फिर हाईकोर्ट पहुंचा लोकतंत्र प्रहरी सम्मान निधि योजना मामला, सुक्खू सरकार ने बंद की थी ये पेंशन योजना
हिमाचल हाईकोर्ट ने लोकतंत्र प्रहरी सम्मान निधि योजना की याचिका को स्वीकार कर लिया है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : December 26, 2025 at 10:48 AM IST
|Updated : December 26, 2025 at 11:03 AM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश में जयराम ठाकुर की अगुवाई वाली सरकार में शुरू हुई लोकतंत्र प्रहरी सम्मान निधि योजना का मामला अब फिर हिमाचल हाईकोर्ट पहुंच गया है. लोकतंत्र सेनानी संघ हिमाचल प्रदेश की ओर से उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई. हिमाचल उच्च न्यायालय ने याचिका को स्वीकार कर लिया है. अब इस मामले में नियमित बहस शुरू होगी. सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद इस योजना को बंद कर दिया था. सुक्खू सरकार ने विधानसभा में लोकतंत्र प्रहरी सम्मान योजना के विधेयक को रद्द कर (रिपील) दिया. इसके बाद मामला लोकभवन (तब राजभवन) पहुंचा और नियमों के अनुसार मंजूरी के लिए राष्ट्रपति भवन भेजा गया. जहां से इस योजना को खत्म करने संबंधी विधेयक को राष्ट्रपति ने इसी साल मंजूरी दी. हिमाचल हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति जियालाल भारद्वाज की अदालत इस मामले पर सुनवाई करेगी.
इमरजेंसी में जेल गए नेताओं को भाजपा सरकार ने लगाई पेंशन, सुक्खू सरकार ने की बंद
पूर्व भाजपा सरकार ने इमरजेंसी में जेल गए नेताओं के लिए लोकतंत्र प्रहरी सम्मान योजना के तहत मासिक पेंशन लगाई थी. इस योजना को वर्तमान सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार ने बंद कर दिया है. हिमाचल प्रदेश विधानसभा से पारित होने के बाद लोकतंत्र प्रहरी सम्मान योजना को खत्म करने संबंधी विधेयक लोकभवन पहुंचा. लोकभवन ने इस पर आपत्तियां लगाई थी, लेकिन बाद में इसे राष्ट्रपति को भेज दिया गया. इसी साल 6 नवंबर को सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार के हिमाचल प्रदेश लोकतंत्र प्रहरी सम्मान (निरसन) अधिनियम, 2023 को राष्ट्रपति ने अनुमोदित किया. जिसके बाद हिमाचल प्रदेश में ये योजना बंद कर दी गई. अब इस मामले को हिमाचल हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है.
सत्ता संभालते ही पहले बजट सत्र में सुक्खू सरकार ने रिपील की भाजपा सरकार योजना
जयराम ठाकुर के मुख्यमंत्री रहते हुए पूर्व भाजपा सरकार ने 18 मार्च 2021 को हिमाचल प्रदेश लोकतंत्र प्रहरी सम्मान अधिनियम पेश किया. बिल में प्रावधान था कि साल 1975 में इमरजेंसी के दरमियान 15 दिन से कम जेल में रहने वाले लोगों को 12 हजार रुपए मासिक पेंशन दी जाएगी. वहीं, 15 दिन से ज्यादा समय कारावास काटने वाले नेताओं के लिए 20 हजार रुपए मासिक सम्मान राशि का ऐलान किया गया था. सत्ता संभालने के बाद सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार ने अपने पहले बजट सत्र में पुराने विधेयक को रिपील कर दिया था. सुक्खू सरकार योजना को समाप्त करने के लिए 3 अप्रैल 2023 को बजट सत्र में बिल लेकर आई थी.
हिमाचल भाजपा के इन बड़े नामों के साथ कुल 105 लोगों को मिली पेंशन
हिमाचल प्रदेश में योजना लागू होने के बाद राज्य में कुल 105 लोगों को लोकतंत्र प्रहरी सम्मान निधि मिलना शुरू हुई. इस योजना के पेंशनरों में हिमाचल भाजपा के कई बड़े नाम भी शामिल हैं. हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार, राधारमण शास्त्री, सुरेश भारद्वाज आदि कई नेता इमरजेंसी के दौरान जेल में रहे थे. शांता कुमार व राधारमण शास्त्री नाहन सेंट्रल जेल में रहे थे. भाजपा अध्यक्ष राजीव बिंदल उस समय हरियाणा की जेल में रहे थे. उन्हें हरियाणा व हिमाचल में ये सम्मान राशि मिल रही थी.
विपक्ष में रहते हुए तब कांग्रेस ने किया था बिल का विरोध
इमरजेंसी के मुद्दे पर भाजपा-कांग्रेस हमेशा आमने-सामने नजर आते हैं. साल 2021 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने हिमाचल प्रदेश लोकतंत्र प्रहरी सम्मान बिल प्रस्तुत किया था. हिमाचल प्रदेश में तब जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली सरकार सत्तारूढ़ थी. तब विपक्षी दल कांग्रेस ने इसका भारी विरोध किया था. उस समय सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विपक्ष में रहते हुए इस बिल का भारी विरोध किया था. सत्ता में आने के बाद सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने 2023 के बजट सेशन में योजना को समाप्त करने के लिए विधानसभा में बिल प्रस्तुत किया था.

