भारी घाटे में डूबे दिल्ली वित्तीय निगम पर सरकार ने जड़ा ताला, उपराज्यपाल के आदेश पर अधिसूचना जारी
दिल्ली वित्तीय निगम' (DFC) को बंद करने का आदेश जारी कर दिया है. उपराज्यपाल के आदेश से इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई.

Published : February 10, 2026 at 7:55 AM IST
नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक और वित्तीय निर्णय लेते हुए 'दिल्ली वित्तीय निगम' (DFC) को बंद करने का आदेश जारी कर दिया है. वित्तीय रूप से हानि होने और जनहित के मद्देनजर इस निगम को समाप्त की प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से शुरू कर दी गई है. दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना के आदेश से इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई.
मंत्रिमंडल के निर्णय पर लगी मुहर
जारी अधिसूचना के अनुसार, दिल्ली सरकार की कैबिनेट ने डीएफसी की वित्तीय स्थिति की समीक्षा के बाद इसे बंद करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. कैबिनेट ने 14 जनवरी 2026 को अपने निर्णय संख्या 3294 के माध्यम से इस पर अपनी मुहर लगाई थी. राज्य वित्तीय निगम अधिनियम, 1951 की धारा 45 के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए उपराज्यपाल ने इसके खत्म होने का रास्ता साफ कर दिया है.
जानिए अब क्या होगा? परिचालन पर लगी रोक
अधिसूचना जारी होने के साथ ही दिल्ली वित्तीय निगम के सभी सामान्य परिचालन रोक दिए गए हैं. अब निगम किसी भी नए ऋण की स्वीकृति या वितरण नहीं कर सकेगा. वर्तमान में निगम का कार्य केवल बकाया राशि की वसूली, संपत्तियों का निपटान और देनदारियों का भुगतान करने तक सीमित रहेगा. डीएफसी के निदेशक बोर्ड और प्रबंधन की सभी शक्तियां अब नई गठित 'समापन समिति' के पास होंगी.

समापन समिति संभालेगी कमान
निगम को सुचारू रूप से बंद करने के लिए एक उच्च स्तरीय 'समापन समिति' (Winding-up Committee) का गठन किया गया है. इसके अध्यक्ष दिल्ली सरकार के प्रशासनिक सचिव (वित्त) होंगे. सदस्यों के तौर पर इसमें उद्योग, विधि और सेवा विभागों के सचिवों के साथ-साथ चंडीगढ़ प्रशासन और सिडबी (SIDBI) के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है. यह समिति निगम की संपत्तियों, बैंक बैलेंस और रिकॉर्ड को अपने नियंत्रण में लेगी. साथ ही कानूनी कार्यवाही के जरिए बकाया वसूलने और सरकारी व अन्य देनदारियों को चुकाने का काम करेगी.
कर्मचारियों के हितों का रखा जाएगा ध्यान
निगम के कर्मचारियों के भविष्य को लेकर अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि उनके वेतन, सेवानिवृत्ति लाभ, पेंशन और अन्य देय राशियों का निपटारा मौजूदा सरकारी नियमों और विधिक सलाह के आधार पर किया जाएगा. सरकार ने आश्वासन दिया है कि कानून और उचित प्रक्रिया के बिना कर्मचारियों के विरुद्ध कोई प्रतिकूल कदम नहीं उठाया जाएगा. जब संपत्तियों के निपटान और देनदारियों के भुगतान की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, तब उपराज्यपाल द्वारा एक और अधिसूचना जारी कर डीएफसी के 'अंतिम विघटन' की घोषणा की जाएगी. तब तक निगम के खिलाफ चल रही सभी कानूनी कार्यवाही जारी रहेगी और समापन समिति अधिकृत अधिकारियों के माध्यम से इनका प्रतिनिधित्व करेगी.
मालूम हो कि राजधानी में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए स्थापित 'दिल्ली वित्तीय निगम' (DFC) अब इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रहा है. लंबे समय से भारी वित्तीय संकट और लगातार बढ़ते घाटे से जूझ रहे इस निगम को दिल्ली सरकार ने बंद करने का औपचारिक निर्णय ले लिया. निगम की आर्थिक स्थिति इतनी जर्जर हो चुकी है कि अब इसे पुनर्जीवित करना संभव नहीं रह गया था.
कर्मचारी देनदारियों का बोझ
दिल्ली वित्तीय निगम की वित्तीय हालत पिछले कुछ वर्षों में बद से बदतर होती गई. वित्त वर्ष 2023-24 के आंकड़ों के मुताबिक, निगम का ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स बढ़कर 55.80 प्रतिशत के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. निगम का कुल संचित घाटा 42 करोड़ रुपये को पार कर गया है, जबकि इसकी नेटवर्थ शून्य से भी नीचे यानी माइनस 15.5 करोड़ रुपये तक गिर चुकी है.
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि निगम अब 'सफेद हाथी' बन चुका था. इसकी प्रशासनिक लागत इसकी आय से कहीं अधिक हो गई थी. स्थिति यह थी कि निगम के पास अपने 28 कर्मचारियों के वेतन और पेंशन लाभ देने तक के पैसे नहीं बचे थे. कर्मचारी देनदारियों का बोझ ही लगभग 66 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. पिछले महीने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने समीक्षा बैठक के बाद स्पष्ट किया कि जो इकाई जनता की सेवा करने के बजाय सार्वजनिक संसाधनों पर बोझ बन जाए, उसे जारी रखना तर्कसंगत नहीं है.
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