जंतर-मंतर पर अमेरिका-इजराइल के खिलाफ वाम दलों का प्रदर्शन, ईरान पर हमले को बताया गैरकानूनी
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने बताया कि इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किया गया हमला अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ है.


Published : March 3, 2026 at 1:59 PM IST
नई दिल्ली: राजधानी के जंतर-मंतर पर मंगलवार को वामपंथी दलों और भारत की क्रांतिकारी मजदूर पार्टी ने अमेरिका और इजराइल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया. संगठनों ने ईरान पर हुए हमले को “गैरकानूनी” और “साम्राज्यवादी” बताते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन बताया. बड़ी संख्या में कार्यकर्ता हाथों में तख्तियां लेकर पहुंचे और शांति के समर्थन में नारे लगाए.
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) की नेशनल कमेटी के सदस्य प्रो. दिनेश सी. वार्ष्णेय ने बताया कि इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किया गया हमला अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर का खुला उल्लंघन है और ऐसे हमलों को तुरंत रोका जाना चाहिए. उन्होंने केंद्र सरकार से भी अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की. प्रो. वार्ष्णेय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने सऊदी अरब और इजराइल के नेतृत्व से बात की, लेकिन ईरान पर हुए हमले और वहां के शीर्ष धार्मिक नेता की हत्या पर सरकार की ओर से स्पष्ट रुख सामने नहीं आया.
"संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन”: प्रो. दिनेश सी. वार्ष्णेय: उन्होंने इसे चिंताजनक बताया और कहा कि भारत को स्वतंत्र राष्ट्रों की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि इजराइल के पास परमाणु हथियार होने की चर्चाएं लंबे समय से चल रही हैं, जबकि ईरान के पास ऐसे हथियार होने के ठोस प्रमाण नहीं हैं. ऐसे में किसी देश पर बातचीत के दौरान हमला करना पूरी तरह अनुचित और गैरकानूनी है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि निरीक्षण और वार्ता की प्रक्रिया के बीच सैन्य कार्रवाई करना वैश्विक शांति के लिए खतरा है.
सैन्य कार्रवाइयां साम्राज्यवादी मानसिकता को दर्शाती हैं: वहीं, सीपीआई(एम) के दिल्ली सचिव मंडल सदस्य सिद्धार्थ ने भी कहा कि अमेरिका द्वारा पश्चिम एशिया के देशों में की गई सैन्य कार्रवाइयां साम्राज्यवादी मानसिकता को दर्शाती हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि शक्तिशाली देश अपनी ताकत के दम पर दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में दखल दे रहे हैं और वहां की सरकारों को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि किसी भी देश के राष्ट्रपति या शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाकर हमला करना अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को कमजोर करता है. उन्होंने कहा कि वाम दल इसका पुरजोर विरोध करता हैं. उन्होंने कार्यकर्ताओं से कार्यक्रम को शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से चलाने की अपील भी की.
प्रदर्शन के दौरान मौजूद लोगों ने शांति और लोकतंत्र के समर्थन में नारे लगाए. आयोजकों ने कहा कि विरोध का उद्देश्य किसी देश की जनता के खिलाफ नहीं, बल्कि “साम्राज्यवादी नीतियों” के खिलाफ आवाज उठाना है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं.
यह भी पढ़ें:

