छत्तीसगढ़ में होली पर ‘नो ड्राई डे’, खुली रहेंगी शराब दुकानें, शराब नीति पर सियासी संग्राम
छत्तीसगढ़ में होली के दिन शराब दुकानें खोलने के फैसले का कांग्रेस ने विरोध किया. सरकार को जमकर घेरा, शराब नीति पर उठाए सवाल.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 18, 2026 at 2:42 PM IST
रायपुर: इस बार होली पर शराब प्रेमियों के लिए राहत की खबर है. राज्य सरकार ने नई आबकारी नीति में बदलाव करते हुए होली, मुहर्रम और 30 जनवरी (महात्मा गांधी निर्वाण दिवस) को ड्राई डे की सूची से हटा दिया है. अब इन दिनों भी शराब दुकानें खुली रहेंगी. जहां सरकार इसे ‘जनहित’ का निर्णय बता रही है, वहीं कांग्रेस ने इसे शराब प्रेम में अंधी सरकार करार दिया है. कांग्रेस ने तीनों दिन फिर से ड्राई डे घोषित करने की मांग की है. फैसले के बाद सियासत तेज हो गई है.
7 ड्राई डे में 3 खत्म किए गए
नई आबकारी नीति में बदलाव करते हुए राज्य सरकार ने वर्ष 2026-27 की नई आबकारी नीति में पहले से निर्धारित 7 ड्राई डे में से 3 दिन समाप्त कर दिए हैं. अब केवल इन चार दिन बंद रहेंगी शराब दुकानें
- 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस)
- 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस)
- 2 अक्टूबर (गांधी जयंती)
- 18 दिसंबर (गुरु घासीदास जयंती)
राजस्व बढ़ाने की तैयारी
पहले होली, मुहर्रम और 30 जनवरी को भी ड्राई डे यानी शराब बेचने पर पूर्ण प्रतिबंध रहता था, लेकिन अब इन तिथियों पर शराब बिक्री की अनुमति रहेगी. सरकार का तर्क है कि इससे अवैध शराब की बिक्री पर रोक लगेगी और राजस्व को भी बढ़ावा मिलेगा.
होली पर बदलेगा माहौल
अब तक प्रदेश में होली के दिन शराब की दुकानें पूरी तरह बंद रखी जाती थीं. त्यौहार से एक दिन पहले पुलिस सख्त चेकिंग अभियान चलाती थी. यहां तक कि पहले से शराब खरीदकर ले जाने वालों से भी पूछताछ या जब्ती तक की जाती थी. इस बार नई नीति लागू होने के बाद ऐसे हालात नहीं बनेंगे. प्रशासन का मानना है कि वैध बिक्री की अनुमति से अवैध तस्करी और काला बाजार की संभावना कम होगी.
सरकार शराब प्रेम में अंधी हो चुकी है और अपने सामाजिक उत्तरदायित्व को भूल रही है. शराबबंदी और नशा मुक्ति की ओर बढ़ने की जगह नशाखोरी और शराब बिक्री को बढ़ावा दे रही है. सरकार नीतियों के पैरालिसिस से जूझ रही है- कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर

फिर से लागू हो पुराना नियम
कांग्रेस ने मांग की है कि जिन तीन दिनों होली, मुहर्रम और 30 जनवरी को ड्राई डे की सूची से हटाया गया है, उन्हें फिर से लागू किया जाए. कांग्रेस का आरोप है कि सरकार सामाजिक संतुलन की बजाय केवल राजस्व बढ़ाने पर ध्यान दे रही है.
सरकार का पक्ष: “जनता के हित में फैसला”
वहीं राज्य सरकार के मंत्री टंकराम वर्मा ने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि सरकार जनता के हित में निर्णय लेती है. उनका कहना है कि प्रतिबंध के बावजूद लोग पहले से शराब खरीद लेते थे, जिससे व्यावहारिक रूप से ड्राई डे का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाता था. ऐसे में नियंत्रित और वैध बिक्री की अनुमति देना अधिक प्रभावी कदम है.
क्या ड्राई डे हटाना केवल राजस्व बढ़ाने का प्रयास है? क्या इससे सामाजिक प्रभाव और कानून-व्यवस्था पर असर पड़ेगा? या फिर यह निर्णय व्यावहारिक सोच का हिस्सा है? होली से पहले लिए गए इस फैसले ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. अब देखना होगा कि सरकार अपने निर्णय पर कायम रहती है या विपक्ष के दबाव में कोई बदलाव करती है.

