जयपुर की गलियों में फिर दिखा पैंथर, वन विभाग ने किया ट्रेंकुलाइज
मंगलवार सुबह राजधानी के MNIT इलाके में पैंथर दिखने से सनसनी फैल गई.

Published : December 9, 2025 at 12:51 PM IST
जयपुर : एमएनआईटी में मंगलवार सुबह पैंथर देखे जाने की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तुरंत हरकत में आ गई और उसे रेस्क्यू किया. सूचना के आधार पर टीम ने कैंपस में सर्च ऑपरेशन शुरू किया और संवेदनशील क्षेत्रों को घेराबंदी कर उसे सफलतापूर्वक पकड़ लिया. लेपर्ड को सुरक्षित पिंजरे में डालकर वन विभाग की टीम अब उसे प्राकृतिक आवास क्षेत्र में शिफ्ट करने के लिए मौके से रवाना हो चुकी है. डॉ अरविंद माथुर ने पहले पैंथर को ट्रेंकुलाइज किया. इस दौरान रेंजर जितेंद्र सिंह शेखावत, सहायक वनपाल कृष्णा कुमार मीना, राजकिशोर योगी सहित टीम मौजूद रही.
राजधानी जयपुर के पैंथर रिजर्व क्षेत्र से निकालकर घनी आबादी वाले इलाकों में लगातार तेंदुए की चहल कदमी ने वन विभाग के साथ-साथ स्थानीय लोगों की भी नींद उड़ा दी थी. मंगलवार को MNIT से प्राप्त सूचना के आधार पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और लेपर्ड की तलाश शुरू की. रेंज अधिकारी जितेंद्र सिंह शेखावत रेस्क्यू टीम के सदस्य मौके पर मौजूद थे.
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इसके पहले झालना के जंगल से निकलकर एक पैंथर बजाज नगर इलाके में लगातार घरों के सीसीटीवी पर दर्ज हो रहा था. आलम यह है कि 30 दिन में आठ बार पैंथर का रिहायशी इलाकों में मूवमेंट दर्ज हुआ है. गांधीनगर स्टेशन के नजदीक एजी कॉलोनी, अनीता कॉलोनी, बजाज एनक्लेव समेत आसपास के इलाके में लगातार घरों के सीसीटीवी पर यह पैंथर नजर आ रहा था. इस बारे में झालाना वन क्षेत्र के रेंजर जितेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि लगातार वन विभाग की टीम लेपर्ड के मूवमेंट को लेकर मॉनिटरिंग कर रही थी.
सीसीटीवी में कैद हुई हरकत : बजाज नगर के स्थानीय निवासी की ओर से मुहैया कराए गए एक वीडियो में पैंथर का डरावना मूवमेंट नजर आया. यहां 2 कॉलोनी में पिछले 48 घंटों में 5 बार अलग-अलग घरों में पैंथर CCTV में नजर आया था. बजाज नगर की अनिता कॉलोनी में 3 बार और एजी कॉलोनी में 2 बार लेपर्ड दीवार कूदकर घर में घुसते हुए और गार्डन में चहल कदमी करते नजर आया. अलग-अलग वीडियो में यह पैंथर किसी घर के बगीचे से, तो कहीं सड़क और घरों के पास से होकर निकलता हुआ नजर आता है. जिसके बाद लोगों में भय का माहौल है. बीते दो दिनों में इस पैंथर को चार से पांच स्थानों पर देखा गया था. सोमवार को रेस्क्यू टीम के सर्च अभियान के दौरान शिक्षा संकुल और जलधारा के आसपास भी इसके पग मार्ग मिले थे.
राजधानी के जंगलों में 90 से ज्यादा लेपर्ड : राजस्थान के जंगलात महकमे के आंकड़े बताते हैं कि यहां झालना, अमागढ़ और बीड पापड़ रिजर्व क्षेत्र में कुल 90 से ज्यादा लेपर्ड निवास करते हैं, जबकि इस इलाके के जंगल का दायरा करीब 62 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है. स्थानीय निवासी सुनील शर्मा के मुताबिक एक वक्त मालवीय नगर, जवाहरलाल नेहरू मार्ग, आगरा रोड, खोनागौरियां और जगतपुरा जैसे क्षेत्र झालाना वन क्षेत्र का हिस्सा हुआ करते थे, लेकिन बढ़ती आबादी के कारण 80 से 85 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र अब घट गया है.
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शहर से लेपर्ड मूवमेंट रोकने की कवायद : राजधानी के आबादी वाले इलाके में लगातार लेपर्ड का मूवमेंट वन विभाग की चिंता का सबब बन रहा है. लिहाजा झालाना के जंगल में एक एनक्लोजर बनाने की कवायद शुरू हो चुकी है. जयपुर जू की तर्ज पर यह एनक्लोजर तैयार होगा, जिसमें चीतल रखे जाएंगे. झालाना जंगल सफारी के इंचार्ज और रेंजर जितेंद्र सिंह ने बताया कि यहां रहने वाले लेपर्ड को पर्याप्त मात्रा में खाना मिल पाए, इसके लिए एनक्लोजर में चीतल को रखा जाएगा. ब्रीडिंग से उनकी संख्या में इजाफा किया जाएगा, चीतल बढ़ने पर सिस्टमेटिक तरीके से उन्हें जंगल में छोड़ दिया जाएगा. इस काम के लिए भरतपुर के साथ-साथ डियर पार्क से भी चीतल लेंगे. सिंह के मुताबिक आगामी 5 दिनों में एंक्लोजर का काम शुरू हो जाएगा, जिसका वर्क आर्डर जारी हो चुका है. हालांकि इसके पहले भी डियर पार्क से कुछ चीतल यहां शिफ्ट किए गए थे, लेकिन यह योजना सही प्लानिंग के अभाव में विफल हो गई थी. फिलहाल झालाना में 28 मेल और फीमेल लेपर्ड है, जबकि चीतल डेढ़ दर्जन के करीब है.

