ETV Bharat / state

बांध में मिली गुम हुई स्वर्ण हाथी की मूर्ति, सिंघोर गांव में उमड़ा जनसैलाब

सोनहत विकासखंड के सिंघोर गांव में 70 साल पहले गुम हुई स्वर्ण हाथी की मूर्ति टेडिया बांध में मिली है.जिसे लेकर लोगों में कौतूहल है.

LOST STATUE OF GOLDEN ELEPHANT
बांध में मिली गुम हुई स्वर्ण हाथी की मूर्ति (Etv Bharat)
author img

By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : February 24, 2026 at 2:17 PM IST

3 Min Read
Choose ETV Bharat

कोरिया : कोरिया जिला के सोनहत विकासखंड अंतर्गत सिंघोर ग्राम पंचायत में श्रद्धा उमड़ पड़ी है. यहां पिछले 70 साल पहले गुम हुई हाथी की मूर्ति तालाब में मिली है. बताया जा रहा है कि टेडिया बांध से देर रात यह मूर्ति निकाली गई. सूचना फैलते ही गांव में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. आसपास के गांवों से भी श्रद्धालु मूर्ति के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए प्रशासन ने एहतियातन फोटो और वीडियो बनाने पर रोक लगा दी है.

लोकमान्यता और इतिहास की परतें

ग्रामीणों के अनुसार यह मूर्ति ‘बालम राजा’ के समय से स्थापित मानी जाती है. स्थानीय परंपरा में इसे ग्राम देवता के रूप में पूजा जाता रहा है. संतोष कुमार सिंह (गंवाटिया) बताते हैं कि उनके पूर्वजों से सुनते आए हैं कि यह मूर्ति गणेश स्वरूप मानी जाती है. राजा चंडोल देवता का इस मूर्ति में वास माना जाता था.

बांध में मिली गुम हुई स्वर्ण हाथी की मूर्ति (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

दशकों पहले यह मूर्ति जंगल स्थित एक देवस्थल से रहस्यमय तरीके से गायब हो गई थी. तब से ग्रामीण अप्रत्यक्ष रूप से इसकी पूजा करते रहे. नवरात्र के दौरान विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान के माध्यम से इसकी खोज की कामना की जाती रही- संतोष कुमार सिंह, स्थानीय

Lost statue of golden elephant
दशकों बाद ‘स्वर्ण हाथी’ की वापसी (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

नवरात्रि के दौरान किए गए अनुष्ठान और कथित “सपनों के संकेत” के आधार पर तालाब में खोजबीन की गई. लगभग 15–16 फीट गहराई में डुबकी लगाकर मूर्ति को बाहर निकाला गया. फिलहाल इसे ग्राम देव स्थल पर सुरक्षित रखा गया है-जगदेव सिंह,सरपंच

नवरात्र और ‘सपनों’ की कहानी

सहायक आरक्षक समय लाल का कहना है कि पिछले कई वर्षों से उन्हें नवरात्र के दौरान इस मूर्ति के बारे में संकेत मिलते रहे. गांव में कई लोग उन्हें लेकर तरह-तरह की बातें करते थे, लेकिन उनका विश्वास बना रहा. उनके अनुसार लगातार खोज और पूजा-अर्चना के बाद आखिरकार तालाब से वही मूर्ति मिलने की बात सामने आई है. हालांकि वे स्वयं भी मानते हैं कि मूर्ति की वास्तविकता और धातु की पुष्टि जांच के बाद ही संभव होगी.

Lost statue of golden elephant
सिंघोर में उमड़ा आस्था का सैलाब (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

प्रशासन सतर्क, जांच की तैयारी

घटना की सूचना मिलते ही तहसीलदार सोनहत मौके पर पहुंचे. उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत की और उस पुराने देवस्थल का भी निरीक्षण किया, जहां से मूर्ति के वर्षों पहले गायब होने की बात कही जाती है.

प्रथम दृष्टया इसे स्वर्ण (सोने) की मूर्ति बताया जा रहा है, लेकिन आधिकारिक पुष्टि वैल्यूएशन और विशेषज्ञ जांच के बाद ही होगी. प्रशासन का कहना है कि अभी पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं- तहसीलदार सोनहत



आस्था बनाम वास्तविकता

सिंघोर गांव में हाथी की पूजा की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है.ग्रामीणों की मान्यता है कि आसपास के गांवों में हाथियों का दल नुकसान पहुंचाता रहा है, लेकिन सिंघोर को कभी हानि नहीं हुई. इसे लोग ग्राम देवता की कृपा से जोड़ते हैं. मूर्ति मिलने की घटना ने जहां आस्था को नई ऊर्जा दी है, वहीं प्रशासन और विशेषज्ञों के लिए यह जांच का विषय बन गया है. क्या यह वास्तव में दशकों पुरानी स्वर्ण मूर्ति है? यह तालाब में कैसे पहुंची? इसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भ क्या हैं? इन सवालों के जवाब आने बाकी हैं.


बस्तर जल जीवन मिशन का अधूरा काम, ग्रामीणों के सामने पानी की समस्या, आंदोलन की दी चेतावनी

बेमेतरा में मुक्तिधाम के पास शराब दुकान खोलने का विरोध, आदिवासी समाज के लोग पहुंचे कलेक्ट्रेट

नालंदा परिसर का धमतरी में विरोध, कलेक्ट्रेट और एसडीएम दफ्तर पहुंचकर सौंपा ज्ञापन