आपदा के 7 महीने बाद भी बहाल नहीं हो पाई पेयजल योजना, हिमाचल में 15 हजार लोगों पर गहराया पानी का संकट
पिछले साल करीब 10 करोड़ से उठाऊ पेयजल योजना से पहुंचाया जाना था पानी.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 17, 2026 at 2:54 PM IST
कुल्लू: हिमाचल प्रदेश में ग्रर्मियों के मौसम में अक्सर ऊंचाई वाले इलाकों में पीने के पानी की समस्या सामने आती है. जिससे निपटने के लिए हिमाचल सरकार द्वारा कई पेयजल परियोनाएं चलाकर, इन इलाकों में पेयजल की आपूर्ति करवाई जाती है, ताकि लोगों को गर्मियों में पेयजल को लेकर किसी तरह की दिक्कतों का सामना न करना पड़े. हालांकि इस साल गर्मी के मौसम में जिला कुल्लू में खराहल घाटी में पेयजल की किल्लत फिर से सताएगी. ऐसे में इस साल की गर्मियां खराहल घाटी के लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं.
क्यों सिरे नहीं चढ़ पा रही उठाऊ पेयजल योजना
जिला कुल्लू की खराहल घाटी में पेयजल संकट के स्थायी समाधान के लिए जलशक्ति विभाग ने ब्यास नदी से 9 करोड 61 लाख रुपये की लागत से 16 टंकी उठाऊ पेयजल योजना का निर्माण किया था, लेकिन साल 2025 की आपदा के बाद यह महत्वाकांक्षी योजना अभी तक शुरू नहीं हो पाई है. ब्यास नदी में आई भारी बाढ़ के दौरान इस उठाऊ पेयजल योजना को भारी नुकसान पहुंचा था. इस दौरान यहां लगाए गए बिजली के ट्रांसफार्मर में खराबी आ गई थी. अब इसे दोबारा शुरू करने के लिए लगभग 30 लाख रुपए के अतिरिक्त बजट की जरूरत है. जो अभी तक बिजली बोर्ड को जारी नहीं किया गया है. इसके चलते योजना के लिए जरूरी तीन से चार बिजली ट्रांसफार्मर नहीं लग पाए हैं और पिछले 6 महीनों से काम पूरी तरह बंद पड़ा हुआ है. ऐसे में इस साल भी गर्मियों में लोगों को पेयजल की किल्लत सताएगी.
"पिरड़ी से 16 टंकी उठाऊ पेयजल योजना का निर्माण तीन चरणों में पूरा किया जा चुका है, लेकिन आपदा के बाद योजना बंद पड़ी है. इसमें ट्रांसफार्मर लगने हैं जो अब तक नहीं लगाए गए हैं. विभाग के अधिकारियों को इस बारे सूचित कर दिया गया है." - अमित, अधिशासी अभियंता, जलशक्ति विभाग कुल्लू
उठाऊ पेयजल आपूर्ति योजना क्या है?
हिमाचल सरकार द्वारा चलाई जा रही पेयजल आपूर्ति योजनाओं में से एक उठाऊ पेयजल योजना है. इस योजना के तहत नदियों और अन्य जलस्त्रोतों से पंपों द्वारा पानी को ऊंची जगहों पर बनी टंकी तक लिफ्ट किया जाता है. जिसके बाद इस टंकी से पूरे इलाके में पानी की सप्लाई होती है. ये योजना ऊंचाई वाले और पहाड़ी इलाकों के लिए बेहद कारगर साबित होती है.
6 पंचायतों की 15 हजार आबादी के लिए योजना
जिला कुल्लू के वाम तट में ब्यास नदी के किनारे जल शक्ति विभाग द्वारा 9 करोड़ 61 लाख रुपए की लागत से उठाई पेयजल योजना तैयार की गई थी. जलशक्ति विभाग कुल्लू के अधिशासी अभियंता अमित इस योजना से खराहल घाटी की 6 पंचायतों की करीब 15 हजार की आबादी को लाभ मिलना था, लेकिन योजना के लिए बिजली की व्यवस्था न होने से ग्रामीणों को गर्मियों में पानी के संकट की चिंता सताने लगी है. इस योजना के तहत पानी के चार बड़े स्टोर टैंक बनाए गए हैं. जिसमें तलोगी गांव में 1.93 लाख लीटर, पेछा में 3.86 लाख लीटर, गोभा में तीन लाख लीटर क्षमता का टैंक तैयार किया गया है. इसके अलावा 10 हजार और 20 हजार लीटर क्षमता के 12 छोटे टैंक बनाए गए हैं. यह योजना तीन चरणों में तैयार की गई है. प्रथम चरण में पिरड़ी से थकू, दूसरे चरण में थकू से गोभा और तीसरे चरण में गोभा से 16 टंकी तक कार्य किया गया है. योजना से करीब 98.706 हेक्टेयर भूमि भी सिंचाई के दायरे में आएगी.

