'2027 चुनाव में युवा और बेटियां डंडे लेकर खड़े होंगे', रोजगार के मद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरा

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : September 1, 2026 at 11:07 AM IST
|Updated : September 1, 2026 at 3:54 PM IST
शिमला: हिमाचल विधानसभा मानसून सत्र अब अपने आठवें दिन पहुंच चुका है. पिछले तीन वर्षों में 31 जुलाई 2025 तक प्रदेश के विभिन्न विभागों में कितने संस्थान बंद, विलय या डिनोटिफाई किए गए और कितने नए खोले गए? विभागवार और विधानसभा क्षेत्रवार पूरा ब्यौरा मांगा गया है, जो संस्थान दोबारा शुरू किए गए, उनके भवन बन चुके हैं या नहीं? बंद करने और बाद में दोबारा खोलने के कारण भी सरकार से मांगे गए हैं. तारांकित सवालों के जवाब मंत्रियों को सदन में खड़े होकर मौखिक रूप से देने होंगे, जबकि अतारांकित सवालों के लिखित जवाब पटल पर रखे जाएंगे.
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विधानसभा की कार्यवाही कल सुबह 11 बजे तक स्थगित
विधानसभा की कार्यवाही शाम 6 बजे स्थगित कर दी गई. अब विधानसभा की अगली बैठक बुधवार सुबह 11 बजे शुरू होगी, जिसमें विभिन्न मुद्दों पर आगे चर्चा की जाएगी.
केंद्र के फंड और कर्ज पर तीखी बहस
चर्चा के दौरान संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने प्रकाश राणा के सवालों पर कहा कि हिमाचल को पहले केंद्र से हर साल 8 हजार करोड़ रुपये का रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) मिलता था, जिससे आय-खर्च का अंतर पूरा होता था, लेकिन अब इसे बंद कर दिया गया है जिसके लिए भाजपा सरकार दोषी है. इस पर पलटवार करते हुए नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार के कार्यकाल का अब केवल एक साल बचा है, वह आत्मनिर्भर हिमाचल का फॉर्मूला कब लागू करेगी. उन्होंने आंकड़ों की तुलना करते हुए कहा कि मनमोहन सरकार के समय दो वित्त आयोगों में हिमाचल को केवल 18 हजार करोड़ मिले थे, जबकि मोदी सरकार ने दो वित्त आयोगों में रिकॉर्ड 89,300 करोड़ रुपये दिए हैं, लेकिन राज्य सरकार ने इस बड़ी मदद के लिए केंद्र का आभार तक नहीं जताया.
'इतना कर्ज लिया फिर भी खजाना खाली'
रोजगार पर चर्चा के दौरान भाजपा विधायक प्रकाश राणा ने सरकार को घेरते हुए कहा कि आज हर युवा का यही सवाल है कि उसे नौकरी कब मिलेगी. उन्होंने कहा कि जब सरकार के पास साधन नहीं हैं, तो जनता के सामने सच्चाई लाई जानी चाहिए कि हम नौकरियां नहीं दे सकते. युवाओं को झूठी उम्मीद में रखने का कोई फायदा नहीं है.
प्रकाश राणा ने प्रदेश की माली हालत पर चिंता जताते हुए कहा कि हिमाचल की कुल आय का स्रोत महज 18 हजार करोड़ रुपये है, जबकि राज्य पर 1 लाख 8 हजार करोड़ रुपये का कर्ज चढ़ चुका है. वित्त विभाग खुद प्रेजेंटेशन में मान चुका है कि वित्तीय स्थिति ठीक नहीं है. इतना कर्ज लेने के बाद भी सरकारी खजाना खाली पड़ा है. विधायक ने तंज कसा कि मुख्यमंत्री का आधा ध्यान इसी बात पर लगा रहता है कि कर्मचारियों को सैलरी कहां से देंगे और पुराने कर्ज का ब्याज कैसे चुकाएंगे. उन्होंने सरकार के आत्मनिर्भर हिमाचल के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ खजाना खाली है, दूसरी तरफ 2027 में आत्मनिर्भर और 2032 तक सबसे समृद्ध राज्य बनने के दावे किए जा रहे हैं.
