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लखनऊ साइबर फ्रॉड केस; पुलिस के लिए पहेली बना 'चार्ल्स', हवाला के जरिए पैसे का लेन-देन

जांच में हवाला नेटवर्क का भी बड़ा खुलासा हुआ है. लेनदेन में कोलकाता निवासी रिंकी दास की भूमिका सामने आई है.

लखनऊ साइबर फ्रॉड केस.
लखनऊ साइबर फ्रॉड केस. (Photo Credit: ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : July 9, 2026 at 1:23 PM IST

3 Min Read
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लखनऊ: गोमती नगर की समिट बिल्डिंग में चल रहे अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के अड्डे का खुलासा होने के बाद अब लखनऊ पुलिस उन लोगों की पहचान करने में लगी है, जो अमेरिका में बैठकर पूरे नेटवर्क को चला रहे थे. इसके लिए भारतीय दूतावास के माध्यम से भी जानकारी जुटाने के प्रयास हो रहे हैं.

कौन है चार्ल्स: लखनऊ पुलिस की जांच के दौरान सामने एक नया नाम भी आया है. यह नाम है 'चार्ल्स'. गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि सिंडीकेट में काम करने वाले लोग व्हाट्सएप के जरिए चार्ल्स नाम के एक व्यक्ति के संपर्क में रहते थे. हालांकि, किसी को उसका पूरा नाम, पता या असली पहचान नहीं मालूम है. सभी लोग उसे सिर्फ चार्ल्स के नाम से जानते थे.

अब लखनऊ पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर चार्ल्स है कौन? किस देश में है और इस साइबर ठगी के नेटवर्क में उसकी क्या भूमिका है? फिलहाल चार्ल्स की असली पहचान तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है.

एडीसीपी क्राइम किरण यादव ने बताया कि अमेरिका में बैठे नेटवर्क के सदस्यों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है. इसके लिए जरूरी कानूनी और कूटनीतिक प्रक्रिया अपनाई जा रही है, ताकि वहां मौजूद आरोपियों की जानकारी जुटाई जा सके.

कौन है सिंडीकेट का मास्टरमाइंड: बताते चलें कि कुछ दिन पहले लखनऊ पुलिस ने समिट बिल्डिंग में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारकर 119 लोगों को गिरफ्तार किया था. जांच आगे बढ़ी तो इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड गुजरात के अहमदाबाद निवासी रियल एस्टेट कारोबारी विनीत धर्मेंद्र वशिष्ठ निकला.

पुलिस के मुताबिक, विनीत ने ही अपने खर्च पर पूरा कॉल सेंटर तैयार कराया था. वह अहमदाबाद में तीन रियल एस्टेट कंपनियां चलाता है और उसके खिलाफ वहां भी साइबर अपराध के मामले दर्ज हैं.

नायकर के नाम था किरायनामा: जांच में यह भी सामने आया कि समिट बिल्डिंग में दफ्तर आरोपी नायकर जयराम के नाम पर किराए पर लिया गया था. बिल्डिंग का हर महीने करीब दो लाख रुपए किराया दिया जाता था. जयराम सिर्फ अपना नाम इस्तेमाल करने के बदले हर महीने 50 हजार रुपए अलग से लेता था और यह रकम उसे विनीत देता था.

हवाला से आता था पैसा: पुलिस की जांच में हवाला नेटवर्क का भी बड़ा खुलासा हुआ है. आरोप है कि अमेरिका में बैठे जालसाज ठगी से जुटाई गई रकम अलग-अलग तरीकों से भारत भेजते थे. इस लेनदेन में कोलकाता निवासी रिंकी दास की भूमिका सामने आई है.

पुलिस के मुताबिक, रिंकी दास हवाला के जरिए आई रकम को अलग-अलग माध्यमों से खपाने का काम करती थी. पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि अगर अमेरिका में किसी व्यक्ति से कम रकम की ठगी होती थी, तो उससे गिफ्ट कार्ड और डिजिटल वाउचर खरीदवाए जाते थे.

वहीं, बड़ी रकम होने पर पीड़ितों से सोना खरीदवाया जाता था या फिर पैसे को क्रिप्टो करेंसी में बदल दिया जाता था. कुछ मामलों में नकद लेनदेन की जानकारी भी सामने आई है. पुलिस अब पूरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है.

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