सूर्यदेव का एक भक्त ऐसा भी, रिटायर्ड होते ही खर्च कर डाला सारा धन
गिरिडीह के एक भक्त की चर्चा सभी तरफ हो रही है. भक्त सूर्यदेव के प्रति पूरी तरह समर्पित थे.

Published : October 27, 2025 at 2:48 PM IST
गिरिडीह: भगवान भास्कर के प्रति अनगिनत लोगों की आस्था है. छठ पूजा में लोगों की ऐसी ही आस्था देखने को मिलती है. इन सबों के बीच ईटीवी भारत आपको एक ऐसे भक्त की जानकारी दे रहा है जिसकी चर्चा बगोदर और आसपास के क्षेत्र में रोज हो रही है. जिस भक्त की चर्चा हो रही है वह हैं पारो मिस्त्री. पारो अब इस दुनिया में नहीं रहे लेकिन उन्होंने सूर्यदेव की आस्था में ऐसा काम किया जो निम्न और माध्यम वर्ग का व्यक्ति सोच भी नहीं सकता.
मंदिर निर्माण में खर्च कर दिए सारे पैसे
पारो मिस्त्री ने एक सूर्य मंदिर का निर्माण करवाया है. मंदिर का निर्माण आम बात है लेकिन पारो ने इस मंदिर के निर्माण के लिए अपने जीवन की जमा पूंजी के साथ-साथ रिटायरमेंट के दौरान मिले सारे पैसे को खर्च कर दिया. आज यह मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र है. बगोदर के हरिहर धाम के निकट जमुनिया नदी के किनारे स्थित सूर्य मंदिर निर्माण से यह कहानी जुड़ी है.
रेलवे में लोको पायलट थे पारो मिस्त्री
दरअसल, इस मंदिर का निर्माण मंझलाडीह निवासी पारो मिस्त्री ने कराया था. वे लोको पायलट थे. वेतन में जो रूपए मिलते थे, उससे बचत कर रखे गए रुपए और रिटायरमेंट से मिले रुपए से उन्होंने मंदिर का निर्माण कराया था. मंदिर निर्माण में लगभग 10 साल लगे थे. मंदिर निर्माण के बाद 2015 में जन सहयोग से मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा की गई थी और तब से भक्तों के लिए इस मंदिर को समर्पित कर दिया गया है.
छठ महापर्व के दौरान मंदिर में उमड़ते हैे भक्त
लोक आस्था के महापर्व छठ के मौके पर यहां छठ व्रतियों की भीड़ उमड़ती है. भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद यहां भी पूजा अर्चना की जाती है. महापर्व छठ के मौके पर मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है. यहां स्थित छठ घाट की साफ-सफाई का कार्य भी पूरा कर लिया गया है.
पारो मिस्त्री के मन में शुरू से थी मंदिर निर्माण की इच्छा
मंदिर निर्माण कराने वाले पारो मिस्त्री की पुत्रवधू भागिरथी देवी बताती हैं कि उन्हें मंदिर निर्माण की इच्छा शुरू से थी. इसके लिए वे वेतन से पैसे की कटौती करके रखते थे और जब रिटायर हुए तब रिटायरमेंट और वेतन से कटौती कर रखे गए लाखों रुपए से मंदिर का निर्माण कार्य पूरा कराया. उन्होंने बताया कि मंदिर के ऊपरी परिसर में सूर्य मंदिर और नीचे शनिदेव/नवग्रह विराजमान हैं.
मंदिर निर्माण करने वाले पारो मिस्त्री के बेटे देवानंद विश्वकर्मा महापर्व छठ के मौके पर छठ व्रतियों की सुविधा देने के लिए डेरा जमाकर बैठे हुए हैं. उन्होंने बताया कि शनिवार रात में स्थाई रूप से मंदिर परिसर में पानी की भी व्यवस्था की गई है.
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