राणा ने कहा कि सरकार के चार साल पूरे होने वाले हैं, लेकिन हिमाचल की इनकम वहीं की वहीं है. राज्य का सिस्टम फिलहाल धक्के से चल रहा है, जो ज्यादा दिन नहीं टिक पाएगा. उन्होंने सदन में फालतू चर्चा बंद करने की सलाह देते हुए कहा कि जनता असल सच्चाई जानना चाहती है. हिमाचल में आय बढ़ाने के विकल्पों पर बात करते हुए विधायक ने कहा कि राज्य के पास कमाई जुटाने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं. उन्होंने साफ किया कि केवल शराब, भांग की खेती और लॉटरी के भरोसे हिमाचल प्रदेश का भला नहीं होने वाला है, इसके लिए ठोस नीति की जरूरत है.
रोजगार के मद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरा
अब चर्चा में भाग ले रहे भाजपा विधायक बलबीर वर्मा. चुनाव में कांग्रेस ने युवाओं को पांच लाख नौकरियों को देने का वादा किया था. युवाओं ने सभी पार्टियों को छोड़कर कांग्रेस को वोट किया. उन्होंने कहा है कि अभी तक कुल 23 हजार नौकरियां दी है. जो घोषणा पत्र में किए वादे की तुलना में सिर्फ 4 फीसदी है. अब तक प्रदेश में 4 लाख नौकरियां मिल जानी चाहिए थी.
उन्होंने कहा कि युवा नशे की बुराई में फंस गए हैं. युवाओं को नशे से बचाने के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष को मिलकर प्रयास करने चाहिए. बेटियां और युवा डंडे लेकर वर्ष 2027 के चुनाव में खड़े होंगे. बेटियों को 1500 रुपए देने का वादा पूरा नहीं किया. भांग की खेती हिमाचल में नहीं होनी चाहिए. युवाओं को आत्मदाह के लिए मजबूर करने के लिए सरकार लॉटरी ला रही है. युवाओं को इस जाल में न फंसाएं. हिमाचल में इंडस्ट्री को सख्त कानून बनाया जाए. जिसमें हिमाचल के युवाओं को 70 फीसदी नौकरियां मिल सके.
युवाओं को अन्य देशों में नोकरियों के लिए तैयार करना होगा: राजेश धर्माणी
तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि युवाओं को अन्य देशों में नोकरियों के लिए तैयार करना होगा. इसके लिए युवाओं को विदेशी भाषाओं की ट्रेनिंग देनी होगी. सरकार इसके लिए भी प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा कि हिमाचल में स्किल एकेडमी खोली जाएगी, इस दिशा में भी कार्य हो रहा है. उन्होंने कहा कि हमसे बड़े वादे भारत सरकार ने किए हैं, जिससे युवा हताश हुआ है. सदन में ऐसे प्रस्ताव न लाए जाएं, जिससे युवाओं में उम्मीद बंधे.
युवाओं को रोजगार का चिंता वाला विषय: राजेश धर्माणी
अब चर्चा में भाग ले रहे हैं तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी. युवाओं को रोजगार का विषय चिंता वाला है. देश और प्रदेश की तुलना अन्य देशों से करें तो हमारी पर कैपिटा इनकम उनसे बहुत कम है. हमारी नीतियां प्रोडक्टिविटी बढ़ाने वाली होनी चाहिए. हिमाचल का युवा सरकारी नौकरियों के प्रति आकर्षित रहते हैं. इसका कारण है कोरोना काल में कई रोजगार ठप हो गए और प्राइवेट नौकरियां चली गई. इसलिए युवा सरकारी नौकरी में सुरक्षा चाहता है.
