्षण कर सकता है. अगर अपर्णा यादव वहां पहुंच गई थी, तो केजीएमयू कुलपति को उनसे मुलाकात कर लेनी चाहिए थी, उन्हें 10 मिनट तक दरवाजे पर नहीं रुकना चाहिए था. उनसे मुलाकात नहीं करना. उनके पद का सम्मान नहीं करने के बराबर है. उन्हें शांतिपूर्वक उनसे मुलाकात करके बातचीत कर लेनी चाहिए थी.
उपद्रवियों के खिलाफ कार्रवाी की मांग: सोमवार को केजीएमयू में इस बात का हल्ला हो गया कि ओपीडी का संचालन मंगलवार को नहीं होगा. हालांकि इस मामले में सच्चाई नहीं थी कि केजीएमयू प्रशासन ने प्रेस रिलीज जारी कर बताया कि अगर 72 घंटे के भीतर बीते शुक्रवार को जिन लोगों ने उपद्रव किया. उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं होता है, तो केजीएमयू के चिकित्सक, कर्मचारी व नर्स ओपीडी का संचालन नहीं करेंगे.
सीएम योगी ने कहा- दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी: सोमवार को यह रिलीज जब मीडिया के सामने आए तो देखते-देखते यह तेजी से वायरल हो गई. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह आश्वासन दिया कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. इसके बाद चिकित्सकों ने दोबारा समिति की बैठक आयोजित करने का फैसला लिया तब तक बुधवार तक के लिए कार्य बहिष्कार पर रोक लग गई है.
केजीएमयू से एमडी पैथालॉजी की पढ़ाई कर रही पीड़ित: पीड़ित महिला डॉक्टर केजीएमयू से एमडी पैथालॉजी की पढ़ाई कर रही है. 17 दिसंबर को उसने दवा की ओवरडोज लेकर सुसाइड की कोशिश की. उसे गंभीर हालत में केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था. 19 दिसंबर को उसे डिस्चार्ज किया गया था. तब पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया कि केजीएमयू से एमडी पैथालॉजी की पढ़ाई कर रहे डॉ. रमीज ने बेटी को लव जिहाद में फंसाया.
महिला आयोग ने कार्रवाई का आश्वासन दिया: पिता का आरोप है कि डॉ. रमीज ने उस पर शादी करने के लिए इस्लाम धर्म अपनाने का दबाव बनाया. जबकि, वह पहले से शादीशुदा है. फरवरी में वह हिंदू लड़की का धर्मांतरण कराकर उससे शादी कर चुका है. मुख्यमंत्री और राज्य महिला आयोग में शिकायत की पीड़ित के पिता ने मामले की राज्य महिला आयोग और मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत की थी. इसके बाद 22 दिसंबर को राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने पीड़ित के साथ प्रेस वार्ता करके कार्रवाई का आश्वासन दिया.
ओपीडी बहिष्कार हुआ स्थगित: केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि शिक्षक संघ कर्मचारी परिषद एवं एवं नर्सिंग परिषद के द्वारा बुधवार को होने वाले ओपीडी कार्य बहिष्कार को स्थगित कर दिया गया है. मंगलवार शाम 7:30 बजे हुई शिक्षक संघ, कर्मचारी परिषद और नर्सिंग परिषद की मीटिंग में सभी बातों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं इस मामले को गंभीर बताई और आश्वासन दिया कि मामले की जांच की जाएगी.
वहीं, चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री ने भी आश्वासन दिया है. इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए कार्य बहिष्कार का निर्णय स्थगित कर दिया गया है. बुधवार को सुबह जिस समय ओपीडी संचालित होती है, वह अपने निर्धारित समय पर संचालित होगी.
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