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पेस्टिसाइड मुक्त आम; अंतरराष्ट्रीय बाजार में खूब है मांग, जानें क्या कह रहे बागवान

लखनऊ फलपट्टी क्षेत्र के बागवान नीम के तेल समेत कई प्राकृतिक वनस्पतियों का इस्तेमाल आम के पेड़ों पर कर रहे हैं.

अब होगी पेस्टिसाइड मुक्त आम की पैदावार.
अब होगी पेस्टिसाइड मुक्त आम की पैदावार. (Photo Credit : ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : March 4, 2026 at 8:40 AM IST

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लखनऊ : आम के बागों में इस बार अच्छा बौर आया है. बागवान अच्छी पैदावार को लेकर फिक्रमंद हैं. ऐसे में आम के फूलों (बौर) के बचाव के लिए तरह-तरह की दवाइयों का छिड़काव कर रहे हैं. हालांकि, इस साल कुछ बागवान का फोकस बिना पेस्टिसाइड प्रयोग के आम उत्पादन पर है. ऐसे में कई किसान विशेषज्ञों की राय लेकर नीम का तेल. चूना पानी आदि का छिड़काव पेड़ों पर कर रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि कम या बिना पेस्टिसाइड के उगाए गए आम की बाजार में बेहतर कीमत मिलती है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी ऐसे आम की मांग अधिक है.

पेस्टिसाइड मुक्त आम उत्पादन की तैयारी.
पेस्टिसाइड मुक्त आम उत्पादन की तैयारी. (Photo Credit : ETV Bharat)

अवध आम उत्पादक एवं बागवानी समिति के महासचिव उपेंद्र सिंह का कहना है कि बिना पेस्टिसाइड के आम की बागवानी करना आसान नहीं है. दो वर्ष पहले नीम के तेल का छिड़काव किया था. जिससे लगभग 15 दिनों तक कीड़ों से राहत मिली थी. इसके बाद कीड़ों का प्रकोप फिर शुरू हो गया. इसके चलते करीब चार से पांच बार छिड़काव करना पड़ा. बौर में लगने वाले फंगस के लिए अभी तक कोई प्रभावी घरेलू उपाय उपलब्ध नहीं मिला है.

पेस्टिसाइड मुक्त आम उत्पादन की तैयारी.
पेस्टिसाइड मुक्त आम उत्पादन की तैयारी. (Photo Credit : ETV Bharat)

उपेंद्र सिंह का कहना है कि यदि सरकार ऐसी कोई प्राकृतिक दवा उपलब्ध करा दे, जिसमें कीट और फंगस दोनों को नियंत्रित करने की क्षमता हो तो चार-चार बार छिड़काव की आवश्यकता कम होकर एक या दो बार तक सिमट सकती है. इससे मजदूरी और लागत दोनों में कमी आएगी. बहरहाल सरकार आम बागवानों को खास तवज्जो नहीं दे रही है. जिसके कारण किसान अपनी समझ से दवाओं का उपयोग करते हैं.

पेस्टिसाइड मुक्त आम उत्पादन की तैयारी.
पेस्टिसाइड मुक्त आम उत्पादन की तैयारी. (Photo Credit : ETV Bharat)



उपेंद्र सिंह के अनुसार यदि सरकार चाहती है कि किसान पेस्टिसाइड का उपयोग न करें तो पहले सरकारी बागों में इसका उदाहरण प्रयोग सुनिश्चित करना होगा. इस फसली सीजन में सरकारी बागों में अब तक चार बार पेस्टिसाइड का छिड़काव किया जा चुका है. जबकि निजी बागों में औसतन दो बार ही छिड़काव हुआ है. पेस्टिसाइड का समय पर छिड़काव न किया जाए तो फसल खराब होने का खतरा बढ़ जाता है. फंगस लगने पर बौर झड़ जाते हैं और पैदावार प्रभावित होती है. नीम के तेल या अन्य घरेलू उपाय सीमित प्रभाव वाले होते हैं. इसलिए किसान मजबूरी में रासायनिक दवाओं का सहारा लेना पड़ता है.



उपेंद्र सिंह के अनुसार पिछले साल जिन पेड़ों पर बौर आया था, इस बार उन पर दोबारा अच्छी मात्रा में बौर दिखाई दे रहा है. जिससे करीब 20 प्रतिशत तक उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है. हालांकि, पैदावार बढ़ने से बाजार में कीमतों पर दबाव पड़ सकता है. पिछले वर्ष जिन बागवानों ने ‘बैंगिंग’ की थी. इससे उन्हें बेहतर दाम मिले थे. इस बार उत्पादन अधिक होने की स्थिति में अधिकतर बागवान बैंगिंग का विकल्प अपना सकते हैं.


उपेंद्र सिंह के मुताबिक खाड़ी देशों में अवध के आम (दशहरी आदि) की अच्छी मांग रहती थी. सऊदी अरब, यूएई, कतर, ओमान और जैसे देशों में आसान मानकों के कारण बड़े पैमाने पर आम निर्यात किया जाता है. हालांकि मौजूदा समय युद्ध जैसे हालातों के कारण इस वर्ष निर्यात की संभावनाएं कमजोर दिखाई दे रही हैं. बहरहाल अगले तीन-चार महीनों में परिस्थितियां क्या रूप लेंगी, यह आने वाला समय ही बताएगा.

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