जज्बा कमाल का: बाबा-नानी की म्यूजिक क्लासरूम, कोई डॉक्टर तो कोई डायरेक्टर, चिकरी-चिकरी से लेकर ताक धिना धिन धा में मास्टरी की होड़
लखनऊ के भारतखंडे विश्वविद्यालय में बुजुर्ग स्टूडेंट कई विधाओं में कर रहे डिग्री और डिप्लोमा, रिटायरमेंट के बाद शौक को पूरा करने में जुटे.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : November 15, 2025 at 10:31 AM IST
|Updated : November 16, 2025 at 7:58 AM IST
लखनऊ: 'हम बुजुर्ग हो गए हैं, हम अब कर ही क्या सकते हैं?. अब क्या शौक पूरे करेंगे? हमारी उम्र निकल गई है...' अक्सर बुजुर्गों को आपने इस तरह की बातें करते हुआ सुना होगा. ऐसे नाउम्मीदी के अंधेरे से लखनऊ के कुछ बुजुर्ग बाहर निकल रहे हैं. इन बुजुर्गों ने रिटायरमेंट के बाद फिर मोर्चा संभाला है. अपने शानदार जज्बे की बदौलत अब ये अपने शौक को पूरा करने में जुट गए हैं. इनका शौक है म्यूजिक सीखना. इनमें से कोई बाबा बन चुका है तो कोई नानी लेकिन म्यूजिक की क्लास में इनका जज्बा अभी भी बच्चों जैसा नजर आता है. चलिए आपको ले चलते हैं लखनऊ के भारतखंडे संगीत विश्वविद्यालय में. यहां आपको ऐसे ही बुजुर्गों से रूबरू कराएंगे.
बुजुर्गों की क्लास में बस म्यूजिक: लखनऊ के भारतखंडे संगीत विवि में इन दिनों कई कक्षाओं में आपको बुजुर्ग वाद्ययंत्र और संगीत सीखते मिल जाएंगे. इनमें से ज्यादातर की उम्र 60 से 85 साल के बीच है. कई स्टूडेंट 80 साल से अधिक हैं. इस विश्वविद्यालय में ऐसे करीब 100 बुजुर्ग संगीत की शिक्षा ले रहे हैं. कोई तबला सीख रहा है तो कोई हरमोनियम. कोई गायन सीख रहा है तो कोई और किसी संगीत विधा को तल्लीनता से सीखने में जुटा हुआ है. जब संगीत की इन कक्षाओं में आप पहुंचेंगे तो आपको ये बुजुर्ग स्टूडेंट म्यूजिक सीखने में तल्लीनता से डूबे नजर आएंगे. सीखने का जज्बा इस कदर कि अगल-बगल क्या चल रहा है वह भी इनको नजर नहीं आता है. किसी मेधावी स्टूडेंट की तरह इनकी तल्लीनता वाकई होनहार स्टूडेंट को भी मात दे रही है. सबसे बड़ी बात इन बुजुर्गों के टीचर 35-40 उम्र के हैं. यह नजारा देखकर कोई भी हैरत में पड़ जाए.
80 साल में हरमोनियम सीख रहे: भातखंडे में हारमोनियम सीख रहे 80 वर्षीय छात्र अरविंद गुप्ता बताते हैं कि वे फूड सेफ्टी विभाग में कोलकाता और मुंबई में नौकरी कर चुके हैं. पत्नी के देहांत के बाद अकेलापन बढ़ गया था. वह कहते हैं कि संगीत मेरा सहारा बना. मैंने जीना इसी से सीखा. 80 की उम्र में भी मैं क्लास में जाता हूं तो अपने आपको 22 साल का महसूस करता हूं. वह मुस्कुराते हुए कहते हैं कि जब मेरे गुरु किसी को डांटते हैं तो उनकी तरफ इशारा भर कर देते हैं और वे तुरंत सीख जाते हैं कि अब ऐसी गलती नहीं करनी है.

डॉक्टर साहब भी हरमोनियम स्टूडेंट: डॉक्टर नवीन मल्होत्रा (55) बताते हैं कि वह होम्योपैथिक डॉक्टर हैं. अक्सर वह मरीजों के बीच रहते हैं. अति व्यस्त जीवन में वह संगीत का अपना शौक पूरा नहीं कर पाए थे. इसकी टीस हमेशा मन में रहती थी. तय किया कि कुछ भी हो जाए शौक जरूर पूरा करूंगा. मैं संगीत थेरेपी का पक्षधर भी हूं. यह तन और मन दोनों की दवा है. अपने शौक को पूरा करने के लिए उन्होंने यहां हरमोनियम सीखना शुरू किया है. वह अपने मरीजों को भी संगीत अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं.

