ऋषिकेश में जमीन की नपाई करने पहुंचा वन विभाग, लोगों ने किया हंगामा, पुलिस ने किया बल प्रयोग
देहरादून जिले के ऋषिकेश में शनिवार को जमकर हंगामा हुआ. वन विभाग की टीम को इस दौरान लोगों का विरोध भी झेलना पड़ा.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : December 27, 2025 at 4:54 PM IST
|Updated : December 27, 2025 at 7:13 PM IST
ऋषिकेश: सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद शनिवार 27 दिसंबर को ऋषिकेश के शिवाजी नगर, मीरा नगर, बापू ग्राम, मनसा देवी और गुमानीवाला में वन विभाग जमीन की नपाई शुरू करने पहुंचा. वन विभाग की इस कार्रवाई स्थानीय लोगों ने काफी विरोध किया.
बताया जा रहा है कि लोगों ने वन विभाग की टीम को शिवाजी नगर में घुसने से भी रोका. स्थानीय लोगों ने पुलिस-प्रशासन और वन विभाग के खिलाफ करीब तीन घंटे तक विरोध प्रदर्शन किया. पुलिस और प्रशासन के आलाधिकारी लोगों को समझाते रहे, लेकिन कोई भी उनकी सुनने को तैयार नहीं था. आखिर में पुलिस ने हल्का बल प्रयोग करना पड़ा. इसके बाद ही वन विभाग की टीम पुलिस के साथ शिवाजी नगर में घुसी.
पुलिस-प्रशासन और वन विभाग की टीम ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दिया हवाला दिया और लोगों को बताया कि घरों को किसी प्रकार से नुकसान नहीं होगा. खाली पड़ी जमीन को ही वन विभाग की टीम नपाई के साथ चिन्हिंत करेगी. क्षेत्रीय लोग पैनिक न हो किसी का भी घर नहीं उजाड़ा जाएगा.
स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि कल भी जंगलात की टीम ने पूरी फोर्स के साथ बापू नगर में एट्री की थी. जब इस बारे में वन विभाग की टीम से बात की गई तो उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि बापू ग्राम की 500 एकड़ जमीन पर जितने भी भूखंड है, उनका नापजोप करें.
स्थानीय व्यक्ति के मुताबिक जब अधिकारियों से वेकेंट लैंड के बारे में जानकारी चाही तो उन्होंने कहा कि जो मकान बने हुए है, उन्हें छोड़कर खाली पड़ी जमीन, जिसमें दो से तीन सौं गज के जो भी प्लाट होंगे, उसकी वो नाप लेगे, जिसका स्थानीय जनता ने विरोध किया. क्योंकि वो यहां तीन पीढ़ियों से रह रहे है. इसके लिए सरकार जिम्मेदार है. वन विभाग की इस कार्रवाई से इलाके में डर का माहौल है.
स्थानीय जनता का साफ कहना है कि वो वन विभाग की किसी भी कीमत पर आगे नहीं बढ़ने देंगे. वो अहिंसावादी तरीके से सरकार की इस कार्रवाई का विरोध करेंगे. वहीं हंगामा बढ़ने पर ऋषिकेश मेयर शंभू पासवान भी मौके पर पहुंचे. उन्होंने बताया कि 22 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से आदेश हुआ था. इसके बाद ही वन विभाग यहां पहुंचा था.
मेयर शंभू पासवान ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से कहा गया है कि मकानों को छोड़कर जो जमीन खाली है, उस पर वन विभाग अपने बोर्ड लगाए. इसके बाद आनन-फानन में वन विभाग और शहरी विकास सचिव की तरफ से एक समिति का गठन हुआ. इसीलिए लोगों को पहले से कोई नोटिस नहीं मिला. इसी कारण लोगों को कोई जानकारी भी नहीं मिल पाई. इसी वजह से इलाके में रहने वाली 1.50 से दो लाख की आबादी डरी हुई है.
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