ग्रामीण कुलदीप नैयर का कहना है, "इस योजना से खराहल घाटी के करीब 15 हजार लोगों को पीने का पानी मिलेगा और सालों से चली आ रही पानी की समस्या भी दूर होगी. आपदा के कारण बिजली के ट्रांसफार्मर को खासा नुकसान पहुंचा है. सर्दियों में तो लोगों ने अपने लिए पानी की व्यवस्था कर ली, लेकिन गर्मियों में प्राकृतिक पेयजल स्रोत भी सूख जाते हैं. ऐसे में गर्मियों का मौसम आने से पहले ही इस योजना को सुचारु किया जाना चाहिए."
इन क्षेत्रों तक किया जाना था पानी लिफ्ट
आईपीएच विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर अमित ने बताया कि इस योजना के अनुसार पिरड़ी से खराहल घाटी की ऊंची पहाड़ियों में स्थित 16 टंकी क्षेत्र एवं बिजली महादेव (शलाघरा) तक पानी लिफ्ट किया जाना है. विभाग ने तकनीकी तौर पर योजना को पूरा कर लिया है, लेकिन बिजली आपूर्ति से जुड़ी बाधाओं के चलते इसे जनता के लिए शुरू नहीं किया जा सका है. योजना से खराहल घाटी की 6 पंचायतों, चंसारी, बदल, सेऊगी, पुईद, तलोगी और चौकी डोभी की लगभग 15 हजार आबादी को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होना था, लेकिन योजना के सिरे न चढ़ने से लोगों की चिंता बढ़नी शुरू हो गई है.
खराहल घाटी के ग्रामीण चंदन कुमार का कहना है कि "खराहल घाटी में पानी की बहुत अधिक समस्या रहती है और गर्मियों में यह समस्या काफी गहरा जाती है. वर्तमान में प्राकृतिक पेयजल स्रोत के माध्यम से लोगों के घरों तक पानी पहुंच रहा है. ऐसे में इस साल मौसम में भी बदलाव आ रहा है और फरवरी महीने में ही गर्मी देखने को मिल रही है. प्रशासन को चाहिए कि वे जल्द से जल्द बिजली के ट्रांसफार्मर की व्यवस्था करें, ताकि उठाऊ पेयजल योजना से हजारों लोगों को लाभ मिल सके."
"करोड़ों से बनी पेयजल योजना, 30 लाख के लिए हो रही बर्बाद"
वहीं, ग्रामीण होतम सोखला का कहना है कि जब सरकार द्वारा करोड़ों रुपए पेयजल योजना के लिए खर्च किए गए हैं, तो 30 लाख रुपए की राशि भी जल्द उपलब्ध की जानी चाहिए. मात्र 30 लाख रुपए के लिए करोड़ों रुपए की योजना को बर्बाद नहीं किया जा सकता है. खराहल घाटी के लोगों को गर्मियों में पीने के पानी की दिक्कत ना हो, इसके लिए ही इस योजना का निर्माण किया गया है. अगर मात्र 30 लाख के लिए इसे बंद रखा जाए तो इसका कोई औचित्य नहीं बनता.
"जल शक्ति विभाग की ओर से ट्रांसफार्मर लगाने के लिए बजट जारी नहीं किया गया है. जैसे ही बजट आएगा इसके लिए टेंडर लगाए जाएंगे. बिजली बोर्ड के पास जैसे ही पैसे जमा होते हैं, तो सभी ट्रांसफार्मर को वहां पर स्थापित कर दिया जाएगा." - आरएस ठाकुर, अधीक्षण अभियंता, बिजली बोर्ड कुल्लू