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने हजारों पद भरें है. शिक्षा विभाग में 7 हजार पद भरे गए हैं. वन विभाग में 2000 वन मित्र भरे गए हैं. जल शक्ति विभाग में 6 हजार पद भरे गए हैं. 4 हजार पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है. इसी तरह से अन्य विभागों में भी हजारों नौकरियां दी गई हैं. इसी तरह से अन्य विभागों में भी हजारों नौकरियां दी गई हैं.
उन्होंने कहा कि आउटसोर्स की नीति केंद्र में रहते हुए बीजेपी सरकार लाई थी. भाजपा सरकार ने की आउटसोर्स की नीति को अपनाया था. आज अग्निवीर के माध्यम से आर्मी भी इसके दायरे में आ गई है. उन्होंने कहा कि वन मित्र की भर्ती अग्निवीर से बेहतर है. अग्निवीर की नौकरी तो चार साल की है लेकिन वन मित्रों को पॉलिसी बनेगी. डिवीजन खोलने से सुविधा नहीं मिलेगी इसके लिए फील्ड स्टाफ चाहिए. इस दिशा में काम करने की जरूरत है. अगर सरकारी क्षेत्र में नौकरी देने से ही देश डवलप होता तो हम सबसे ऊपर होते. ITI सरकारी स्कूलों की तरह खोल दिए, वहां स्टाफ नहीं है.
उन्होंने कहा कि अगर संस्थान खोलने से काम होते तो आज राजस्व अदालतों में 7 लाख मामले न आते. बिल्डिंग बनाने से हम क्या साबित करना चाहते है. कई जगह बिल्डिंग बनी नहीं फर्नीचर पहले खरीद किया. इससे हमारे युवाओं का भला नहीं होने वाला है. जंतर मंतर में आंदोलन को लेकर उन्होंने कहा कि गाली देने का अधिकार किसी को अधिकार नहीं है. उन्होंने कहा कि मोदी ने अच्छी बात कही थी कि मिनिमम गवर्नमेंट मैक्सिम गवर्नेस लेकिन ये लागू नहीं हुआ.
'डीजी डिस्क ऐसे पुलिस वालों को दी जा रही, जिसकी चिट्टे वालों से साथ फोटो है'
सदन में सतपाल सत्ती ने कहा जंतर मंतर बना ही धरने के लिए है. वहां कौन सा शिवजी का मंदिर थोड़े बनाना है. डीजी डिस्क ऐसे पुलिस वालों को दी जा रही है, जिसकी चिट्टे वालों से साथ फोटो है. ऐसे लोगों डीजी डिस्क अवार्ड बांटे जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि मैं इसलिए दर्द बयान कर रहा हूं कि चीफ मिनिस्टर हमारे मित्र है. पेपर लीक को लेकर सख्त नियम बनने चाहिए. जो दोषी हैं उन पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.
'मुख्यमंत्री 75 हजार करोड़ का रोना बार बार न रोया करें'
अब नियम-130 के अन्तर्गत प्रस्ताव में रणधीर शर्मा, सुधीर शर्मा, राकेश जम्वाल डॉ. हंसराज, जीत राम कटवाल की ओर से लाए गए "युवाओं के लिए रोजगार सन्दर्भित गारंटी के कार्यान्वयन बारे" में चर्चा हुई. चर्चा में भाग ले रहे भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने कहा कि हर व्यक्ति को सरकारी नौकरी मिले ये मुश्किल है, लेकिन अगर कोई खाली पद रहे तो कर्मचारियों को भी दिक्कत आती है युवा शक्ति को समय पर नौकरी मिलने में दिक्कत रहती है. सरकार ने युवाओं को 5 लाख नौकरियां देने की गारंटी थी, जिसमें पहली बैठक में साल में एक लाख पक्की नौकरी 58 साल वाली नौकरी देने का वादा किया था, लेकिन मुख्यमंत्री 75 हजार का कर्ज की बातें करनी शुरू कर दी. ये लोन अकेले जयराम सरकार ठाकुर ने नहीं लिया था. मुख्यमंत्री 75 हजार करोड़ का रोना बार बार न रोया करें.