60 साल की उम्र में संभाली बांसुरी: राजेश गौतम 60 साल के हैं. बचपन से ही उन्हें बांसुरी का शौक था. वह विश्वविद्यालय में पांच महीनों से बांसुरी सीख रहे हैं. वह कहते हैं कि अब वक्त मिला, तो बचपन का शौक वापस जगा. नौकरी, परिवार, जिम्मेदारियों ने सब छीन लिया. अब तो अपना शौक हर हाल में पूरा करना है. बांसुरी ने मेरी भीतर नई ऊर्जा भर दी है. मैं यहां सीखने के साथ ही घर पर भी जब मौका मिलता है तो बांसुरी लेकर अभ्यास करने में जुट जाता हूं. मैं जब बांसुरी बजाता हूं तो उसकी सुर लहरियों में मेरा मन और तन खो जाता है.

सरकारी नौकरी ने छीना संगीत, फिर लिया दाखिला: पूर्व प्रोफेसर डॉ. राजेश कुमार तिवारी (65) बताते हैं कि उन्हें संगीत बहुत पसंद है. अपनी युवा अवस्था में 1988 में भातखंडे में नामांकन कराया था. सरकारी नौकरी लग गई तो परिवार के पालन पोषण के लिए म्यूजिक को छोड़ना पड़ा. इस बात का दर्द हमेशा रहता था कि शौक पूरा नहीं कर पाया. अब रिटायरमेंट हो गया है. लगा कि भगवान ने फिर मौका दिया है इस वजह से फिर जुट गया संगीत सीखने में. अब रिटायरमेंट के बाद वापस वही सपना पूरा कर रहा हूं. मेरा उद्देश्य सिर्फ मन की शांति है. संगीत ने मेरा जीवन बदल दिया है.

पूर्व डायरेक्टर सीख रहीं सरोद: भारतखंडे विश्वविद्यालय में सरोद सीख रहीं डॉक्टर लेली सिंह (66) सरकारी विभाग में डायरेक्टर रह चुकी है. वह रिटायरमेंट के बाद अब यहां सरोद सीख रहीं हैं. उन्होंने बताया कि वह ऐसा वाद्य सीखना चाहती थी जिसमें दिमाग, जुबान, उंगलियां सब एक साथ काम करें.इससे शरीर सक्रिय रहता है और दिमाग भी तेज होता है. जब मैं युवा थी तब मुझे संगीत सीखने की चाहत थी. घर वालों ने इस ख्वाहिश को पूरा नहीं होने दिया अब उम्र के इस पड़ाव में मैंने फिर से संगीत सीखने की शुरुआत की है. पूरे जुनून और जब्बे के साथ सरोद सीख रही हूं. परिवार ने जब सुना कि वे फिर से क्लास में जाएंगी तो घर में उत्साह का माहौल बन गया. घरवालों का साथ मिला है. अब सरोद सीखकर ही मानूंगी.

बुजुर्गों के मास्टर 35 साल के: 60 से 85 साल तक के बुजुर्गों को सिखाने वाले शिक्षक डॉ. दिनकर 35 साल के हैं. जब उनसे पूछा गया कि वह बुजुर्ग स्टूडेंट को सिखाते हुए असहज तो नहीं होते तो उन्होंने जवाब दिया कि इन सभी का जज्बा और ललक इतनी शानदार है कि न तो मुझे सिखाने में कोई दिक्कत आती है और न ही उन्हें सीखने में कोई परेशानी. दिनकर भी अपने बुजुर्ग स्टूडेंट की तारीफ करते हुए थकते नहीं हैं. रिटायरमेंट के बाद इन बुजुर्गों का ऐसा जज्बा काबिले तारीफ है.

विश्वविद्यालय में कैसे लें दाखिला: अगर आप बुजुर्ग हैं और आपका शौक भी म्यूजिक है और आप भी इन बुजुर्गों की तरह सीखना चाहते हैं तो आप लखनऊ के भातखंडे विश्वविद्यालय से संपर्क कर सकते हैं. यहां दाखिले के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं है यह तो आप इस खबर के जरिए जान चुके होंगे. रही बात योग्यता की तो विवि के कुछ मानक है जिनके बारे में आप जानकारी विवि की वेबसाइट www.bhatkhandeuniversity.ac.in के जरिए जानकारी जुटा सकते हैं. यहां आप गिटार, सितार, तबला, हरमोनियम, सरोद, गायन समेत कई विधाओं में दाखिला ले सकते हैं. हर कोर्स की अवधि और फीस अलग-अलग है. इसके बारे में पूरी जानकारी आपको विवि की वेबसाइट या फिर संस्थान में मिल जाएगी. एडमिशन प्रक्रिया में फॉर्म भर कर लिखित और मौखिक परीक्षा देना पड़ती है. इसके बाद विवि शार्टलिस्ट करके दाखिला दे देता है.
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