मां के सामने बहन की कुल्हाड़ी से निर्मम हत्या, भाई को कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा, चौंकाने वाली है वजह
बाराबंकी में मां ने अपने बेटे के खिलाफ दर्ज कराया था मुकदमा, कोर्ट ने 18 महीने में सुनाया फैसला

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : January 7, 2026 at 9:03 PM IST
बाराबंकीः भाई द्वारा अपनी बहन की कुल्हाड़ी से निर्मम हत्या करने के मामले में जिला कोर्ट ने 18 महीने में ही फैसला सुना दिया है. अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नम्बर - 2 राकेश कुमार सिंह प्रथम ने बुधवार को आरोपी भाई को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और 80 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है. मां ने ही अपने बेटे के खिलाफ मुकदमा द्वारा दर्ज कराया गया था.
एडीजीसी अरविंद राजपूत ने बताया कि कस्बा व थाना सफदरगंज के नई बस्ती निवासी जोहरा बानो ने 28 जून 2024 को सफदरगंज थाने में तहरीर दी थी. जिसमें उन्होंने बताया था कि 28 जून को सुबह 5 बजे के आसपास में अपने घर के आंगन में बैठी थी. इसी दौरान उससे अलग कमरे में रहने वालाबेटा मो. उस्मान उठा और घर में रखी कुल्हाड़ी से बेटी जमीला बानों (30) पर ताबड़तोड़ हमला कर उसकी हत्या कर दी. जोहरा ने बताया था कि जब उसने रोकने का प्रयास किया तो धमकी और हत्या करके उसके सामने ही घर से भाग गया. मो. उस्मान अपनी बहन जमीला बानो पर शक करता था. बेटी की शादी मो. आसिफ निवासी त्रिलोकपुर थाना मसौली बाराबंकी के साथ दो-ढाई वर्ष पूर्व हुई थी. तीन माह से घर पर आकर रह रही थी.
एडीजीसी ने बताया कि वारदात के बाद पुलिस ने मो. उस्मान को मौके से ही आलाकत्ल के साथ गिरफ्तार किया था. मो. उस्मान की मां की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर तफ्तीश शुरू की. तत्कालीन विवेचक एसएचओ सुधीर कुमार सिंह द्वारा साक्ष्य संकलन कर वैज्ञानिक विधि से विवेचना पूर्ण कर मो. उस्मान के विरुद्ध 22 जुलाई 2024 को चार्जशीट कोर्ट पर दाखिल की गई. मामले में अभियोजन ने ठोस गवाह पेश किए. मृतका की मां और मामा समेत 6 गवाह अभियोजन ने पेश किए. गवाहों की गवाही और दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार सिंह प्रथम ने उस्मान पुत्र स्वर्गीय इस्लाम अहमद को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और 80 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई.