कई जगहों पर भारी बारिश से हुआ भारी नुकसान
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि इस बार बरसात में पिछली साल की तुलना में कम नुकसान हुआ है, लेकिन कई स्थानों में भारी बारिश से अधिक नुकसान हुआ है. इसको ठीक करने में थोड़ा समय लग सकता है. परमाणु में भारी बारिश से हुए नुकसान की भरपाई की जा रही है. विनोद सुल्तानपुरी ने कहा कि भारी बारिश भारी बारिश से परमाणु और नजदीकी गांव को भारी नुकसान हुआ है. इंडस्ट्रियल एरिया ने त्रासदी झेली है. उन्होंने कहा कि नालों के ऊपर इंडस्ट्री बनी है. इस तरह के अतिक्रम पर भी सरकार को संज्ञान लेना चाहिए.
हिमाचल के अर्बन एरिया में भी शुरु होगी मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना
हिमाचल के अर्बन एरिया में मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना शुरू होगी. शहरी विकास विभाग मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने सदन में कांग्रेस विधायक संजय रत्न की ओर से शून्य काल में उठाए गए सवाल के जवाब में कहा कि अर्बन एरिया में भी मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना को शुरू करने का प्रयास किया जाएगा. संजय रत्न ने मामला उठाया कि ग्रामीण क्षेत्रों में बीपीएल और मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार के लिए सालाना आय का दायरा बढ़ाकर 75 हजार कर दिया है, लेकिन अर्बन एरिया में यही सालाना इनकम का दायरा अभी 26,500 है, इसलिए इस लिमिट को बढ़ाकर 1 लाख किया जाना चाहिए, ताकि शहर में अधिक से अधिक लोगों को योजना का फायदा मिले. इसके जवाब में विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि इस मामले को लेकर हम रिव्यू करेंगे.
सदन में उठा स्वाइन फ्लू का मामला उठा
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि स्वाइन फ्लू को लेकर जरूरी दिशा निर्देश सभी स्वास्थ्य संस्थानों को जारी किए गए हैं. स्वाइन फ्लू और कई अन्य तरह के फ्लू को लेकर सरकार हर बार इस बारे में स्वास्थ्य संस्थानों को निर्देश जारी करती है. सरकार इसको लेकर रिसर्च भी कराती है. जहां तक आईजीएमसी में स्वाइन फ्लू से डेथ का मामला है वह मामला बिलासपुर एम्स से ट्रांसफर किया गया था. नेता प्रतिपक्ष ने प्वाइंट ऑफ ऑर्डर लेने का आग्रह करते हुए स्वाइन फ्लू को लेकर सदन में अपनी चिंता जताई. हालांकि विधानसभा अध्यक्ष ने प्वाइंट ऑफ ऑर्डर के तहत इस मामले को लेने की इजाजत नहीं दी, लेकिन महत्वपूर्ण मुद्दा होने के कारण सदन में इस विषय को उठाने की जरूर अनुमति दी गई।
मल्टी टास्क वर्करों के लिए बनेगी पॉलिसी
सीएम सुक्खू ने कहा कि हिमाचल में विभिन्न विभागों में कार्य करने वाले मल्टी टास्क वर्करों के लिए नई पॉलिसी बनेगी. मुख्यमंत्री ने सदन में कांग्रेस विधायक आरएस बाली के सवाल के जवाब में ये जानकारी दी. कई विभागों ने मल्टी टास्क वर्कर रखे हैं. इसके लिए सरकार अब 500 या 1000 रुपए बढ़ाने की जगह मिनिमम वेजेस की पॉलिसी लाएगी.
