रणथंभौर के दुमोदा में 3 साल के मासूम को उठा ले गया लेपर्ड, दर्दनाक मौत के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने किया हंगामा
लेपर्ड के हमले से 3 वर्षीय मासूम की मौत के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने वन चौकी में हंगामा किया.

Published : August 21, 2026 at 7:41 AM IST
|Updated : August 21, 2026 at 8:06 AM IST
सवाई माधोपुर : रणथंभौर टाइगर रिजर्व की फलौदी रेंज से सटे दुमोदा गांव में एक दिल दहला देने वाला दर्दनाक हादसा सामने आया है. घर के आंगन में खेल रहे महज 3 साल के मासूम पर अचानक एक लेपर्ड ने हमला कर दिया और परिजनों के सामने ही उसे मुंह में दबोचकर जंगल की ओर भाग गया. मासूम को बचाने के लिए मां चीखते हुए तेंदुए के पीछे भी भागी, लेकिन वह उसे छुड़ा नहीं पाई. बच्चे का शव गांव के नजदीक की पहाड़ी पर मिला. घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई.
आंगन में खेल रहा था मासूम : घटना गुरूवार देर शाम की है. दुमोदा गांव निवासी संजय बैरवा का 3 वर्षीय पुत्र दिलखुश घर के आंगन में परिजनों के पास ही खेल रहा था. इसी दौरान पास की झाड़ियों से अचानक एक लेपर्ड निकला और उसने सीधे दिलखुश पर हमला बोल दिया. लेपर्ड बच्चे को जबड़े में दबाकर तेजी से जंगल और पहाड़ियों की ओर भाग निकला. डीएफओ मानस सिंह ने बताया कि दुमोदा गांव में लेपर्ड एक बच्चे को उठाकर ले गया जो एक दुखद घटना हुई है. डीएफओ ने कहा कि परिवार ओर ग्रामीणों की मांग थी कि परिवार को उचित मुआवजा मिले. डीएफओ ने बताया कि विभाग पीड़ित परिवार की नियमानुसार मदद करेगा.
इसे भी पढ़ें: Leopard Attack : रणथंभौर से सटे गांव में लेपर्ड का अटैक, घर में घुसकर 78 वर्षीय महिला को किया घायल
परिजनों और ग्रामीणों ने लाठी-डंडे लेकर तुरंत लेपर्ड का पीछा किया. काफी खोजबीन के बाद गांव से कुछ दूरी पर स्थित पहाड़ी की झाड़ियों में बच्चा लहूलुहान और गंभीर हालत में मिला. ग्रामीण उसे तुरंत जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया. दिलखुश चार बहनों का इकलौता भाई था. मासूम की असमय मौत से परिवार में कोहराम मच गया है और माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है.
वन चौकी में हंगामा : ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना देने के तीन घंटे बाद तक भी वन विभाग का कोई कर्मचारी या जिम्मेदार अधिकारी न तो गांव पहुंचा और न ही अस्पताल. ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में आए दिन हिंसक वन्यजीवों का मूवमेंट बना रहता है, लेकिन बार-बार शिकायत के बावजूद वन विभाग ने सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए. लापरवाही से नाराज बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने फलौदी रेंज स्थित वन चौकी का घेराव कर दिया. आक्रोशित भीड़ ने चौकी परिसर में खड़ी एक बाइक में तोड़फोड़ कर दी.
पुलिस और प्रशासनिक अमले ने संभाला मोर्चा : वन चौकी में आगजनी और तनाव की सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक (SP) ज्येष्ठा मैत्रयी के निर्देश पर भारी पुलिस जाप्ता मौके पर भेजा गया. मौके पर तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए एसडीएम मांगीलाल, डीएसपी ग्रामीण रामधन जाट, मानटाउन थानाधिकारी सुनील गुप्ता और कोतवाली थानाधिकारी मदन लाल भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे और कानून व्यवस्था संभाली. ग्रामीणों की मांग थी कि लापरवाह वनकर्मियों और अधिकारियों को तुरंत निलंबित किया जाए, आदमखोर लेपर्ड को तुरंत पकड़ा जाए और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए. मांगें पूरी न होने तक ग्रामीणों ने बच्चे का शव लेने और पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया था.
इसे भी पढ़ें: लेपर्ड की दहशत: गाय के शिकार से गुस्साए ग्रामीणों का वन विभाग के खिलाफ प्रदर्शन
प्रशासन की समझाइश पर शांत हुआ मामला : तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए डीसीएफ (उप वन संरक्षक) मानस सिंह ने परिजनों और ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल के साथ कोतवाली थाने में विस्तृत वार्ता की. इस बैठक में एसडीएम, डीएसपी, नायब तहसीलदार पुष्पेंद्र शर्मा और आरयूपीटी रेंजर अश्विनी प्रताप सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे. वार्ता के दौरान डीसीएफ मानस सिंह ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि दोषी और लापरवाह वनकर्मियों के खिलाफ सख्त विभागीय जांच और कार्रवाई की जाएगी. गांव और आसपास के आबादी क्षेत्र में तुरंत पिंजरे लगाकर लेपर्ड को रेस्क्यू किया जाएगा. पीड़ित परिवार को सरकारी नियमानुसार जल्द से जल्द आर्थिक मुआवजा दिलाया जाएगा. अधिकारियों के ठोस आश्वासन और समझाइश के बाद ग्रामीण शांत हुए और बच्चे के शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए राजी हो गए. फिलहाल इलाके में शांति है, लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस और वन विभाग की टीमें तैनात हैं.
इसे भी पढ़ें: लेपर्ड अलर्ट : पानी और शिकार की तलाश में जंगल छोड़ गांवों तक पहुंच रहे तेंदुए, दो माह में कई हमले और दहशत

