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अयोध्या DM पर हाईकोर्ट ने लगाया जुर्माना, फरवरी तक का अल्टीमेटम

कीमती जमीन के मामले में चलताऊ रवैये पर कोर्ट सख्त, नगर पंचायत गोसाईगंज को भी फटकार.

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​अयोध्या की बेशकीमती जमीन और तालाब पर कब्जे का है मामला. (Photo Credit; ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : January 10, 2026 at 6:55 PM IST

3 Min Read
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लखनऊ: ​इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अयोध्या के जिला प्रशासन और नगर पंचायत गोसाईगंज की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है. कोर्ट के आदेशों की अनदेखी और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति लापरवाही बरतने के लिए जिलाधिकारी अयोध्या पर 7700 रुपये और नगर पंचायत गोसाईगंज पर 5500 रुपये का हर्जाना लगाया गया है. न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति ए.के चौधरी की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया.

ये है पूरा मामला: ​अयोध्या के गोसाईगंज नगर पंचायत की एक बेशकीमती जमीन से यह मामला जुड़ा है. याचिकाकर्ता का आरोप है कि सरकारी दस्तावेजों में जो भूमि तालाब के रूप में दर्ज है, उस पर भू-माफियाओं ने अवैध निर्माण कर लिया है. याचिका में सुप्रीम कोर्ट के उन निर्देशों का हवाला दिया गया है, जिसके अनुसार सार्वजनिक उपयोग की भूमि और तालाबों का स्वरूप नहीं बदला जा सकता और उन पर निर्माण पूरी तरह अवैध है.

कोर्ट की नाराजगी की वजह: ​सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रशासन के विरोधाभासी दावों और सुस्ती पर गंभीर सवाल उठाए. कोर्ट ने जिलाधिकारी को विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया. कोर्ट ने इसे न्यायिक प्रक्रिया में बाधा माना. नगर पंचायत ने हलफनामा तो दिया, लेकिन उसमें कोई पुख्ता सबूत या सहायक दस्तावेज नहीं थे. कोर्ट ने इसे चलताऊ रवैया बताते हुए समय की बर्बादी करार दिया. सरकारी पक्ष का दावा है कि जमीन नॉन जेडए है और तालाब नहीं है, जबकि याचिकाकर्ता इसे राजस्व रिकॉर्ड में तालाब बता रहे हैं.

बता दें कि जिस जमीन पर यह कानून लागू हुआ, वह 'जेडए' लैंड कहलाती है. इसमें जमीन का मालिकाना हक सरकार के पास होता है और किसान भूमिधर के रूप में खेती करते हैं. उत्तर प्रदेश के कुछ खास इलाके (जैसे कुछ शहरी क्षेत्र, कैंटोनमेंट बोर्ड, या पुराने विशेष क्षेत्रों की जमीनें) जहां यह जमींदारी विनाश कानून लागू नहीं हुआ, उन्हें 'नॉन जेडए' कहा जाता है.

​फरवरी तक का अल्टीमेटम: ​हाईकोर्ट ने इस लापरवाह रवैये को न्याय के मार्ग में रोड़ा माना है. कोर्ट ने साफ संदेश दिया है कि अदालती आदेशों को हल्के में नहीं लिया जा सकता. जिलाधिकारी को फरवरी के दूसरे सप्ताह तक हर हाल में स्पष्ट जवाब दाखिल करने का अंतिम मौका दिया गया है. अयोध्या जैसे वीआईपी जिले के डीएम पर हर्जाना लगने से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है. न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति ए.के चौधरी की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान ये आदेश दिया. ​अयोध्या की बेशकीमती जमीन और तालाब पर कब्जे के मामले में हाईकोर्ट ने डीएम अयोध्या और नगर पंचायत गोसाईगंज पर आर्थिक दंड लगाया है. कोर्ट ने प्रशासन को आदेश दिया है कि वे फरवरी तक स्पष्ट करें कि विवादित जमीन तालाब है या नहीं.

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