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लोहरदगा सदर अस्पताल में सारी सुविधाएं, फिर भी मरीज का नहीं हो पाता इलाज, जानिए क्यों

लोहरदगा सदर अस्पताल में सारी सुविधाएं होने पर भी सिजेरियन के मामलों में अक्सर मरीज निजी अस्पतालों का रुख करते हैं.

LOHARDAGA SADAR HOSPITAL
लोहरदगा सदर अस्पताल में मरीज और उनके परिजन (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : June 22, 2026 at 2:20 PM IST

4 Min Read
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लोहरदगा: झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली को लेकर विपक्ष, सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर लगातार हमलावर है. हाल के समय में स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति ने कई सवालों को जन्म दिया है. लोहरदगा में स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे बड़ी इकाई सदर अस्पताल में बिचौलियों का मायाजाल है.

प्राइवेट हॉस्पिटल के एजेंट के रूप में घूम रहे लोग मरीज को सदर अस्पताल से ले जाते हैं. हद तो तब होती है, जब मरीज को सदर अस्पताल से ले जाने के क्रम में मेडिकल प्रोटोकॉल का भी ख्याल नहीं रखा जाता और मरीजों की जान-माल के साथ खिलवाड़ किया जाता है. सवाल यह उठता है कि जब स्वास्थ्य इकाई के पास सब कुछ है तो फिर भी इस बीमारी का इलाज क्यों नहीं हो पा रहा है. मरीज को बाहर क्यों ले जाना पड़ता है.

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सिजेरियन के मामलों में अक्सर मरीज को किया जाता है रेफर

लोहरदगा सदर अस्पताल की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि सिजेरियन का मामला जैसे ही आता है, मरीज को रेफर करने की स्थिति आ जाती है. खासकर प्रसव के मामले में अक्सर ऐसा देखा जाता है. विगत दिन सदर अस्पताल से रेफर एक गर्भवती महिला को स्कूटी से बाहर ले जाने के मामले में बवाल मच गया. जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया. जांच की जा रही है, कानूनी कार्रवाई का भी सहारा लिया जा रहा है.

बिचौलिए मरीजों को अपने झांसे में फंसा लेते हैं

सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसी स्थिति आती ही क्यों है. सदर अस्पताल के पास क्या डॉक्टर नहीं हैं, क्या संसाधन नहीं है या फिर यहां ऐसी कोई कमी है, जिसकी वजह से यहां से मरीजों को रेफर करना पड़ता है. सवाल यह भी उठता है कि आखिर बिचौलिए इतनी आसानी से मरीजों को अपने झांसे में कैसे ले लेते हैं. उन्हें बरगलाकर अस्पताल से बाहर कैसे ले जाते हैं.

LOHARDAGA SADAR HOSPITAL
अस्पताल में अपनी बारी की प्रतीक्षा करती महिलाएं (Etv Bharat)

लोहरदगा सदर अस्पताल में चिकित्सा पदाधिकारी के कुल स्वीकृत 11 पद में से मात्र पांच कार्यरत हैं. जबकि 6 पद रिक्त हैं. हालांकि महिला चिकित्सा के दृष्टिकोण से यह महत्वपूर्ण है कि सदर अस्पताल में कुल तीन महिला चिकित्सा पदाधिकारी कार्यरत हैं. वहीं स्त्री रोग विशेषज्ञ की बात करें तो सदर अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ के स्वीकृत दो पद में से दोनों ही पदों पर महिला चिकित्सक कार्यरत हैं. यहां पर शिशु रोग विशेषज्ञ भी हैं, निश्चेतक भी हैं तो फिर ऐसी क्या मजबूरी है कि मरीज को रेफर करना पड़ता है. लगातार इस तरह के मामले और शिकायतें सामने आ रही हैं.

LOHARDAGA SADAR HOSPITAL
लोहरदगा सदर अस्पताल (Etv Bharat)

स्वास्थ्य विभाग ने की जांच की बात

स्वास्थ्य विभाग मामले में जांच की बात तो कह रहा है, लेकिन इन कमियों की जड़ तक नहीं पहुंच पा रहा. मुख्यमंत्री खुद स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा कर रहे हैं. सुधार की उम्मीद की जा रही है. लेकिन हालात जस के तस हैं. उदाहरण के लिए लोहरदगा सदर प्रखंड में महिलाओं के सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल में प्रसव के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो सिर्फ मई 2026 में 18 गर्भवती महिलाओं का प्रसव निजी अस्पताल में हुआ है. यह तो सिर्फ मई 2026 का आंकड़ा है. पूरे 1 साल में अंदाजा लगाइए कि सदर प्रखंड की कितनी गर्भवती महिलाओं का निजी अस्पताल में प्रसव हुआ होगा और पूरे जिले में यह आंकड़ा कितना हो सकता है.

प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज क्यों

अब सवाल यह उठता है कि जब सरकारी अस्पताल में तमाम सुविधाएं हैं, डॉक्टर हैं तो फिर इन 18 महिलाओं का प्रसव प्राइवेट हॉस्पिटल में क्यों हुआ. इसके पीछे वजह क्या रही होगी. गर्भवती महिलाओं को रेफर करने के ज्यादातर मामलों में यह देखा जाता है कि जैसे ही बात सिजेरियन की आती है, वैसे ही महिलाओं को निजी अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है. जिन मरीजों का इलाज सरकारी अस्पताल में होना चाहिए, उन मरीजों का इलाज प्राइवेट हॉस्पिटल में हो रहा है. सदर अस्पताल के पास सभी सुविधाएं हैं, लेकिन फिर भी मरीज को रेफर करना पड़ता है. आखिर ऐसी नौबत आती ही क्यों है.

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