पर्यटकों के लिए हॉटस्पॉट बना झारखंड का सबसे ऊंचा जलप्रपात लोध फॉल, हजारों की संख्या में पहुंचे सैलानी
लातेहार का लोध फॉल नए साल के पहले दिन पर्यटकों से गुलजार है.

Published : January 1, 2026 at 6:05 PM IST
लातेहार: झारखंड का सबसे ऊंचा जलप्रपात लोध फॉल पर्यटकों के लिए हॉटस्पॉट बन गया है. नववर्ष के पहले दिन हजारों की संख्या में पर्यटक यहां पहुंचे और यहां की मनोरम वादियां और झारखंड के सबसे ऊंचे जलप्रपात का लुत्फ उठाया. पर्यटकों की भीड़ को देखते हुए यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे.
दरअसल, लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड स्थित लोध फॉल झारखंड का सबसे ऊंचा जलप्रपात है. लगभग 143 मी की ऊंचाई से सीधे धरती पर गिरने वाला बूढ़ा नदी का पानी झारखंड ही नहीं, बल्कि आसपास के दूसरे प्रदेशों के पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र हैं.
लातेहार जिला मुख्यालय से लगभग 110 किलोमीटर और रांची से लगभग 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित लोध फॉल घूमने के लिए नववर्ष के अवसर पर बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचे हैं. पर्यटक यहां पहुंचने के बाद यहां की प्राकृतिक सुंदरता को देखकर मंत्रमुग्ध हो गए.
पर्यटक उदित ने बताया कि यहां की खूबसूरती को देखकर मन प्रसन्न हो जाता है. उन्होंने कहा कि यहां अलग-अलग तीन तरफ से नदी का पानी पहाड़ी से सीधे जमीन पर गिरता है. चारों ओर पहाड़ियों से घिरे रहने के कारण इस स्थान की सुंदरता और अधिक बढ़ जाती है. उन्होंने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर व्यवस्था तो यहां ठीक-ठाक है, परंतु यदि जलप्रपात के पास बनाया गया लकड़ी का पुल दुरुस्त कर दिया जाता तो पर्यटकों को और अधिक मजा आता.

लकड़ी का पुल हो गया है क्षतिग्रस्त
यहां बताते चलें कि लोध जलप्रपात को पर्यटकों के लिए और आकर्षक बनाने के उद्देश्य से वन विभाग के द्वारा यहां एक लकड़ी का पुल भी बनाया गया था. पिछले वर्ष हुई भारी बारिश के कारण लकड़ी का पुल क्षतिग्रस्त हो गया था. इस कारण पर्यटकों को पुल के ऊपर जाने से रोक दिया गया है. हालांकि वन विभाग के द्वारा इस लकड़ी के पुल को दुरुस्त करने के लिए प्रपोजल तैयार कर लिया गया है. संभावना है कि जल्द ही यह पुल पूरी तरह दुरुस्त होगा.
दूसरे राज्यों से भी पहुंचते हैं पर्यटक
यहां बताते चलें कि झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार और पश्चिम बंगाल समेत कई अन्य राज्यों के पर्यटकों के लिए यह जलप्रपात घूमने का सबसे बेहतर स्थान माना जाता है. नवंबर माह के आरंभ होने के बाद से ही यहां पर्यटकों की भीड़ उमड़ने लगती है और मार्च महीने तक पर्यटकों के आने का सिलसिला जारी रहता है.
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यहां विदेशों से भी पर्यटक आते हैं. इसी कारण यहां वन विभाग के द्वारा एक विकास समिति के माध्यम से सुरक्षा की व्यवस्था भी कराई जाती है. जलप्रपात का पानी जहां पहाड़ी से सीधे नीचे गिरता है, वहां पानी काफी गहरा है. इस स्थान पर पानी में उतरना काफी खतरनाक साबित हो सकता है. इसलिए पानी में उतरने पर रोक लगा दिया जाता है.

सड़क मार्ग से पहुंच सकते हैं लोध फॉल
लोध फॉल सड़क मार्ग से ही पहुंचा जा सकता है. छत्तीसगढ़, लातेहार, पलामू अथवा रांची से सबसे पहले सड़क मार्ग से महुआडांड़ पहुंचना पड़ता है. इसके बाद महुआडांड़ से लगभग 17 किमी की दूरी पर लोध फॉल की पार्किंग स्थित है. पार्किंग में गाड़ी लगाने के बाद लगभग पैदल एक किलोमीटर चलकर जलप्रपात तक पर्यटक पहुंचते हैं.
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