पशुओं की सेहत भगवान भरोसे, देवघर पशु चिकित्सालय में डॉक्टर और कर्मचारियों की भारी कमी
देवघर के पशु चिकित्सालय में कर्मचारियों की कमी के कारण पशुपालकों को अपने पशु की इलाज कराने में परेशानी हो रही है.

Published : June 29, 2026 at 5:43 PM IST
देवघर: झारखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल अक्सर उठते रहे हैं. लेकिन अब पशुओं के इलाज की व्यवस्था भी गंभीर संकट से गुजर रही है. इसकी तस्वीर देवघर के प्रांतीयकृत पशु चिकित्सालय से सामने आई है, जहां डॉक्टरों और कर्मचारियों की भारी कमी के कारण हजारों पशुपालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
अस्पताल में कंपाउंडर और ड्रेसर पद खाली
जानकारी के अनुसार अस्पताल में पिछले एक वर्ष से कंपाउंडर और ड्रेसर के पद खाली पड़े हैं. इन पदों पर अब तक नियुक्ति नहीं होने से इलाज की व्यवस्था प्रभावित हो रही है. प्रांतीयकृत पशु चिकित्सालय के चिकित्सक डॉ संजीव कुमार ने बताया कि वर्तमान में अस्पताल में केवल एक गार्ड और वे स्वयं ही कार्यरत हैं. महज दो लोगों के भरोसे पूरे इलाके के बीमार पशुओं का इलाज किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि प्रतिदिन 70 से 80 पशु इलाज के लिए अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन स्टाफ की कमी के कारण कई पशुपालकों को बिना इलाज कराए ही अपने पशुओं को वापस ले जाना पड़ता है.
15 स्वीकृत पद में 5 से 7 कर्मचारी कार्यरत
वहीं अवर पशुपालन पदाधिकारी डॉ धनी लाल मंडल ने बताया कि कर्मचारियों की कमी को लेकर कई बार उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर जानकारी दी गई है. उन्होंने कहा कि पर्याप्त मानव बल नहीं होने से जिला ही नहीं, प्रखंड स्तर के पशु चिकित्सकों को भी काम करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. डॉ धनी लाल मंडल ने बताया कि जिले में पशु चिकित्सकों के 16 स्वीकृत पद हैं, जिनमें 15 पदों पर डॉक्टर कार्यरत हैं. लेकिन कर्मचारियों की स्थिति बेहद खराब है.
जिले में चपरासी और गार्ड के 15 स्वीकृत पदों में केवल 5 से 7 कर्मचारी ही कार्यरत हैं. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब राज्य सरकार किसानों और पशुपालकों को हर संभव सुविधा देने का दावा करती है तो फिर पशुओं के इलाज के लिए बने सरकारी अस्पतालों में मूलभूत मानव संसाधन तक क्यों उपलब्ध नहीं हैं.
देवघर जिले में छह लाख से अधिक पंजीकृत मवेशी हैं. ऐसे में पशुपालकों और उनके पशुओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अस्पतालों में डॉक्टरों के साथ-साथ आवश्यक कर्मचारियों की नियुक्ति जल्द से जल्द करना जरूरी है. अन्यथा पशुपालकों की मुश्किलें लगातार बढ़ती रहेंगी.
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