'तीन साल बाद आया सरकार का जवाब'
सीएम के जवाब में जयराम ठाकुर ने कहा कि साढ़े तीन साल बाद सवाल का जवाब आया है. व्यवस्था परिवर्तन की सरकार ने 2035 संस्थान बंद किए है, जिसमें फिर से 123 संस्थानों को दोबारा खोला गया है. अगर ये जरूरी थे तो इन्हें बंद क्यों किया गया. इनके बंद करने के क्या मापदंड तय किए गए थे. इसके बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि हम चुनाव से छह महीने पहले संस्थान खोलने पर विश्वास नहीं रखते. आपने चुनाव से छह महीने पहले संस्थान खोल दिए. साढ़े चार साल तक आप क्या करते रहे.
मुख्यमंत्री ने जयराम ठाकुर के स्प्लीमेंटरी सवाल के जवाब में कहा कि आपके समय में पेपर बेचे जाते थे. हमारी सरकार ने सबोर्डिनेट सिलेक्शन बोर्ड को बंद कर दिया. इस सदन में 90 फीसदी सदस्य उच्च शिक्षित है. जयराम ठाकुर ने सप्लीमेंट्री प्रश्न करते हुए कहा कि सरकार पांच साल के लिए चुनी जाती है. आपको शपथ लेने के दो दिन में ही कैसे पता चला कि स्कूलों में बच्चे नहीं है. हमने जनता की मांग पर संस्थान खोले थे. मुझे कोई सपना नहीं आया कि संस्थान खोलने हैं. हमारी सरकार आएगी तो आपके पांच साल में लिए गए फैसलों का रिव्यू होगा.
'राजनीतिक लाभ के लिए रेवड़ियां बांटी'
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार जनता की जरूरत के हिसाब से संस्थान खोलती है. आपने राजनीतिक लाभ के लिए रेवड़ियां बांट दी बीजेपी ने 750 ऐसे स्कूल खोल दिए जहां एक भी बच्चा और टीचर नहीं था. शिक्षा मंत्री और अधिकारियों के बाद चर्चा के बाद इन संस्थानों को बंद किया गया. इन्होंने हेल्थ सेक्टर में भी संस्थान तो खोल दिए कि जहां न तो डॉक्टर थे न ही अन्य स्टाफ था. हमने जो संस्थान खोले हैं वो ऐसी जगह खोले हैं जहां जनता को इसकी जरूरत थी. ऐसे संस्थान भविष्य में भी खोले जाएंगे. हमने नीड बेस संस्थान खोले हैं. उन संस्थानों को ही बंद किया गया जिसकी जरूरत नहीं थी मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भाजपा विधायक सवाल नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, भाजपा विधायक रणधीर शर्मा और त्रिलोक जम्बाल ने बंद संस्थानों को लेकर पूछे गए सवाल पर ये जवाब दिया है.
3 सितंबर तक चलेगा सदन
प्रश्नकाल के बाद आज सदन में नियम 61 के तहत चर्चा भी प्रस्तावित है. वहीं कल नियम 130 के अंतर्गत शुरू हुई चर्चा आज भी जारी रहेगी. नियम 130 के तहत युवाओं के लिए रोजगार गारंटी के कार्यान्वयन पर विपक्ष पहले से ही सरकार को घेर रहा है. भाजपा का कहना है कि कांग्रेस ने चुनाव के समय एक लाख नौकरियों की गारंटी दी थी, लेकिन चार साल पूरे होने को हैं और विभागों में हजारों पद खाली पड़े हैं. सदन में पिछले दिनों सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोक-झोंक देखने को मिली है. विशेषाधिकार हनन नोटिस, राष्ट्रगान विवाद और रोजगार के मुद्दे पर पहले भी हंगामा हो चुका है. ऐसे में मंगलवार का दिन भी गरमागरम रहने के आसार हैं. हिमाचल विधानसभा का यह मानसून सत्र 21 अगस्त से शुरू हुआ था और 3 सितंबर तक चलेगा। अब तक के दिनों में आपदा, सड़कें, स्वास्थ्य सुविधाएं, खाली पद और रोजगार जैसे मुद्दे केंद्र में रहे हैं. आज का प्रश्नकाल इन मुद्दों को और तीखा बनाने वाला है.

